Borewell Accident राजस्थान के कोटपूतली के बड़ियाली की ढाणी में 700 फीट गहरे बोरवेल में गिरी तीन वर्षीय चेतना को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। सोमवार दोपहर हुई इस घटना को तीन दिन हो चुके हैं, लेकिन बच्ची अभी भी बोरवेल में फंसी हुई है। प्रशासन और रेस्क्यू टीम का हर संभव प्रयास जारी है, लेकिन चेतना को अब तक बाहर नहीं निकाला जा सका है।
घटना का विवरण
सोमवार को खेलते समय चेतना अचानक बोरवेल में गिर गई। बोरवेल की गहराई करीब 700 फीट है, लेकिन चेतना 155 फीट की गहराई पर अटक गई। शुरुआत में उसे निकालने के लिए स्थानीय स्तर पर जुगाड़ किए गए, लेकिन चारों प्रयास असफल रहे। इसके बाद प्रशासन ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को बुलाया।
रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति
रेस्क्यू टीमों ने बोरवेल के समानांतर खुदाई शुरू की। अब तक 160 फीट तक खुदाई पूरी कर ली गई है, लेकिन आगे 10 फीट की खुदाई के लिए पत्थरों की बाधा सामने आ गई। एनडीआरएफ इंचार्ज योगेश मीणा ने बताया कि पत्थरों को मैन्युअली काटने के लिए रेट माइनर्स की मदद ली जा रही है।
- समानांतर गड्ढा: टीम ने 170 फीट तक खुदाई की योजना बनाई है।
- मैन्युअल सुरंग: पत्थर काटने के बाद बोरवेल तक हॉरिजेंटल सुरंग बनाई जाएगी।
- चेतना की स्थिति: पिछले 45 घंटे से कैमरे पर कोई मूवमेंट नहीं दिखा है, जिससे चिंता बढ़ गई है।
कलेक्टर की गैर-मौजूदगी पर नाराजगी
घटना के तीन दिन बाद कलेक्टर कल्पना अग्रवाल मौके पर पहुंचीं। उनकी गैर-मौजूदगी को लेकर स्थानीय लोग काफी नाराज हैं। बताया जा रहा है कि कलेक्टर छुट्टी पर थीं, लेकिन ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि ऐसी आपातकालीन स्थिति में उनकी अनुपस्थिति से प्रशासन पर भरोसा कैसे किया जा सकता है।
चेतना का परिवार और ग्रामीणों की स्थिति
परिवार और ग्रामीणों में रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी को लेकर गहरी नाराजगी है। चेतना के माता-पिता लगातार उसकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। ग्रामीण भी मौके पर मौजूद हैं और प्रशासन की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं।
कैसे हुआ हादसा?
चेतना सोमवार दोपहर करीब 2 बजे खेलते समय बोरवेल में गिर गई। गांव के लोग तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े। शुरुआती प्रयासों में देसी जुगाड़ के जरिए उसे निकालने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
चुनौतियां और संभावनाएं
- रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा: पत्थरों की वजह से खुदाई रुक-रुक कर हो रही है।
- टाइम कंस्ट्रेंट: चेतना को बोरवेल में फंसे 65 घंटे हो चुके हैं, जिससे उसकी स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
- मौसम और तकनीकी दिक्कतें: गहराई में खुदाई और समय की कमी रेस्क्यू टीम के सामने बड़ी चुनौती है।
जरूरतमंद परिवार के लिए उम्मीद
चेतना को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन, रेस्क्यू टीम और स्थानीय लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं। इस घटना ने बोरवेल सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।
हम सबकी यही प्रार्थना है कि चेतना जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर आए।
