Author: UmaKant Joshi
हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस घातक बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना है। साल 2023 में दुनियाभर में लगभग 96 लाख से 1 करोड़ लोगों की मौत कैंसर की वजह से हुई, जो हर दिन लगभग 26,300 मौतों के बराबर है। लेकिन अब कैंसर के इलाज को लेकर एक बड़ी उम्मीद सामने आई है। ब्रिटेन के वैज्ञानिक एक ऐसी वैक्सीन विकसित करने में जुटे हैं, जो कैंसर को विकसित होने से 20 साल पहले ही रोक सकती है। यह वैक्सीन शरीर में अज्ञात कैंसर कोशिकाओं (pre-cancerous cells) का पता लगाकर उन्हें खत्म कर देगी, जिससे इस घातक बीमारी का खतरा बहुत पहले ही टल जाएगा। कैंसर रोकने वाली वैक्सीन पर ऐतिहासिक कामब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड (University of Oxford) और दिग्गज फार्मा कंपनी जीएसके (GSK) मिलकर इस वैक्सीन को विकसित करने में जुटी हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह वैक्सीन प्री-कैंसर स्टेज में ही कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर सकती है। क्या कहती हैं विशेषज्ञ?ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑन्कोलॉजी प्रोफेसर सारा ब्लागडेन का कहना है कि कैंसर के विकसित होने में 20 साल या उससे अधिक समय लग सकता है। यह प्रक्रिया इतनी धीमी होती है कि शुरुआती स्टेज में इसे पहचानना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन यह वैक्सीन उन अदृश्य कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करेगी, जो कैंसर बनने की प्रक्रिया में होती हैं और उन्हें बढ़ने से रोक देगी। कैसे काम करेगी यह वैक्सीन?✅ कैंसर को विकसित होने से पहले ही पहचानकर नष्ट करेगी✅ ट्यूमर स्पेसिफिक प्रोटीन को टारगेट कर कैंसर सेल्स को खत्म करेगी✅ कैंसर की पुनरावृत्ति (relapse) रोकने में मदद करेगी✅ उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को समय से पहले सुरक्षा प्रदान करेगी जीएसके और ऑक्सफोर्ड द्वारा शुरू किए गए ‘कैंसर इम्यूनो-प्रिवेंशन प्रोग्राम’ के तहत वैज्ञानिक नई तकनीकों और नवाचारों का उपयोग करके कैंसर के खिलाफ एक प्रभावी वैक्सीन विकसित करने पर काम कर रहे हैं। वैक्सीन के विकास में कितना समय लगेगा?जीएसके इस शोध कार्यक्रम के लिए £50 मिलियन (करीब 538 करोड़ रुपये) का निवेश कर रहा है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वैक्सीन को विकसित होने और व्यापक रूप से उपलब्ध होने में कितना समय लगेगा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नैदानिक परीक्षण सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में कैंसर से बचाव बेहद आसान हो सकता है। कैंसर वैक्सीन से एक नई उम्मीदइससे पहले भी कई प्रकार की कैंसर वैक्सीन बनाई गई हैं, जो कुछ मामलों में प्रभावी साबित हुई हैं। लेकिन यह नई वैक्सीन पूरी तरह से कैंसर को विकसित होने से पहले ही रोकने का लक्ष्य रखती है। यदि यह सफल होती है, तो यह कैंसर के खिलाफ एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। बड़ी उम्मीदें:🔹 कैंसर की शुरुआती पहचान और रोकथाम में मदद🔹 कैंसर के इलाज पर आने वाले भारी खर्च को कम करेगा🔹 कैंसर से बचाव को लेकर दुनिया को नई दिशा मिलेगी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह वैक्सीन सफल होती है, तो कैंसर को हराना आने वाले समय में बहुत आसान हो जाएगा।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय बजट 2025-26 की सराहना करते हुए इसे संतुलित विकास का रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि बजट में मध्यम वर्ग को राहत, किसानों को आर्थिक संबल और एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के प्रावधान किए गए हैं। बजट में ‘मेक फॉर वर्ल्ड’ की दिशामुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और मजबूत करेगा। उन्होंने विशेष रूप से ‘मेक इन इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक फॉर वर्ल्ड’ की अवधारणा को सराहा, जिससे भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा मिलेगी। जनता के भविष्य को संवारने वाला बजटभजनलाल शर्मा ने कहा कि यह बजट देश के हर वर्ग, खासकर गरीब, युवा, महिला और किसान के कल्याण पर केंद्रित है। इसमें कृषि, रोजगार, एमएसएमई, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और कौशल प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं। जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाने पर आभारसीएम ने जल जीवन मिशन (JJM) की अवधि 2028 तक बढ़ाने के निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। इसके अलावा राज्य को पावर सेक्टर रिफॉर्म के लिए विशेष सहायता और पूंजीगत निवेश के लिए ब्याज मुक्त ऋण देने के प्रस्तावों को मंजूरी मिलने पर भी उन्होंने संतोष जताया। किसानों और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावामुख्यमंत्री ने बताया कि बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—✅ किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख✅ बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई की मंजूरी✅ पीएम धन धान्य कृषि योजना की शुरुआत✅ छोटे शहरों को 88 नए एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना✅ आईआईटी संस्थानों में सीटों की बढ़ोतरी✅ मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उपाय रोजगार और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसरबजट में स्टार्टअप्स, एमएसएमई और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रावधान किए गए हैं, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने इसे समृद्ध और सशक्त राजस्थान के विजन को मजबूती देने वाला बजट बताया।
Rajasthan विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेपर लीक का मुद्दा प्रमुखता से उठा। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने अभिभाषण में इस मामले को उठाते हुए पिछली सरकार पर आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा सरकार ने 100 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं और 260 लोगों को गिरफ्तार किया है। बावजूद इसके, बड़े सरगनाओं पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है। हर साल लीक हो रहे पेपर, प्रभावित हो रहे लाखों छात्रराजस्थान में 2019 के बाद से हर साल औसतन तीन पेपर लीक हो रहे हैं, जिससे करीब 40 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि ये लीक हुए प्रश्न पत्र 5 से 15 लाख रुपये में बेचे गए। यहां तक कि एक स्कूल शिक्षक को 40 लाख रुपये देकर पेपर खरीदा गया, जिसे बाद में प्रति छात्र 5 लाख रुपये में बेचा गया। कौन हैं पेपर लीक माफिया?पेपर लीक के मामलों में कई बड़े नाम सामने आए हैं। अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह मीणा ने आरपीएससी के सदस्य बाबूलाल कटारा से एक करोड़ रुपये में पेपर खरीदा था। सुरेश ढाका नामक व्यक्ति, जो एक कोचिंग सेंटर का मालिक था, ने भी पेपर लीक किया। रामकृपाल मीणा, जो रीट परीक्षा के पेपर लीक का मास्टरमाइंड था, उसे सरकारी शिक्षा संकुल के स्ट्रांग रूम की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा, अशोक नाथावत, भूपेंद्र सारण, गमाराम खिलेरी, हर्षवर्धन मीणा, और जगदीश मीणा जैसे नाम पेपर लीक माफिया के रूप में सामने आए हैं। सरकार की कार्रवाई और राजनीतिक घमासानविधानसभा में विपक्षी नेता सचिन पायलट और किरोड़ीलाल मीणा ने पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग की। किरोड़ीलाल मीणा ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बड़े नामों को अब तक नहीं पकड़ा गया है। वहीं, एसआई भर्ती 2021 के चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण भी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक दिया गया है। पेपर लीक के कारण रद्द हुई परीक्षाएं .REET लेवल-2 (2021) – परीक्षा रद्द, फिर दोबारा आयोजित.राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती (2018, 2022) – दो बार लीक, दोबारा परीक्षा.हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती (2022) – पेपर लीक के चलते रद्द.जेईएन सिविल डिग्री (2018) – परीक्षा लीक, फिर रद्द.द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती (2022) – सामान्य ज्ञान पेपर लीक होने से परीक्षा रद्द युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कब रुकेगा? राजस्थान में बार-बार होने वाले पेपर लीक ने लाखों युवाओं की मेहनत पर पानी फेर दिया है। सरकार ने भले ही 100 एफआईआर दर्ज की हों, लेकिन जब तक बड़े मास्टरमाइंड पकड़े नहीं जाते, तब तक इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। अब देखना यह है कि सरकार युवाओं के हक में क्या ठोस कदम उठाती है या यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बहस बनकर रह जाता है।
Rajasthan विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भजनलाल सरकार एक अहम विधेयक “राजस्थान धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025” पेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं इस विधेयक को सदन में प्रस्तुत करेंगे। यह विधेयक राज्य में जबरन धर्म परिवर्तन, धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन और लव-जिहाद जैसे मामलों को रोकने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। विपक्ष ने इस विधेयक पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे सदन में हंगामे के आसार नजर आ रहे हैं। पूर्ववर्ती विधेयक की वापसी और नया विधेयकइससे पहले भजनलाल सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में लाए गए “राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2008” को वापस ले लिया। यह विधेयक भी धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकने के लिए लाया गया था और इसे विधानसभा से पारित कर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था। हालांकि, इस विधेयक को मंजूरी नहीं मिली और अब मौजूदा सरकार ने इसे औपचारिक रूप से वापस ले लिया है। नए विधेयक “राजस्थान धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025” में कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनमें लव-जिहाद और जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि इस विधेयक से राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा होगी और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी। विपक्ष की रणनीति और संभावित हंगामायह विधेयक पेश होने से पहले ही विपक्ष ने विरोध की रणनीति तैयार कर ली है। पिछली बार जब वसुंधरा सरकार इस तरह का विधेयक लेकर आई थी, तब कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध किया था। इस बार भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सदन से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक राजनीतिक फायदे के लिए लाया जा रहा है और इससे समाज में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस विधेयक को “संविधान के खिलाफ” बताते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार दिया है। विधानसभा में कार्य सलाहकार समिति की रिपोर्ट पेश होगीआज विधानसभा में कार्य सलाहकार समिति (BAC) का आठवां प्रतिवेदन भी पेश किया जाएगा। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग इस रिपोर्ट को सदन में प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा शुरू होगी, जिसमें सरकार की नीतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विपक्ष सरकार को प्रशासनिक बदलावों, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की समीक्षा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद जैसे मुद्दों पर घेरने की योजना बना रहा है। नए विधेयक भी होंगे पेशसदन में इस बार कुछ नए विधेयक भी लाए जाएंगे। इनमें बीकानेर और भरतपुर में विकास प्राधिकरणों के गठन से जुड़े विधेयक शामिल हैं। सरकार पहले ही इनके अधिनियम जारी कर चुकी थी, लेकिन अब इन्हें संवैधानिक रूप से लागू करने के लिए विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। इसके अलावा, कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण के लिए एक नया विधेयक भी लाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट को पहले ही सूचित किया था कि वह इस विषय पर एक विधेयक लाने जा रही है, जिसका प्रारूप पिछले दो वर्षों से तैयार है। सरकार की रणनीति और जवाबी तैयारीसरकार को भी पता है कि विपक्ष इस विधेयक पर बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है। इसीलिए सत्ता पक्ष ने अपने विधायकों को प्रशिक्षण देकर जवाबी रणनीति तैयार कर ली है। सरकार ने विधायकों को निर्देश दिया है कि वे विपक्ष के हर हमले का तथ्यात्मक और प्रभावी ढंग से जवाब दें। निष्कर्षराजस्थान विधानसभा का यह बजट सत्र कई अहम मुद्दों और विधेयकों का गवाह बनने वाला है। “राजस्थान धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025” पर जहां सत्ता पक्ष इसे **धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा का कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास करार दे रहा है। सदन में इस पर बड़ी बहस और विवाद देखने को मिल सकता है। वहीं, अन्य विधेयकों और नीतियों को लेकर भी सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहेंगे। अब देखना यह होगा कि सरकार अपनी रणनीति से विपक्ष के हमलों का किस तरह जवाब देती है।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) प्री-2024 परीक्षा के एडमिट कार्ड अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। यह परीक्षा 2 फरवरी 2025 को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा में अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट के पांचवें विकल्प को भरने के लिए अतिरिक्त 10 मिनट का समय दिया जाएगा, जिससे वे उत्तर पत्रक को सही तरीके से भर सकें। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया आयोग सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि अभ्यर्थी अपने एडमिट कार्ड RPSC की आधिकारिक वेबसाइट (https://rpsc.rajasthan.gov.in) या एसएसओ पोर्टल (https://sso.rajasthan.gov.in) से डाउनलोड कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अपना आवेदन-पत्र क्रमांक और जन्मतिथि दर्ज करनी होगी। परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचना अनिवार्य आयोग ने परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले यानी सुबह 11 बजे तक परीक्षा केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी गई है। परीक्षा प्रारंभ होने के 60 मिनट पूर्व तक ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। परीक्षा केंद्र पर समय पर पहुंचना अनिवार्य है, ताकि सभी उम्मीदवारों की पहचान और सुरक्षा जांच समय से पूरी हो सके। देरी से पहुंचने पर उम्मीदवार परीक्षा से वंचित हो सकते हैं। महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश -एडमिट कार्ड में दी गई जानकारी की पहले से जांच कर लें।-परीक्षा के दिन कोई भी वैध पहचान प्रमाण (आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि) साथ लेकर जाएं।-परीक्षा केंद्र पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।-परीक्षा के दौरान सभी निर्देशों का पालन करें और किसी भी समस्या से बचने के लिए समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचे| राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए वे परीक्षा के दिन किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए दिए गए निर्देशों का सही से पालन करें।
Rajasthan विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार से शुरू होने जा रहा है, जिसमें प्रदेश की भजनलाल सरकार 19 फरवरी को अपने कार्यकाल का दूसरा बजट पेश करेगी। इस महत्वपूर्ण सत्र की तैयारियों को लेकर आज बीजेपी विधायक दल की बैठक आयोजित की गई है। यह बैठक दोपहर 2 बजे मुख्यमंत्री आवास पर होगी, जिसमें संसदीय कार्यमंत्री जोगारा पटेल की उपस्थिति में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में विधानसभा सत्र की रणनीति पर मंथन किया जाएगा, साथ ही विधायकों को ई-प्रजेंटेशन दिया जाएगा, ताकि वे बजट सत्र में बेहतर तरीके से भाग ले सकें। इस बार के विधानसभा सत्र में कई तकनीकी नवाचार भी किए जा रहे हैं। अब विधायकों को अपने प्रश्नों और उत्तरों को मोबाइल एप के माध्यम से देखने की सुविधा मिलेगी, जिससे विधानसभा की कार्यवाही अधिक डिजिटल और पारदर्शी होगी। बैठक में यह भी चर्चा की जाएगी कि सदन के भीतर किस प्रकार स्वस्थ परंपराओं को बनाए रखते हुए जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाया जाए। सरकार द्वारा पिछले एक वर्ष में किए गए कार्यों का लेखा-जोखा भी विधायकों को दिया जाएगा, जिससे उन्हें सरकार की उपलब्धियों और कार्यों की जानकारी मिलेगी। संसदीय कार्यमंत्री जोगारा पटेल ने कहा कि राज्य सरकार जनहित की नीतियों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस बजट सत्र में भी सरकार इसी दिशा में कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं और यह बजट भी जन-आकांक्षाओं के अनुरूप होगा। सरकार का दावा है कि पिछले वर्ष प्रस्तुत किए गए बजट की घोषणाओं को त्वरित रूप से लागू किया गया और इस वर्ष भी जनता को राहत देने वाले फैसले लिए जाएंगे। राजस्थान में भाजपा सरकार का यह दूसरा बजट होने के कारण इस पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। सरकार अपनी योजनाओं और नीतियों को और अधिक प्रभावी रूप से लागू करने के लिए बजट के माध्यम से नई घोषणाएं कर सकती है। राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखते हुए सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की संभावना है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार का पहला वर्ष विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। विकसित राजस्थान की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को बजट में और मजबूत किया जाएगा। राज्य सरकार ने अपने पहले ही बजट में कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की थी और इस बार भी जनता को राहत देने वाले फैसले लिए जा सकते हैं। बजट सत्र को लेकर विपक्ष भी पूरी तरह तैयार है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए विभिन्न मुद्दों को उठा सकते हैं, जिनमें किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषय प्रमुख होंगे। हालांकि, सरकार का दावा है कि वह सकारात्मक रवैया अपनाएगी और सदन की स्वस्थ परंपराओं को बनाए रखेगी। इस बजट सत्र के दौरान सरकार के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपने विकास कार्यों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करे और विपक्ष के सवालों का ठोस जवाब दे। राजस्थान में आने वाले वर्षों में होने वाले विकास कार्यों की नींव इसी बजट से रखी जाएगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार किन योजनाओं और नीतियों के माध्यम से प्रदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लेती है।
राजधानी जयपुर में गुइलेन बेरी सिंड्रोम (Guillain-Barre Syndrome, GBS) के तीन मामले सामने आए हैं। संक्रमित मरीजों का इलाज एक निजी अस्पताल में जारी है। सैंपल की जांच सवाई मानसिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज की लैब में की गई, जहां संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग सतर्कएसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने GBS संक्रमण की पुष्टि की।मरीजों की हालत स्थिर बताई जा रही है।स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है, क्योंकि हाल ही में देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी इस बीमारी के मामले सामने आए हैं।क्या है Guillain-Barre Syndrome?GBS एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें इम्यून सिस्टम गलती से शरीर की पेरीफेरल नसों पर हमला कर देता है।इससे मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता और चलने-फिरने में परेशानी होती है।यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति हो सकती है, जिसके लिए तत्काल चिकित्सा देखभाल जरूरी है।लक्षणों को न करें नजरअंदाजचिकित्सकों ने सलाह दी है कि यदि किसी को चलने में दिक्कत, कमजोरी, हाथ-पैर सुन्न होना, या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। प्रशासन इस बीमारी की रोकथाम और जागरूकता बढ़ाने के लिए सतर्कता बरत रहा है।
Rajasthan बीजेपी ने संगठनात्मक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 16 जिलों के जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी है। 5 फरवरी तक प्रदेशाध्यक्ष का निर्वाचन भी पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, निर्धारित समयसीमा से देरी होने के कारण बीजेपी को कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। प्रदेश में संगठनात्मक संरचना -52,163 बूथ, 1135 मंडल, और 44 संगठनात्मक जिलों में से अब तक 16 जिलाध्यक्षों का चुनाव हो चुका है।-शेष 28 जिलाध्यक्षों का चुनाव 31 जनवरी तक पूरा करने की योजना है। घोषित जिलाध्यक्षों की सूची सोमवार को निम्न जिलों में जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा की गई: -कोटा शहर-कोटा देहात-गंगानगर-हनुमानगढ़-बीकानेर देहात-नागौर शहर-नागौर देहात-बाड़मेर-बालोतरा-जोधपुर शहर-जोधपुर देहात इससे पहले 25 जनवरी को अजमेर शहर, अजमेर देहात, भरतपुर, अलवर दक्षिण, और अलवर उत्तर के जिलाध्यक्षों का ऐलान हुआ था। मंडल स्तर की राजनीति में अड़चनें 1.सहमति में देरी:मंडल अध्यक्षों के चयन में स्थानीय विधायक, पूर्व विधायक, जिला पदाधिकारी और अन्य प्रमुख नेताओं की सहमति आवश्यक थी। 2.नामों की अधिकता:प्रत्येक पद के लिए तीन नामों का पैनल बनाने की प्रक्रिया थी, लेकिन कई जगह 20 से अधिक नाम सामने आ गए। 3.विवाद और अनुशासन समिति का हस्तक्षेप: -कुछ नियुक्तियों पर विवाद इतना बढ़ गया कि अनुशासन समिति को हस्तक्षेप करना पड़ा।-16 मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगाई गई।-पांच नियुक्तियों को निरस्त भी किया गया। आगे की योजना .31 जनवरी तक: सभी जिलाध्यक्षों का चुनाव।.5 फरवरी तक: प्रदेशाध्यक्ष का निर्वाचन। निष्कर्ष हालांकि बीजेपी ने देरी के बाद जिलाध्यक्षों के नामों का ऐलान करना शुरू कर दिया है, लेकिन मंडल स्तर पर असहमति और विवाद ने संगठनात्मक प्रक्रिया को प्रभावित किया है। अब पार्टी की प्राथमिकता 5 फरवरी तक प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव पूरी पारदर्शिता और सामंजस्य के साथ संपन्न करना है।
Jaipur पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक मामला 86 लाख रुपये की जमीन धोखाधड़ी से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला मोबाइल स्नैचिंग गैंग के बदमाशों से संबंधित है। पुलिस ने इन आरोपियों से कई अहम सबूत बरामद किए हैं और अन्य वारदातों की जांच कर रही है। 86 लाख की जमीन धोखाधड़ी का मामलासदर थाना पुलिस ने सुनील पारीक (निवासी नरैना, जयपुर) और उसके साथी प्रमोद पारीक (निवासी महुआ, दौसा) को गिरफ्तार किया। घटना का खुलासा:आरोपियों ने जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्रॉपर्टी कारोबारी से 86 लाख रुपये की धोखाधड़ी की।सौदे के दौरान पीड़ित से 13.30 लाख रुपये के चेक लिए और फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर जमीन का बेचान करने की कोशिश की।पहले गिरफ्तार आरोपी:पुलिस ने इस मामले में पहले ही पांच अन्य आरोपियों – रामोवतार शर्मा, शंकरलाल शर्मा, विक्रम राठौड़, पूजा चौधरी, और भंवरलाल शर्मा को गिरफ्तार कर लिया था।पुलिस का कहना:आरोपियों से पूछताछ जारी है, और इससे धोखाधड़ी के अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।मोबाइल स्नैचिंग गैंग का पर्दाफाशगांधीनगर थाना पुलिस ने मोबाइल छीनने वाली गैंग के दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी:लाला उर्फ रतन बैरवा और जगदीश उर्फ लाला (दोनों जवाहर नगर कच्ची बस्ती के निवासी)।बरामदगी:पुलिस ने इनसे 11 मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी कीमत लगभग 1.50 लाख रुपये है।गैंग की रणनीति:ये बदमाश सुनसान इलाकों में लोगों को निशाना बनाते थे।पुलिस की जांच:शुरुआती पूछताछ में कई अन्य वारदातों में इनके शामिल होने की संभावना है।पुलिस का बयानजयपुर पश्चिम के डीसीपी अमित कुमार ने जमीन धोखाधड़ी मामले में कहा कि आरोपियों ने धोखाधड़ी की नई-नई योजनाओं को अंजाम दिया। वहीं, जयपुर पूर्व की डीसीपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि मोबाइल स्नैचिंग गैंग का नेटवर्क और वारदातों की संख्या का पता लगाया जा रहा है। निष्कर्षजयपुर पुलिस की यह कार्रवाई अपराध पर रोकथाम के लिए एक अहम कदम है। इन मामलों में मिली सफलता से अन्य मामलों का खुलासा होने की भी उम्मीद है।
Rajasthan बीजेपी में संगठनात्मक नियुक्तियों की देरी ने सियासी हलचल तेज कर दी है। पार्टी आलाकमान की नाराजगी और नियुक्तियों को लेकर खींचतान के बीच जयपुर से दिल्ली तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। 1,058 मंडलों में अध्यक्षों की तैनाती का काम विवादों और विरोधों में उलझा हुआ है, जिससे जिलाध्यक्षों के चुनाव भी लटक गए हैं। क्या है विवाद?राजस्थान में 16 मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों पर रोक और 5 नियुक्तियों को रद्द किया गया है।विवादित मंडलों में जयपुर शहर का जलमहल और पौड्रिक मंडल, भरतपुर का सेवर और रूदावल, अलवर का मालाखेड़ा, और बीकानेर का जस्सुसर और नया शहर जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।अनुशासन समिति ने हस्तक्षेप करते हुए कई चयन को गलत करार दिया, जिससे संगठन की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। आलाकमान की नाराजगीबीजेपी आलाकमान राजस्थान में संगठनात्मक नियुक्तियों में हो रही देरी से नाराज है। बीएल संतोष, जो राष्ट्रीय संगठन महामंत्री हैं, ट्विटर पर अन्य राज्यों में प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी साझा कर रहे हैं। राजस्थान में नियुक्तियों को लेकर इस सार्वजनिक दबाव से सियासी गहमागहमी और बढ़ गई है।सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान बीजेपी की फाइलें अब आलाकमान की प्राथमिकता सूची में हैं। सियासी बैठकों का दौरबुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से सिविल लाइंस स्थित उनके आवास पर मुलाकात की।बैठक डेढ़ घंटे तक चली, जिसके बाद सियासी अटकलों का दौर तेज हो गया।इसके साथ ही प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल भी दिल्ली से जयपुर पहुंचे और ताबड़तोड़ बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ। वसुंधरा राजे की भूमिका और सरकार का विस्तारहालिया मुलाकातों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि संगठनात्मक नियुक्तियों के साथ भजनलाल सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चा हो रही है। वसुंधरा खेमा इसमें अहम भूमिका निभा सकता है, जहां कुछ नामों को संभावित मंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है। निष्कर्षराजस्थान बीजेपी में मंडल विवाद से जुड़ी देरी न केवल संगठन की आंतरिक एकता को चुनौती दे रही है, बल्कि आलाकमान के दबाव और आगामी चुनावों की रणनीतियों पर भी असर डाल रही है। फिलहाल, जयपुर से दिल्ली तक तेज होती सियासी गतिविधियां संगठनात्मक संकट को हल करने के लिए महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं।
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