Author: UmaKant Joshi
रतन टाटा की चिट्ठी नरसिम्हा राव को कर्जदार भारतीयों का संदेश , भारतीय उद्योगपति और टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन, ने 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को एक heartfelt चिट्ठी लिखी थी, जो हाल ही में हर्ष गोयनका द्वारा साझा की गई। इस चिट्ठी में रतन टाटा ने भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत के लिए नरसिम्हा राव की सराहना की और उन्हें “हर भारतीय का कर्जदार” बताया। चिट्ठी का संदेश रतन टाटा की चिट्ठी में उन्होंने नरसिम्हा राव की उपलब्धियों की महत्ता को उजागर किया। उन्होंने लिखा: इस चिट्ठी के माध्यम से, टाटा ने अपने विचार और शुभकामनाएं नरसिम्हा राव के प्रति व्यक्त कीं, यह बताते हुए कि कोई व्यक्ति उनके कार्यों को न तो भुला है और न कभी भूलेगा। आर्थिक सुधारों की शुरुआत 1996 में, भारत की अर्थव्यवस्था एक महत्वपूर्ण मोड़ पर थी, और नरसिम्हा राव को भारतीय आर्थिक सुधारों का जनक माना जाता है। रतन टाटा ने इस चिट्ठी में यह भी बताया कि नरसिम्हा राव के प्रयासों के कारण भारत वैश्विक समुदाय का एक अभिन्न हिस्सा बन सका। रतन टाटा का निधन दुर्भाग्यवश, रतन टाटा का निधन 9 अक्टूबर को हुआ। वे 86 वर्ष के थे और उम्र से जुड़ी बीमारी के कारण उनका निधन मुंबई में हुआ। उनका स्वास्थ्य पिछले कुछ दिनों से बिगड़ रहा था, और अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद, वे डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद नहीं बच सके। रतन टाटा का योगदान रतन टाटा को उनकी सादगी और सरल स्वभाव के लिए जाना जाता है। उन्होंने टाटा समूह को उदारीकरण के दौर में ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था, और वे टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के दत्तक पोते नवल टाटा के पुत्र थे। इस चिट्ठी ने रतन टाटा के प्रति सम्मान और उनके कार्यों के महत्व को उजागर किया है, जो भारत के विकास में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
राजीव खंडेलवाल का सफर टीवी से बॉलीवुड तक राजीव खंडेलवाल का नाम टीवी और बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग से दिल जीतने वाले अभिनेताओं में शुमार होता है। 16 अक्टूबर 1975 को राजस्थान के जयपुर में जन्मे राजीव आज अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका सफर एक मॉडल से शुरू हुआ, लेकिन उनकी असली पहचान टीवी सीरियलों के जरिए बनी। हालांकि, बाद में उन्होंने बॉलीवुड में भी कदम रखा, लेकिन वहां उतनी सफलता नहीं मिल पाई जितनी टीवी पर मिली थी। राजीव खंडेलवाल का सफर टीवी से बॉलीवुड तक जयपुर से एक्टिंग की दुनिया तक का सफर राजीव खंडेलवाल का जन्म एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल सीएल खंडेलवाल (सेवानिवृत्त) थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर में की और आगे की पढ़ाई के लिए अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स कॉलेज चले गए। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें एक्टिंग में रुचि हो गई और उन्होंने दिल्ली में एक प्रोडक्शन हाउस के साथ काम करना शुरू किया। मॉडलिंग से टीवी की दुनिया में कदम राजीव ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। कुछ समय बाद, उन्हें टीवी विज्ञापनों में काम करने का मौका मिला। लेकिन उनका बड़ा ब्रेक 2002 में आया, जब वह पहली बार टीवी सीरियल ‘क्या हादसा क्या हकीकत’ में नजर आए। इसके बाद, बालाजी टेलीफिल्म्स के पॉपुलर शो ‘कहीं तो होगा’ में उनके किरदार ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। टीवी से बॉलीवुड तक का सफर टीवी पर लगातार सफलता पाने के बाद, राजीव ने फिल्मों की ओर रुख किया। उनकी पहली फिल्म ‘आमिर’ थी, जो 2008 में रिलीज हुई। इसमें उन्होंने डॉ. आमिर अली का किरदार निभाया, जिसकी जमकर तारीफ हुई। इस फिल्म में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर नॉमिनेशन भी मिला। इसके बाद, उन्होंने ‘शैतान’, ‘टेबल नंबर 21’, ‘पीटर गया काम से’, ‘सॉल्ट ब्रिज’ जैसी फिल्में भी कीं। हालांकि, फिल्मों में उन्हें वह सफलता नहीं मिल पाई जो उन्हें टीवी पर मिली थी। टीवी शोज और होस्टिंग राजीव खंडेलवाल ने ‘लेफ्ट राइट लेफ्ट’, ‘सीआईडी’ जैसे टीवी शोज में भी बेहतरीन काम किया। इसके अलावा, वह कई शो को होस्ट करते भी नजर आए, जिनमें उनका आत्मविश्वास और व्यक्तित्व लोगों को काफी पसंद आया। निजी जीवन राजीव खंडेलवाल ने 7 फरवरी 2011 को मंजरी से शादी की। इसके अलावा, उन्होंने मुस्कान नामक एक संस्थान से स्वाति नाम की एक बच्ची को भी गोद लिया था, जो उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजीव का यह सफर एक मॉडल से लेकर एक सफल टीवी एक्टर और फिर बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने तक का है। उनके करियर की कहानी, उनकी मेहनत और संघर्ष का उदाहरण है, और वे आज भी अपने काम से लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं।
दौसा में दिव्यांगजन सशक्तिकरण 200 लोगों को 2 करोड़ का ऋण वितरित राजस्थान के दौसा जिले में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नेशनल दिव्यांगजन फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NDFDC) और राजस्थान जाति जनजाति वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से रामचंद्र फॉर्म हाउस पर एक ऋण मेले का आयोजन किया गया, जिसमें 200 दिव्यांगजनों को 2 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए। यह ऋण मेला दिव्यांगजनों को स्वावलंबी बनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। NDFDC के अध्यक्ष नवीन कुमार शाह ने कहा कि दिव्यांगजन अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष से न केवल अपने जीवन में बदलाव ला रहे हैं, बल्कि वे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रहे हैं। सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम इस अवसर पर दौसा जिला कलेक्टर देवेन्द्र ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज में दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम में कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे, जिनमें राजस्थान अनुजा टीम के एमडी वीरेंद्र, जीएम करतार सिंह, और डॉक्टर विष्णु गुप्ता शामिल थे। यह ऋण मेला दिव्य कला मेला और पीएम दक्ष योजना जैसी अन्य पहलों का हिस्सा है, जिनके माध्यम से देशभर में 4,000 से अधिक दिव्यांगजनों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है।
महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 तारीखों का ऐलान ECI प्रेस कॉन्फ्रेंस: चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव की तारीखों के साथ-साथ कई राज्यों में होने वाले उपचुनावों का शेड्यूल जारी कर दिया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार, 15 सितंबर को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। इसके साथ ही इन दोनों राज्यों में चुनावी तैयारियों की शुरुआत हो गई है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव 2024: राजस्थान उपचुनाव 2024: राजस्थान में सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का भी ऐलान किया गया है। ये सीटें खाली होने के कारण 13 नवंबर को चुनाव होंगे और 23 नवंबर को वोटों की गिनती की जाएगी। लोकसभा उपचुनाव: चुनावी प्रक्रिया:
महाराष्ट्र चुनाव कांग्रेस ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी सौंपी महाराष्ट्र चुनाव समाचार: हरियाणा विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और सचिन पायलट को अब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से कुछ घंटे पहले, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने डिवीजन-वाइज सीनियर ऑब्जर्वर और स्टेट इलेक्शन सीनियर कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति की है। मंगलवार दोपहर को जारी किए गए नोटिफिकेशन में 13 नेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी शामिल हैं। गहलोत और पायलट की जिम्मेदारी अशोक गहलोत को मुंबई और कोंकण डिवीजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कार्य में डॉक्टर जी परमेश्वर भी उनका साथ देंगे। वहीं, सचिन पायलट को मराठवाडा डिवीजन की जिम्मेदारी मिली है, जहां वह तेलंगाना के नेता उत्तर कुमार रेड्डी के साथ काम करेंगे। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, और मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता उमंग सिंघार विदर्भ डिवीजन की जिम्मेदारी संभालेंगे। सीनियर कोऑर्डिनेटर की नियुक्तियां पश्चिमी महाराष्ट्र डिवीजन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के विपक्ष के नेता टी.एस. सिंह देव और कर्नाटक कांग्रेस के नेता एम.बी. पाटिल को दी गई है। वहीं, उत्तर महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सैयद नासिर हुसैन और डी अनसूया सीताक्का को सौंपी गई है। इसके अलावा, राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक और एआईसीसी के महासचिव अविनाश पांडे को स्टेट इलेक्शन सीनियर कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। चुनाव की तारीखों का ऐलान 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को समाप्त हो रहा है, और इसके पहले मतदान प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसके साथ ही, लगभग 50 सीटों पर उपचुनाव भी होंगे, जिसमें यूपी और राजस्थान भी शामिल हैं। आज दोपहर 3:30 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा।
राजस्थान गैंगस्टर विक्रम सिंह बराड़ का कड़ी सुरक्षा के बीच इलाज कुख्यात गैंगस्टर विक्रम सिंह बराड़, जो लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का करीबी माना जाता है, को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल से मंगलवार को इलाज के लिए जेएलएन अस्पताल लाया गया। बराड़ के इलाज के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और अस्पताल के विभिन्न स्थानों पर पुलिस तैनात रही। लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से करीबी संबंध विक्रम सिंह बराड़, जिसे विक्रमजीत सिंह बराड़ के नाम से भी जाना जाता है, लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के गैंग का प्रमुख सदस्य है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे यूएई से गिरफ्तार कर भारत लाया था। विक्रम सिंह बराड़ का नाम पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी जुड़ा हुआ है, जहां उसने लॉरेंस और गोल्डी की मदद की थी। आपराधिक गतिविधियां और मुकदमे विक्रम बराड़ के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली, और अवैध हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर आरोपों के साथ दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि वह भारत में हथियारों की तस्करी और अपराधों में सक्रिय रूप से शामिल था। बराड़ ने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को जान से मारने की धमकी भी दी थी। अजमेर के अस्पताल में लाने के बाद, डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया, और फिर उसे कड़ी सुरक्षा के बीच वापस जेल ले जाया गया।
राजस्थान में नए जिलों के पुनर्गठन को लेकर प्रदेशभर में उत्सुकता है। इसी बीच, उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जिलों के पुनर्गठन का निर्णय जल्द लिया जाएगा, लेकिन यह फैसला जनता की सहूलियत और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही किया जाएगा। सोच-समझकर होगा जिलों का गठन राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने जोर देते हुए कहा कि जिले बनाना केवल एक घोषणा नहीं होनी चाहिए, बल्कि वहां प्रशासनिक सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर भी मौजूद होना चाहिए। जिलों का गठन करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि वहां सरकारी अधिकारी, प्रशासनिक भवन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि जनता को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि यह काम आसान नहीं होता है, इसमें करोड़ों रुपए का निवेश और समय लगता है। इसलिए राज्य सरकार इस प्रक्रिया को बहुत सोच-समझकर अंजाम देगी, ताकि हर गांव और ढाणी के पास जिला मुख्यालय की सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। भाजपा और कांग्रेस के बीच तकरार उद्योग मंत्री ने कांग्रेस की पिछली सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव से पहले हवा में घोषणाएं करना आसान होता है, लेकिन असल काम करना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा भजनलाल सरकार को ‘सर्कस’ कहने पर भी निशाना साधा और गहलोत सरकार को जनता के लिए असफल बताते हुए इसे सर्कस जैसा करार दिया। राजस्थान के विकास पर भाजपा का फोकस राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने आगे कहा कि भाजपा की सरकार के नेतृत्व में राजस्थान विकास की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने ‘राइजिंग राजस्थान’ को प्रदेश के विकास में एक मील का पत्थर बताया। राठौड़ ने यह भी कहा कि निवेश और आर्थिक मजबूती के बिना कोई भी राज्य तरक्की नहीं कर सकता, और भाजपा ने इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश को आकर्षित करने का काम किया है। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार अब तक 12 लाख 50 हजार करोड़ के एमओयू साइन कर चुकी है, जिससे राज्य में पूंजी निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। निष्कर्ष राज्य में नए जिलों के पुनर्गठन पर जनता की नजरें टिकी हैं, और मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का बयान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। जहां भाजपा सरकार राजस्थान को आर्थिक और प्रशासनिक तौर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं कांग्रेस पर लगातार निशाना साधते हुए उन्होंने अपनी सरकार की नीतियों को प्रदेश के विकास के लिए बेहतर बताया।
राजस्थान उपचुनाव 2024: 7 सीटों पर उपचुनाव की तारीखें जल्द घोषित, सियासी समीकरण पर नजर में जल्द ही 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा होने वाली है। चुनाव आयोग आज दोपहर 3:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इन चुनावों की तारीखें घोषित कर सकता है। इन उपचुनावों में दौसा, देवली उनियारा, चौरासी, खींवसर, झुंझुनू, सलूंबर और रामगढ़ सीट शामिल हैं, जो विभिन्न कारणों से खाली हुई हैं। इनमें से कुछ सीटें सांसद बने विधायकों के कारण खाली हुईं, जबकि अन्य सीटें विधायकों के निधन से खाली हुईं हैं। उपचुनावों का कारण और सियासी गणित राजस्थान की इन सात सीटों में से पांच सीटें उन विधायकों के सांसद बनने के कारण खाली हुई हैं। वहीं, सलूंबर सीट विधायक अमृतलाल मीणा और रामगढ़ सीट विधायक जुबेर खान के निधन के कारण खाली हुई। इन सात सीटों में से 4 कांग्रेस के पास थीं, 1 राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) और 1 बीजेपी के पास थी। राज्य की सबसे बड़ी पार्टियां—कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)—पहले से ही इन उपचुनावों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दोनों पार्टियों के बड़े नेता इन सीटों पर अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा रहे हैं। जहाँ बीजेपी अपनी मौजूदा सरकार के 10 महीने के कार्यकाल के आधार पर वोट मांगने उतरेगी, वहीं कांग्रेस अपनी पूर्ववर्ती योजनाओं और मौजूदा सरकार की कमियों को उजागर करेगी। गठबंधन का नया समीकरण उपचुनाव की सियासत में इस बार एक दिलचस्प मोड़ यह है कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन में लड़ी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) इस बार कांग्रेस के साथ नहीं होगी। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन वोटरों ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन को वोट दिया था, अब वे किस दिशा में जाते हैं। यह चुनाव कई मायनों में इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि बिना गठबंधन के राजनीतिक दलों के लिए यह वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने का एक बड़ा चैलेंज साबित होगा। प्रमुख सीटों पर चुनावी विरासत 1. दौसा कांग्रेस विधायक मुरारीलाल मीणा के सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई। उनके परिवार से उनकी पत्नी सविता मीणा और बेटी प्रमुख दावेदार हैं। वहीं बीजेपी से किरोड़ी लाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा भी मैदान में हो सकते हैं। 2. झुंझुनू बृजेन्द्र ओला के सांसद बनने के बाद, उनके पुत्र अमित ओला कांग्रेस के टिकट के प्रबल दावेदार हैं। वहीं, बीजेपी से पिछले चुनाव में हारे निशित चौधरी फिर से दावा कर रहे हैं। 3. सलूंबर दिवंगत विधायक अमृतलाल मीणा की पत्नी, जो पहले से सरपंच हैं, इस सीट पर बीजेपी की तरफ से दावेदारी कर सकती हैं। कांग्रेस से रघुवीर मीणा का नाम प्रमुख है। 4. खींवसर यह सीट सांसद हनुमान बेनीवाल की परंपरागत सीट है। उनके भाई नारायण बेनीवाल या उनकी पत्नी चुनावी दावेदारी कर सकती हैं। कांग्रेस से ज्योति मिर्धा दौड़ में हैं, जो इससे पहले विधानसभा और लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं। 5. चौरासी यहां भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) का प्रभाव है। बीएपी के राजकुमार रोत के सांसद बनने से यह सीट खाली हुई। बीएपी ने इस सीट पर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं और अन्य एसटी बाहुल्य सीटों पर भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 6. रामगढ़ इस सीट पर लंबे समय से परिवारवाद का दबदबा रहा है। जुबेर खान की मृत्यु के बाद कांग्रेस से इमरान प्रमुख दावेदार हैं। वहीं, बीजेपी से बागी सुखविंदर को टिकट मिल सकता है। चुनौतियों का सामना इन उपचुनावों में सभी दलों के लिए प्रमुख चुनौती यह होगी कि कैसे वे जनता का समर्थन प्राप्त कर सकें। मौजूदा बीजेपी सरकार विकास के नाम पर वोट मांग रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य दल अपनी रणनीति तय कर रहे हैं। इन चुनावों का परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों और राज्य की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
दिल्ली का नर्सिंग ऑफिसर जयपुर में जालसाजी का शिकार का एक नर्सिंग ऑफिसर, राजीव कुमार, एक युवती की ऑनलाइन दोस्ती में फंसकर बुरी तरह मुश्किलों में पड़ गया। फेसबुक मैसेंजर के जरिए हुई दोस्ती ने उसे जयपुर बुलाया, जहां राजीव का अपहरण कर लिया गया और उसके साथ मारपीट कर अश्लील वीडियो बनाए गए। साथ ही, 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। इस खौफनाक वारदात ने राजीव के जीवन को हिला कर रख दिया। फेसबुक पर दोस्ती से शुरू हुई मुसीबत राजीव कुमार को फेसबुक मैसेंजर पर एक युवती का मैसेज मिला, जिसने दोस्ती की पेशकश की। दोनों के बीच कई दिनों तक चैटिंग होती रही और इस दौरान युवती ने राजीव से आर्थिक मदद मांगी। उसने कहा कि उसके परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है और उसे 40-50 हजार रुपये की जरूरत है। राजीव ने मदद का वादा किया और युवती से मिलने के लिए जयपुर जाने का फैसला किया, जहां उसे नकद पैसे देने की बात कही गई। जयपुर बुलाकर हुआ अपहरण 10 अक्तूबर 2024 की रात, राजीव ने जयपुर के लिए ट्रेन पकड़ी और शहर पहुंचने के बाद, युवती ने उसे प्रताप नगर में मिलने के लिए बुलाया। राजीव ने लोकेशन के अनुसार एक उबर कैब बुक की और दिए गए पते पर पहुंच गया। वहां एक बहुमंजिला इमारत के नीचे युवती ने उसे रिसीव किया और अपने फ्लैट में ले गई। कुछ ही देर बाद, 4-5 युवक फ्लैट में दाखिल हुए और राजीव को गलत काम करने के आरोप में मारपीट करना शुरू कर दिया। फिरौती और जान बचाने की जद्दोजहद राजीव को बंधक बनाकर न केवल उसके साथ मारपीट की गई, बल्कि युवती के साथ अश्लील वीडियो भी बनाए गए। बदमाशों ने राजीव से 10 लाख रुपये की मांग की। डरे हुए राजीव ने किसी तरह 1 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए और 5 लाख रुपये नकद देकर अपनी जान बचाई। इस खौफनाक अनुभव ने राजीव को अंदर तक हिला दिया। पुलिस कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी घटना के बाद, राजीव ने जयपुर के सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। हालांकि, पहले वह पूरी घटना बताने से डर रहा था और सिर्फ अपहरण, मारपीट और लूट की बात कही। पुलिस ने जांच शुरू की और उबर कैब के चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। हालांकि, कैब चालक का घटना में कोई हाथ नहीं पाया गया। पुलिस ने अब तक एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और युवती समेत अन्य पांच लोगों को नामजद कर दिया है। ऑनलाइन जालसाजी के बढ़ते खतरे यह घटना एक बड़ी चेतावनी है कि कैसे सोशल मीडिया पर बनी दोस्ती कभी-कभी खतरनाक मोड़ ले सकती है। राजीव के मामले से यह साबित होता है कि अनजान लोगों पर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। इस घटना ने न केवल राजीव को आर्थिक और मानसिक रूप से आहत किया है, बल्कि यह समाज के सामने ऑनलाइन फ्रॉड और जालसाजी के खतरों को भी उजागर करती है। निष्कर्ष इस घटना ने यह साबित कर दिया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लोगों से दोस्ती करना कितना जोखिमभरा हो सकता है। ऑनलाइन जालसाज और ठग सोशल मीडिया पर भावनाओं का फायदा उठाकर लोगों को शिकार बना सकते हैं। ऐसे में सतर्क रहना और किसी अनजान व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत जानकारी या मुलाकात की योजना बनाने से बचना ही सुरक्षित रहता है।
उदय कोटक की प्रेरणादायक सफलता की कहानी, जो आज 14.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति के मालिक हैं, एक सामान्य गुजराती परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका बचपन एक ऐसे घर में बीता, जहां 60 लोग एक साथ रहते थे। चाचा, ताऊ, दादा-दादी समेत पूरे परिवार का खाना एक ही रसोई में बनता था। इस बड़े परिवार में जन्मे उदय ने अपने नाम का मतलब ही सफलता बना दिया, और वे अपने मेहनत और समर्पण से भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक के मालिक बने। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा उदय कोटक का जन्म एक मध्यमवर्गीय गुजराती परिवार में हुआ था, जहां व्यापार को लेकर शुरू से ही एक पारिवारिक माहौल था। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और व्यापारिक दृष्टिकोण उनके पारिवारिक व्यापार से प्रभावित रहा, जो कपास के क्षेत्र में था। हालाँकि, कपास व्यापार में 16 शेयरहोल्डर्स थे, और निर्णय लेने में बहुत समय लगता था। उदय को यह स्थिति असुविधाजनक लगी, और उन्होंने जल्दी ही तय किया कि वे ऐसा बिजनेस शुरू करेंगे जिसमें वे खुद निर्णय ले सकें। 30 लाख के कर्ज से बिजनेस की शुरुआत 1985 में, उदय कोटक ने 30 लाख रुपये के कर्ज के साथ बिल डिस्काउंटिंग कंपनी की शुरुआत की। इस बिजनेस का मॉडल यह था कि वे व्यापारियों से उनके बकाया इनवॉयस पर डिस्काउंट देकर खरीदते थे और बाद में पेमेंट करने वाले से वह राशि वसूलते थे। उनका पहला क्लाइंट टाटा की कंपनी नेल्को थी, जहां से उन्हें 4% का मुनाफा हुआ। इस शुरुआती सफलता के बाद, उन्होंने बिजनेस को बढ़ाने के लिए आनंद महिंद्रा के साथ साझेदारी की और कोटक महिंद्रा फाइनेंस की स्थापना की। कोटक महिंद्रा फाइनेंस से बैंक बनने का सफर उदय कोटक की कंपनी को 1987 तक एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली, जब कोटक महिंद्रा फाइनेंस की सेल 26 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। उन्होंने यह महसूस किया कि भारत में प्राइवेट बैंकों की बहुत कमी थी और यहां मुख्य रूप से विदेशी बैंक ही संचालित हो रहे थे। 1991 में उन्होंने भारत के पहले निजी निवेश बैंक की स्थापना की, और यह कदम उनके लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। वैश्विक साझेदारी और व्यापारिक विस्तार 1996 में, उदय कोटक को एक और बड़ी सफलता मिली, जब उनकी कंपनी ने गोल्डमैन सॉक्स के साथ साझेदारी की। इस साझेदारी में निवेश बैंकिंग, ब्रोकरेज, डिस्ट्रीब्यूशन, और मर्जर एवं एक्विजिशन (M&A) के कारोबार शामिल थे। इसके बाद, 1998 में उनकी कंपनी ने एसेट मैनेजमेंट के क्षेत्र में प्रवेश किया, और उनका राजस्व 168.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। भारत का पहला एनबीएफसी से बैंक बनने का सफर 2003 में उदय कोटक को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कमर्शियल बैंकिंग लाइसेंस मिला, और वे भारत के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए जिन्होंने एक एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) को बैंक में बदल दिया। कोटक महिंद्रा बैंक की स्थापना इसी तरह हुई, और सात सालों के अंदर बैंक के डिपॉजिट्स 23,886 करोड़ रुपये तक पहुंच गए। आईएनजी वैश्य बैंक का अधिग्रहण और बैंक का विस्तार 2015 में कोटक महिंद्रा बैंक को एक और बड़ी उपलब्धि मिली, जब उन्होंने 80 साल पुरानी आईएनजी वैश्य बैंक को 15,000 करोड़ रुपये में अधिग्रहित किया। इस अधिग्रहण से बैंक के पास 1,241 शाखाएं हो गईं, और कोटक महिंद्रा भारत का तीसरा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक बन गया। यह सौदा कोटक महिंद्रा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जिससे उनकी पकड़ बैंकिंग क्षेत्र में और मजबूत हो गई। डिजिटल ट्रांजैक्शन की ओर कदम उदय कोटक ने बदलते समय को समझते हुए बैंकिंग सेक्टर में डिजिटलाइजेशन की अहमियत को पहचाना। 2017 में उन्होंने Kotak811 नामक एक वर्चुअल अकाउंट लॉन्च किया, जो जीरो-बैलेंस के साथ खुलता था। डिजिटल ट्रांजैक्शन की ओर इस कदम ने बैंक को तकनीकी रूप से और मजबूत किया। कोटक महिंद्रा बैंक की सफलता 2018 तक कोटक महिंद्रा बैंक का शुद्ध मुनाफा 6,201 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मार्च 2024 की तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट 5,337 करोड़ रुपये रहा, और पूरे वित्त वर्ष में यह मुनाफा 18,213 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। आज कोटक महिंद्रा बैंक के पास 1,780 शाखाएं और 2,963 एटीएम हैं, और यह 4.45 लाख करोड़ रुपये के डिपॉजिट्स के साथ भारत का तीसरा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। बैंक के पास 5.1 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं, और इसका कुल मार्केट कैप 3.62 लाख करोड़ रुपये है। उदय कोटक का सेवानिवृत्ति और भविष्य की भूमिका सितंबर 2023 में, उदय कोटक ने अपने कार्यकाल के चार महीने पहले ही कोटक महिंद्रा बैंक के सीईओ और प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, वे अब बैंक के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में बैंक ने जो ऊंचाइयां हासिल की हैं, वह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक मिसाल हैं। उदय कोटक का यह सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दिखाता है कि कड़ी मेहनत, दूरदर्शिता और सही निर्णयों के साथ किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। निष्कर्ष उदय कोटक की सफलता की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं। एक साधारण परिवार से उठकर उन्होंने जिस तरह से कोटक महिंद्रा बैंक को भारत के सबसे बड़े और सबसे सफल प्राइवेट बैंकों में से एक बनाया, वह एक असाधारण कहानी है।
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