Author: UmaKant Joshi
Varanasi के हरहुआ स्थित काजीसराय में रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 73 फीट ऊंची भगवान हनुमान की प्रतिमा का लोकार्पण किया। इस भव्य प्रतिमा को जय हनुमान श्री पीठ ट्रस्ट के नेतृत्व में स्थापित किया गया, जिसे राजस्थान के कारीगरों ने दो वर्षों में तैयार किया है। 51 फीट ऊंची इस मूर्ति को 22 फीट के भव्य आधार पर स्थापित किया गया है, जिससे इसकी कुल ऊंचाई जमीन से 73 फीट हो गई है। सीएम योगी ने प्रतिमा की परिक्रमा कर विधिवत पूजा-अर्चना की और इसे काशीवासियों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा भक्ति, शक्ति और समर्पण की भावना को मजबूती देगी, साथ ही भक्तों में नई ऊर्जा और साहस का संचार करेगी। सीएम ने जय हनुमान श्री पीठ ट्रस्ट, श्रीवरद आंजनेय ट्रस्ट और पूर्वांचल रियल एस्टेट एसोसिएशन (क्रेडाई) के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज में सकारात्मकता और एकता का संदेश देने वाला आयोजन बताया। हनुमान प्रतिमा को पारंपरिक मुद्रा में दर्शाया गया है, जो श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, साहस और शक्ति का भाव उत्पन्न करती है। प्रतिमा की परिकल्पना डॉ. सी.बी. सिंह द्वारा की गई थी, जिसमें देवानंद सिंह और पीबी सिंह का विशेष योगदान रहा। इस भव्य आयोजन में क्रेडाई के प्रमुख सदस्यों जैसे गोविंद केजरीवाल, आकाशदीप, जितेंद्र सिंह, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। भगवान हनुमान की यह विशाल प्रतिमा न केवल वाराणसी बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का प्रतीक बन चुकी है, और श्रद्धालुओं के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 115वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भरता पर जोर दिया और कहा कि यह केवल एक नीति नहीं है बल्कि देश का जुनून बन गया है। इस एपिसोड में उन्होंने सरदार पटेल और भगवान बिरसा मुंडा को भी श्रद्धांजलि दी, जो एकता और साहस के प्रतीक माने जाते हैं। पीएम मोदी ने बताया कि 31 अक्टूबर से सरदार पटेल की 150वीं जयंती वर्ष और 15 नवंबर से भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष की शुरुआत होगी। इन दोनों महानायकों की उपलब्धियों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके समर्पण से हमें देश की एकता का मार्ग प्रशस्त होता है। आत्मनिर्भर भारत: एक जन-आंदोलन प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान अब जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने लद्दाख के हान्ले में हाल ही में स्थापित एशिया के सबसे बड़े इमेजिंग टेलीस्कोप ‘MACE’ का जिक्र किया, जो 4300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह दर्शाता है कि भारत अब अत्याधुनिक तकनीकों में आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि को देश के साहसिक वैज्ञानिकों और स्थानीय उद्योगों की मेहनत का परिणाम बताया। वोकल फॉर लोकल और त्योहारों का उत्सव पीएम मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ को त्योहारी खरीदारी के साथ जोड़ते हुए कहा कि हम सभी को इस अवसर पर ‘मेक इन इंडिया’ को प्राथमिकता देनी चाहिए। अब भारत ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ के मंत्र को अपनाते हुए इनोवेशन के क्षेत्र में एक वैश्विक पावरहाउस बनने की राह पर है। एनिमेशन और गेमिंग में भारत की नई पहचान प्रधानमंत्री ने भारत के एनिमेशन उद्योग की चर्चा करते हुए कहा कि जैसे-जैसे देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, हमारे एनिमेशन किरदार जैसे छोटा भीम, कृष्णा, मोटू-पतलू और बाल हनुमान को पूरी दुनिया में पसंद किया जा रहा है। भारत का एनिमेशन और गेमिंग क्षेत्र अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है, जिससे यह दुनिया में क्रांति लाने की राह पर है। साइबर अपराध से बचाव के उपाय प्रधानमंत्री मोदी ने साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि कैसे डिजिटल फ्रॉड्स के कारण लोग बड़ी मात्रा में धनराशि गंवा चुके हैं। उन्होंने जनता को सतर्क रहने की सलाह दी कि किसी भी जांच एजेंसी का कॉल कभी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से नहीं आता है, ऐसे में ऐसे फर्जी कॉल से सावधान रहना चाहिए। मन की बात की अनूठी शुरुआत इस कार्यक्रम की शुरुआत 3 अक्टूबर 2014 को हुई थी, जो आज 22 भारतीय भाषाओं और 29 बोलियों के साथ 11 विदेशी भाषाओं में प्रसारित होता है, जिसमें फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तू, फारसी, दारी और स्वाहिली शामिल हैं। इसका प्रसारण आकाशवाणी के 500 से अधिक केंद्रों द्वारा किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भरता और एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया, जो भारत को नई दिशा देने में सहायक होगा।
अपराध के रखवाले ही बने अपराधी मेरठ में तैनात दो पुलिसकर्मियों और एक वकील के गिरोह ने राजस्थान में बड़े पैमाने पर अपराध को अंजाम दिया, लेकिन राजस्थान पुलिस की मुस्तैदी से इनका अपराधी खेल खत्म हो गया। ये आरोपी फर्जी एसओजी टीम बनाकर लोगों को डराते, अपहरण करते और फिरौती वसूलने की योजना बनाते थे। मामले के खुलासे के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और एसएसपी ने दोनों पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित कर दिया। अपराधी कैसे बने पुलिसवाले? मेरठ के कंकरखेड़ा में तैनात कांस्टेबल रिंकू सिंह गुर्जर और हेड कांस्टेबल अमित खटाना ने काली कमाई के लालच में अपना एक गिरोह बना लिया था। इनके साथ कंकरखेड़ा निवासी वकील आकाश शर्मा भी इस अपराधी गिरोह का हिस्सा था। ये लोग खुद को यूपी की एसओजी टीम का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे। राजस्थान के झुंझुनूं में इस गिरोह ने फेरीवाले एक दंपती और उनके साथियों का अपहरण कर 5 लाख रुपये वसूलने की योजना बनाई, परंतु पुलिस ने इन्हें समय रहते दबोच लिया। घटना का विस्तार: कैसे दी वारदात को अंजाम गिरोह ने चूरू से झुंझुनूं की ओर जा रही रोडवेज बस में बैठे बुलंदशहर के जखिया और उनकी पत्नी नाजरीन सहित उनके सहयोगियों को जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लिया। बस में मौजूद यात्रियों में से एक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने गांगियासर तिराहे पर नाकाबंदी की, लेकिन ये आरोपित यूपी नंबर की लाल कार से बैरिकेड्स तोड़ते हुए भाग निकले। पीछा कर रही पुलिस ने आखिरकार इन्हें रोकने में सफलता पाई। इस घटना में राजस्थान पुलिस का हेड कांस्टेबल अंकित घायल हो गया। अपराधी बनने का सफर: कैसे बनाया अपना गिरोह? रिंकू सिंह गुर्जर और अमित खटाना ने गिरोह में महिला समेत अन्य लोगों को शामिल कर एक साजिशन योजना बनाई थी। इनके गिरोह में गाजियाबाद की मीनू रानी, जो एक अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट थी, हापुड़ का मुनकाद, दिल्ली का अनुज और अन्य अपराधी शामिल थे। ये सब मिलकर पुलिस की वर्दी का गलत फायदा उठाते हुए लोगों को फर्जी तरीके से डराते और लूटते थे। फर्जी एसओजी टीम और उनके इरादे मेरठ के 2016 बैच के कांस्टेबल रिंकू और 2006 बैच के हेड कांस्टेबल अमित ने पुलिस की कार्यप्रणाली का फायदा उठाते हुए अपने गिरोह के सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया था। उनके इस गिरोह ने खुद को एसओजी टीम का हिस्सा बताकर सीधे आम लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इनका मकसद हर बार अपनी फर्जी पहचान से लोगों को डराना और पैसों की अवैध उगाही करना था। काली कमाई का लालच और इसका नतीजा रिंकू और अमित ने अपने पथ से भटककर अवैध कमाई के लिए खतरनाक और शर्मनाक रास्ता चुना। दोनों ने मिलकर ऐसा गिरोह तैयार किया जो वर्दी का गलत फायदा उठाकर आम लोगों को धमकाता और पैसे लूटता। अंततः पुलिस ने इन्हें पकड़ लिया, और अब ये खुद कानून के शिकंजे में हैं।
प्रकरण का विवरणमेरठ के वकील और दो सिपाहियों का गिरोह मेरठ के कंकरखेड़ा में तैनात कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल ने एक गिरोह बनाया था, जिसमें एक वकील भी शामिल था। यह गिरोह राजस्थान के झुंझुनू जिले में अपहरण और लूट की वारदातों को अंजाम दे रहा था। बिसाऊ थाना पुलिस ने इस गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मेरठ पुलिस लाइन में तैनात कांस्टेबल रिंकू सिंह गुर्जर और हेड कांस्टेबल अमित खटाना शामिल हैं। कंकरखेड़ा निवासी वकील आकाश शर्मा भी इस गिरोह का सदस्य है। अपहरण की वारदातगिरोह ने खुद को यूपी एसओजी टीम का अधिकारी बताकर फेरी लगाकर कपड़े बेचने वाले एक दंपती समेत चार लोगों का अपहरण किया। ये लोग 5 लाख रुपये की मांग कर रहे थे, लेकिन इससे पहले ही राजस्थान पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उनके पास से एक हथकड़ी, दो पिस्टल और होलस्टर कवर बरामद हुआ है। गिरोह की संरचना और योजनागिरफ्तार आरोपियों में रिंकू सिंह गुर्जर (32), अमित खटाना (38), अनुज नागर (28), मीनू रानी (27), मुनकाद (55) और आकाश (28) शामिल हैं। इस गिरोह ने बुधवार को चूरू से झुंझुनू आ रही एक रोडवेज बस में बैठे जखिया और उनकी पत्नी नाजरीन का अपहरण किया। एक यात्री की सूचना पर बिसाऊ पुलिस ने नाकाबंदी की और आरोपियों की कार को पकड़ लिया। वारदात का तरीकाआरोपियों ने बस रुकवाकर जखिया और उनके साथियों को जबरन अपनी कार में बैठा लिया। गिरोह के सदस्यों ने विशेष रूप से अपहरण करने और लूट की योजना बनाई थी, जिसमें महिला समेत चार लोगों को प्रशिक्षण दिया गया था। मुनकाद ने जखिया के पास रुपये होने की जानकारी देकर इस योजना में मदद की। पुलिस की कार्रवाईगिरोह की गिरफ्तारी के बाद एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। आरोपियों का चालान कर उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। अपराध की प्रेरणाकाली कमाई के लालच ने इन पुलिसकर्मियों को अपराध की दुनिया में धकेल दिया। उन्होंने एक फर्जी एसओजी टीम बनाकर दूसरे राज्य में अपहरण और लूट का प्रयास किया। घटना के दौरान राजस्थान पुलिस का एक सिपाही गंभीर रूप से घायल हुआ, जिससे गिरोह की हिंसक प्रवृत्ति भी उजागर होती है। यह घटना न केवल एक गंभीर अपराध का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कुछ लोग कैसे अपनी जिम्मेदारियों को भुलाकर अपराध की ओर बढ़ सकते हैं।
राजस्थान उपचुनाव राजस्थान की सात विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए जैसे ही कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की, पार्टी में बगावत और असंतोष के स्वर उभरने लगे। वहीं, भाजपा ने जल्दी ही टिकट वितरण कर अपने असंतुष्टों को मना लिया, जबकि कांग्रेस के लिए अब यह सिर फुटव्वल एक गंभीर चुनौती बन गई है। देवली-उनियारा में असंतोष देवली-उनियारा से के.सी. मीणा को टिकट मिलने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. नमोनारायण मीणा ने नाराजगी जताई। उन्होंने एक वीडियो में आरोप लगाया कि उनके भाई, टोंक-सवाई माधोपुर के सांसद हरीश चंद्र मीणा, ने उन्हें टिकट न देकर धोखा दिया। दूसरी ओर, नरेश मीणा, जो पहले से टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे, अपनी नराजगी को धरने पर बैठकर व्यक्त कर रहे हैं। सलूंबर में बढ़ते विरोध सलूंबर में रेशमा मीणा को टिकट दिए जाने से पार्टी के ब्लॉक अध्यक्षों ने इस्तीफे दे दिए, और पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने इस पर नाराजगी जताई। रघुवीर के समर्थकों ने यहां तक कहा कि वे रेशमा मीणा की जमानत जब्त करवाने का प्रयास करेंगे। इस क्षेत्र में बगावत ने पार्टी के अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया है। रामगढ़ और झुंझुनू में परिवारवाद का मुद्दा रामगढ़ और झुंझुनू में एक ही परिवार को टिकट दिए जाने से नाराजगी है। कांग्रेस से निष्कासित नेता राजेंद्र गुढ़ा ने इस मुद्दे को और हवा दी है। अभी तक कोई खुलकर सामने नहीं आया है, लेकिन परिवारवाद को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। भाजपा और कांग्रेस की स्थिति जहां भाजपा ने समय रहते अपने असंतोष को थाम लिया और एकजुटता दिखाई, वहीं कांग्रेस में सिर फुटव्वल बढ़ता जा रहा है। यह गृह कलह उपचुनाव में पार्टी की संभावनाओं पर असर डाल सकता है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस बगावत को कैसे संभालता है, क्योंकि वर्तमान स्थिति में पार्टी एकजुट होने के बजाय बिखराव की ओर जाती दिख रही है।
राजस्थान बीजेपी के बाद कांग्रेस में उठी बगावत राजस्थान में विधानसभा उपचुनावों की तैयारी के बीच कांग्रेस पार्टी में बगावत के सुर उभरने लगे हैं। पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने सलूंबर विधानसभा सीट पर रेशमा मीणा को टिकट दिए जाने के निर्णय पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लोग पार्टी में दलाली कर रहे हैं और उन्होंने पार्टी के नेताओं को चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति रही तो कांग्रेस धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। रेशमा मीणा का टिकट और बगावत कांग्रेस ने हाल ही में सलूंबर सीट पर पूर्व प्रधान रेशमा मीणा को प्रत्याशी घोषित किया। इस फैसले के बाद रघुवीर मीणा ने कहा, “रेशमा मीणा ने 2018 में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ बगावत कर चुनाव लड़ा था और उन्हें हराया था। फिर भी, अब उन्हें टिकट क्यों दिया गया?” उन्होंने यह भी कहा कि रेशमा पिछले छह वर्षों से पार्टी से बाहर थीं और पिछले पांच सालों में किसी भी पार्टी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं। दलाली और पार्टी में आंतरिक संघर्ष रघुवीर मीणा ने कांग्रेस में मौजूद कुछ नेताओं पर आरोप लगाया कि वे दलाली का काम कर रहे हैं और क्षेत्र में उभरते हुए आदिवासी नेताओं को दबाना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस के हाई कमान से अपील की कि वे ऐसे लोगों को पहचानें और पाबंद करें, अन्यथा पार्टी का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। समर्थकों की प्रतिक्रिया रघुवीर मीणा के समर्थन में आए कार्यकर्ताओं ने भी नाराजगी जताई और कहा कि वे रेशमा मीणा की जमानत जब्त करवा देंगे। उनके समर्थकों का मानना है कि इस निर्णय से क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी को और अधिक मजबूती मिलेगी। निष्कर्ष कांग्रेस पार्टी में उठ रही यह बगावत दिखाती है कि पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष और मतभेद किस हद तक बढ़ गए हैं। अगर समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया, तो यह पार्टी के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।
राजस्थान कर्मचारियों के लिए खुशखबरी राजस्थान में गुरुवार को राज्य सरकार ने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) की नई दरें लागू कर दी हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया है। यह वृद्धि एक जुलाई से 31 अक्टूबर तक के लिए लागू होगी, और इस अवधि का बढ़ा हुआ DA जीपीएफ (गृह भविष्य निधि) में जमा किया जाएगा। एक नवंबर से यह राशि कर्मचारियों को नकद मिलनी शुरू होगी। ग्रेड पे में वृद्धि इसके साथ ही, भजनलाल सरकार ने अधीनस्थ मंत्रालयिक सेवा के संस्थापन अधिकारियों की ग्रेड पे को भी बढ़ाने का फैसला किया है। अब यह ग्रेड पे 6000 रुपये से बढ़कर 6600 रुपये हो गई है। पिछले दिनों हुई कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। वेतन में बढ़ोतरी संस्थान अधिकारियों का वेतनमान राजस्थान सिविल सेवा पुनरीक्षित वेतन नियम 2017 के तहत पे लेवल एल 15 से बढ़कर एल 16 हो गया है। इससे इन अधिकारियों के वेतन में 1000 से 1500 रुपये की बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में राज्य सरकार में लगभग 888 से 900 संस्थापन अधिकारी हैं, जिन्हें इस फैसले का लाभ मिलेगा। आयुष विभाग के अधिकारियों को भी लाभ वित्त विभाग ने एक अन्य आदेश में आयुष विभाग के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारियों और अन्य समकक्ष पदों के अधिकारियों को भी राहत दी है। इन अधिकारियों को सेवा के दौरान यदि वे पीजी डिग्री प्राप्त करते हैं, तो उन्हें अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। हालांकि, वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2018 से 31 जुलाई 2024 के बीच यदि फिक्सेशन या रीफिक्सेशन किया गया, तो वेतन और भत्ते का एरियर नहीं मिलेगा। निष्कर्ष यह सभी कदम राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के कल्याण और उनकी वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए हैं। महंगाई भत्ते में वृद्धि और ग्रेड पे में बदलाव से कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
ऐश्वर्या राय की शादी के बाद सलमान खान की फिल्म ने मचाई धूम हाल ही में सलमान खान और ऐश्वर्या राय की प्रेम कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है। सलमान खान को काला हिरण शिकार मामले में जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, जबकि ऐश्वर्या राय के पति अभिषेक बच्चन के साथ अलग होने की अफवाहें चल रही हैं। हालांकि, यह किसी से छिपा नहीं है कि सलमान और ऐश्वर्या के बीच गहरा प्यार था, लेकिन उनकी शादी नहीं हो पाई। ऐश्वर्या ने सलमान से अलग होने के बाद दो एक्टरों के साथ नाम जोड़ा, जिनमें से एक के साथ उन्होंने शादी की। सलमान और ऐश्वर्या की पहली मुलाकात सलमान खान और ऐश्वर्या राय की पहली मुलाकात 1999 में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के दौरान हुई। इस फिल्म के बाद उनकी प्रेम कहानी की चर्चाएं जोर पकड़ने लगीं। यह उनकी साथ में की गई पहली और आखिरी फिल्म थी। उनके बीच विवाद हुआ, जिसके बाद दोनों अलग हो गए और कभी एक-दूसरे के सामने नहीं आए। ऐश्वर्या की नई शुरुआत 2004 में, ऐश्वर्या राय ने फिल्म ‘क्यों हो गया ना’ में विवेक ओबेरॉय के साथ काम किया, जिससे उनके और विवेक के बीच अफेयर की खबरें उठीं। इस दौरान विवेक ने एक इवेंट में सलमान से माफी भी मांगी थी। अभिषेक बच्चन के साथ ऐश्वर्या का सफर साल 2000 में, ऐश्वर्या राय ने अभिषेक बच्चन के साथ पहली बार फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ में काम किया। इसके बाद दोनों ने कई सफल फिल्में कीं, जैसे ‘कुछ ना कहो’ (2003), ‘बंटी और बबली’ (2005, आइटम सॉन्ग), ‘उमराव जान’ (2006), ‘धूम 2’ (2006), ‘गुरु’ (2007) और ‘रावण’ (2010) ऐश्वर्या और अभिषेक की शादी फिल्म ‘गुरु’ ने 12 जनवरी 2007 को रिलीज होकर सफलतापूर्वक बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई। इसके बाद, अभिषेक और ऐश्वर्या ने 20 अप्रैल 2007 को शादी कर ली। शादी के बाद, दोनों ने केवल एक ही फिल्म ‘रावण’ (2010) में साथ काम किया और उसके बाद इस जोड़ी को कभी पर्दे पर साथ नहीं देखा गया। सलमान खान की ब्लॉकबस्टर ऐश्वर्या की शादी के तीन महीने बाद, सलमान खान की फिल्म ‘पार्टनर’ 20 जुलाई 2007 को रिलीज हुई। यह फिल्म सलमान खान और कैटरीना कैफ के साथ गोविंदा और लारा दत्ता के मुख्य किरदारों में थी। डेविड धवन द्वारा निर्देशित ‘पार्टनर’ ने 28 करोड़ रुपये के बजट में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की। इस फिल्म की सफलता ने सलमान खान को बॉलीवुड में फिर से स्थापित कर दिया और दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता को बढ़ाया। इस तरह, ऐश्वर्या और सलमान की कहानी में न केवल प्यार और नफरत का सफर है, बल्कि बॉलीवुड के एक महत्वपूर्ण समय का भी चित्रण है, जहां रिश्तों और करियर की जद्दोजहद चलती रही।
हरदा में दो साल की बच्ची की हत्या, पिता पर शक मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक दो साल की बच्ची का शव जंगल में मिला है, जबकि उसकी पांच साल की बड़ी बहन गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाई गई। यह घटना हंडिया थाना क्षेत्र के भंवर तालाब के पास हुई है। बच्चियों के पिता को इस मामले में मुख्य आरोपी माना जा रहा है, और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। घटना का विवरण बच्चियां, श्रेया (2 साल) और सहस्त्रा (5 साल), मंगलवार को अपने पिता प्रदीप कुल्हारे के साथ डॉक्टर के पास जाने के लिए घर से निकली थीं। जब वे बुधवार तक वापस नहीं लौटीं, तो उनके चाचा प्रवीण ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बुधवार को जब प्रवीण लौट रहा था, तो उसे अपने भाई की बाइक भंवर तालाब के पास खड़ी मिली। जब वह पास गया, तो उसने देखा कि श्रेया का शव वहीं पड़ा है और सहस्त्रा अचेत अवस्था में है। अस्पताल में स्थिति सहस्त्रा को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि सहस्त्रा के सिर पर गंभीर चोट के निशान हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि उसके सिर पर हथौड़ी से वार किया गया है। पिता पर संदेह प्रारंभिक जांच से पता चला है कि प्रदीप अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था। ऐसा माना जा रहा है कि इसी शक के चलते उसने अपनी बेटियों पर हमला किया। पुलिस को घटनास्थल से एक हथौड़ी भी मिली है, जो इस बात का सबूत है कि यह हमला जानबूझकर किया गया। पुलिस का मानना है कि प्रदीप ने अपनी बड़ी बेटी सहस्त्रा को भी मरा समझकर छोड़ दिया और भाग गया। पुलिस की कार्रवाई हरदा के एएसपी आरडी प्रजापति ने जानकारी दी कि पुलिस की दो टीमें प्रदीप की तलाश में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि प्रदीप मिस्त्री का काम करता था और घटना के दिन उसने अपनी पत्नी की तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर बेटियों को साथ ले गया था। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है और लोगों में इस तरह की हिंसा के प्रति चिंता बढ़ा दी है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है।
राजस्थान सरकार ने कर्मचारियों को वेतन देने का किया फैसला राजस्थान की भजनलाल सरकार ने इस महीने सरकारी कर्मचारियों को 30 अक्तूबर को मासिक वेतन देने का फैसला किया है। हालांकि, यह फैसला कर्मचारियों के लिए खुशी की बात है, परंतु कई कर्मचारी इसको लेकर चिंता में हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि धनतेरस, जो 28 अक्तूबर को है, उससे पहले वेतन नहीं मिलने के कारण परंपरागत खरीदारी का मौका निकल जाएगा। राजस्थान में धनतेरस पर विशेष खरीदारी की परंपरा है, लेकिन इस बार वेतन धनतेरस के बाद आ रहा है, जिससे कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। धनतेरस से पहले वेतन क्यों नहीं? कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश ने अपने कर्मचारियों के लिए 28 अक्तूबर को ही वेतन जारी करने का निर्णय लिया है ताकि वे धनतेरस पर अपनी जरूरतों के अनुसार खरीदारी कर सकें। लेकिन राजस्थान सरकार का वेतन 30 अक्तूबर को जारी करने का निर्णय इस बात को लेकर सवाल खड़े कर रहा है कि धनतेरस के बाद वेतन का क्या लाभ होगा, जब परंपरागत खरीदारी का समय निकल चुका होगा। बोनस और डीए अपडेट इस बीच, भजनलाल सरकार ने कर्मचारियों के लिए बोनस के आदेश पहले ही जारी कर दिए हैं। हालांकि, बोनस की पूरी राशि नकद में देने के बजाय 25 प्रतिशत राशि कर्मचारियों के जीपीएफ (सामान्य भविष्य निधि) खाते में जमा की जा रही है। इसके अलावा, महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर भी जल्द ही आदेश जारी होने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक, सातवें वेतनमान के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों का डीए 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 53 प्रतिशत किया जा सकता है। हालांकि, इसे नकद में दिया जाएगा या जीपीएफ में जमा किया जाएगा, इसको लेकर अभी असमंजस की स्थिति है। कर्मचारियों की टेंशन का कारण कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वेतन और बोनस जैसी सुविधाएं तो मिल रही हैं, लेकिन वे धनतेरस पर अपनी परंपरागत खरीदारी से चूक जाएंगे। यह समय राजस्थान में विशेष महत्व रखता है और अधिकांश लोग इस मौके पर नए सामान और उपहार खरीदते हैं। सरकार का 30 अक्तूबर को वेतन देने का निर्णय इसलिए कई कर्मचारियों के लिए थोड़ी निराशा लेकर आया है। सरकार का नजरिया सरकार की ओर से यह कदम एक सामान्य प्रक्रिया के तहत लिया गया है, क्योंकि हर महीने वेतन और पेंशन की राशि महीने के आखिरी दिन जारी की जाती है। लेकिन धनतेरस जैसे महत्वपूर्ण त्योहार को ध्यान में रखते हुए, कर्मचारियों की अपेक्षा थी कि इस महीने वेतन थोड़ा पहले जारी किया जाए। सरकार ने बोनस की राशि और डीए में बढ़ोतरी की तैयारी भी की है, जो आने वाले समय में कर्मचारियों के लिए राहत का कारण बनेगी। अंततः, यह देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की इन चिंताओं पर क्या कदम उठाती है, और क्या डीए की बढ़ोतरी और अन्य लाभ समय पर मिलेंगे या नहीं।
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