Author: UmaKant Joshi
आगरा में पुलिस और कृषि विभाग की टीम ने एक बड़ी तस्करी का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान से अवैध तरीके से लाई गई 500 कट्टे डीएपी खाद जब्त की है। यह कार्रवाई ग्वालियर हाईवे पर चेकिंग के दौरान की गई, जहां ट्रक को रोककर जांच की गई। इस मामले में ट्रक के चालक और क्लीनर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर को राजस्थान के कनकपुरा रेलवे स्टेशन से ट्रक में लादकर 500 कट्टे डीएपी खाद आगरा की लादूखेड़ा क्षेत्र के लिए रवाना किए गए थे। ट्रक चालक नंदकिशोर, जो प्रेमनगर, आगरा का निवासी है, ने इस खाद को लादूखेड़ा पहुंचाने की योजना बनाई थी। 29 अक्टूबर को, ट्रक को ग्वालियर हाईवे पर एक ढाबे के सामने रोक दिया गया, जहां पुलिस ने ट्रक और चालक से आवश्यक दस्तावेज मांगे। अधिकारियों की कार्रवाई इस घटना की सूचना एसडीएम खेरागढ़, संदीप यादव को दी गई, जिसके बाद जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार सिंह और अपर जिला कृषि अधिकारी गुफरान अहमद मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पाया गया कि यह खाद कृषि नियमों का उल्लंघन करते हुए तस्करी के माध्यम से लाई गई थी। पुलिस का बयान थाना प्रभारी सैंया, उपेंद्र कुमार ने बताया कि चालक नंदकिशोर और क्लीनर राकेश को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि खाद को लादूखेड़ा में उतारना था। उन्होंने बताया कि यह खाद निश्चित रूप से कालाबाजारी के लिए मंगवाई गई थी, जिसके चलते उनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आगे की कार्रवाई पुलिस ने इस मामले में अन्य लोगों के बारे में भी पूछताछ शुरू कर दी है। कृषि विभाग की टीमें भी इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस तस्करी में और कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि यह खाद मार्केट में कालाबाजारी के उद्देश्य से लाई गई थी, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता था। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे अवैध तस्करी से कृषि क्षेत्र में व्यवधान उत्पन्न होता है और किसानों को प्रभावित करता है। राज्य और स्थानीय प्रशासन इस प्रकार की गतिविधियों पर सख्ती से नजर रख रहा है और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अजमेर। दरगाह थाना पुलिस और सीआईडी की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन एरिया डोमिनेशन के तहत एक बांग्लादेशी युवक को गिरफ्तार किया है, जो पिछले एक महीने से अवैध रूप से अजमेर के दरगाह क्षेत्र में रह रहा था। युवक की पहचान ढाका, बांग्लादेश के निवासी सैयफुल होसेन सुमोन (20) के रूप में हुई है। गिरफ्तारी की जानकारी पुलिस सूत्रों के अनुसार, सैयफुल एक महीने पहले बांग्लादेश से भारत में घुसा था, जब उसने सीमा पर तार के नीचे से प्रवेश किया। दरगाह थानाधिकारी नरेंद्र जाखड़ ने बताया कि इस कार्रवाई की योजना अजमेर एसपी वंदिता राणा के निर्देश पर बनाई गई थी। संदिग्ध गतिविधियों की जांच हाल ही में, दरगाह क्षेत्र में एक संदिग्ध युवक के घूमने की सूचना मिली थी। इसके आधार पर सीआईडी और थाने की टीम ने मंगलवार को एक संयुक्त अभियान चलाया। टीम ने युवक को मजदूरी करते हुए पाया और उससे पूछताछ की। हालांकि, युवक संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। दस्तावेजों की बरामदगी तलाशी के दौरान उसके पास से बांग्लादेश के पहचान पत्र बरामद हुए, जिससे उसकी पहचान सुनिश्चित हुई। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी पता चला कि सैयफुल दरगाह की जियारत करने और मजदूरी करने के लिए भारत आया था। अपने असली पहचान को छुपाने के लिए वह खानाबदोश के रूप में रह रहा था। आगे की कार्रवाई पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या युवक के साथ और भी लोग शामिल हैं। गिरफ्तार युवक को थाने पर लाया गया है, जहां उससे गहन पूछताछ जारी है। पूछताछ के बाद, उसे अलवर के डिटेनिंग सेंटर भेजा जाएगा। सुरक्षा और निगरानी का अभियान अजमेर में पुलिस और सीआईडी की टीमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही हैं। इनकी जांच का उद्देश्य अवैध आप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई करना और क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दरगाह थाना पुलिस इस तरह की और कार्रवाइयों को आगे भी जारी रखने की योजना बना रही है।
जयपुर। धनतेरस के साथ ही जयपुर में दीपोत्सव का उल्लास चरम पर पहुंच गया है। इस बार अयोध्या थीम पर सजे बाजारों में रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट ने शहर को एक नया रूप दिया है। दीपावली के इस पर्व पर जयपुर के बाजारों में भव्यता और रौनक का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जो पूरे देश में मशहूर है। अयोध्या थीम का आकर्षण जयपुर में विभिन्न बाजारों को अयोध्या थीम पर सजाया गया है, जिसमें भगवान श्रीराम और अयोध्या की झांकी प्रमुखता से प्रस्तुत की गई है। इस बार हनुमान जी की प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जो अपने सीने चीरकर भगवान राम की तस्वीर दिखा रही है। यह सजावट न केवल धार्मिक भावना को प्रदर्शित करती है, बल्कि लोगों के बीच उत्साह और उमंग भी भरती है। एमआई रोड की विशेष सजावट जयपुर के एमआई रोड पर अजमेरी गेट से लेकर गवर्नमेंट हॉस्टल तक लगभग 3.3 किमी की लंबाई में विशेष लाइटिंग की गई है। यह सजावट दीपोत्सव के दौरान सात दिनों तक प्रदर्शित की जाएगी, जो इस वर्ष जयपुर में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सजावट है। यहां भी हनुमान जी की विशेष मूर्ति स्थापित की गई है, जो लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। राइजिंग राजस्थान थीम की झलक राज्य सरकार के मिशन ‘राइजिंग राजस्थान’ की थीम पर भी खास सजावट की गई है। इस थीम के अंतर्गत पांच बत्ती सर्कल पर राज्य सरकार के विभिन्न एमओयू को लाइटिंग के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। बाजार की सड़कों के दोनों ओर उगते हुए सूर्य को दर्शाने वाली लाइटिंग ने ‘राइजिंग राजस्थान’ की भावना को जीवंत कर दिया है। इसके साथ ही, बाजार में साफ-सफाई का विशेष ध्यान भी रखा गया है, जिससे वातावरण और भी खुशनुमा बन गया है। जौहरी बाजार का अद्भुत नजारा जयपुर के जौहरी बाजार को भगवान राम के अयोध्या आगमन की थीम पर सजाया गया है। यहां प्रभु श्रीराम के वनवास से लौटकर अयोध्या पहुंचने की झांकी को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है, जो राम मंदिर निर्माण की प्रतीक है। बाजार के दोनों ओर 16-16 गेट बनाए गए हैं, जिन पर भगवान राम के कटआउट और जय श्रीराम के नारों के साथ सजावट की गई है। छोटी-बड़ी एलईडी लाइट्स ने बाजार की सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं। सजावट का उल्लास 28 अक्टूबर को लाइटिंग का स्विच ऑन किया गया, और अब जयपुर के बाजारों में इस बार की सजावट में पारंपरिकता और आधुनिकता का संगम नजर आ रहा है। धनतेरस से लेकर दिवाली तक ये सजावट पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गई है। भाजपा मुख्यालय की रंग-बिरंगी सजावट दीप उत्सव के उल्लास में भारतीय जनता पार्टी का मुख्यालय भी रंग-बिरंगी लाइटों से सज गया है, जो त्योहार के जश्न को और भी भव्य बना रहा है। इस साल का दीपोत्सव जयपुरवासियों और पर्यटकों के लिए यादगार बन गया है।
सीकर। जिले के लक्ष्मणगढ़ में मंगलवार को एक भयंकर सड़क हादसे में 12 लोगों की जान चली गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब एक बस सुजानगढ़ से नवलगढ़ की ओर जा रही थी और लक्ष्मणगढ़ के सालासर पुलिया के पास बस का चालक मोड़ नहीं पा सका, जिससे बस सीधे पुलिया से टकरा गई। हादसे की भयावहता दुर्घटना में सात लोगों की मौत लक्ष्मणगढ़ में हुई, जबकि पांच लोगों ने सीकर में दम तोड़ दिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई, जिससे स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े और बस में फंसे यात्रियों को निकालने का प्रयास किया। राहत कार्य और घायलों का उपचार घायलों को पहले लक्ष्मणगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया, लेकिन कई की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें सीकर के कल्याण अस्पताल रेफर किया गया। पुलिस और प्रशासन ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और क्रेन की मदद से बस को हटाया। दुर्घटना की वजह और प्रशासनिक कार्रवाई पुलिस के अनुसार, बस सुजानगढ़-नवलगढ़ रूट पर तेज रफ्तार में थी, जिसकी वजह से चालक मोड़ पर नियंत्रण नहीं रख सका। घटना के बाद कलेक्टर मुकुल शर्मा और पुलिस अधीक्षक भुवन भूषण ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल-चाल लिया और राहत कार्यों की समीक्षा की। सांसद अमराराम का दौरा इस दुखद घटना के बाद सांसद अमराराम भी सीकर के कल्याण अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों की स्थिति का जायजा लिया और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों एवं चिकित्सकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। स्थानीय समुदाय का सहयोग स्थानीय लोगों ने हादसे के तुरंत बाद राहत कार्यों में सक्रियता दिखाई और घायलों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए। यह घटना न केवल एक दुखद हादसा है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को भी उजागर करती है।
जोधपुर की खासियत दिवाली पर पटाखा मिठाई का अनोखा स्वाद दिवाली का त्योहार सिर्फ रोशनी और पटाखों का ही नहीं, बल्कि मिठाइयों का भी होता है। इस खास अवसर पर राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर में एक अनोखी मिठाई का बाजार में धूम मची हुई है—पटाखा मिठाई। यह मिठाई विशेष रूप से दिवाली पर बनती है और इसके पीछे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। पटाखा मिठाई: एक नया प्रयोग जोधपुर के मिठाई विक्रेताओं ने एक अभिनव प्रयोग करते हुए पटाखों और दीपकों के आकार की मिठाई बनानी शुरू की है। ये मिठाइयाँ ड्राई फ्रूट्स से तैयार की जाती हैं और उनका रंग-बिरंगा रूप देखकर लगता है कि ये असली पटाखे हैं। जोधपुर के लोग इस मिठाई को बड़े चाव से खा रहे हैं, और विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। बाजार में रौनक और भीड़ जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आ रही है, बाजार में मिठाई की बिक्री में भी तेजी आई है। मिठाई विक्रेताओं ने बताया कि इस बार विशेष रूप से पटाखा मिठाई की मांग बढ़ गई है। इनमें कोटा और सुतली बम जैसे आकार शामिल हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक हैं। इनकी सुंदरता लोगों को अपनी ओर खींचती है, जिससे ग्राहकों का ध्यान इन मिठाइयों पर जाता है। प्रदूषण की चिंता और बच्चों का आकर्षण इस मिठाई का निर्माण केवल दिवाली तक सीमित नहीं है। विक्रेताओं ने बताया कि वे होली और रक्षाबंधन जैसे अन्य त्योहारों पर भी इस तरह की मिठाइयाँ तैयार करते हैं। उन्होंने कहा, “हमने यह मिठाई इस सोच के साथ बनाई है कि लोग असली पटाखों के बजाय मिठाई के रूप में इसे खरीदें।” बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए यह एक सकारात्मक प्रयास है, क्योंकि इससे बच्चे भी मिठाई के आकर्षण में फंसकर पटाखों से दूर रह सकते हैं। मिठाई के पटाखों की बढ़ती मांग जोधपुर में इस तरह की मिठाई की मांग तेजी से बढ़ रही है, और विक्रेताओं के पास इसे बनाने के अधिक ऑर्डर भी आ रहे हैं। हालांकि, हर गली और मोहल्ले में पारंपरिक पटाखे मिल जाएंगे, लेकिन मिठाई वाले पटाखों का अनोखा अनुभव केवल कुछ दुकानों पर ही उपलब्ध है। इस दिवाली, जोधपुर के इस अनोखे पटाखा मिठाई का स्वाद लेने का मौका न चूकें, जो आपके मीठे अनुभव को और भी खास बना देगा!
हरियाणा-राजस्थान। हाल ही में एक वायरल वीडियो के चलते हरियाणा और राजस्थान के बीच उत्पन्न विवाद अब सुलझ गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब हरियाणा की एक महिला कांस्टेबल ने राजस्थान रोडवेज की बस में किराया देने से मना कर दिया था, जिसके बाद परिचालक और कांस्टेबल के बीच बहस हो गई। इस मामले को लेकर दोनों राज्यों में एक-दूसरे की बसों पर चालान काटने का सिलसिला शुरू हो गया था। उच्चस्तरीय बैठक में हुआ समाधान इस विवाद को खत्म करने के लिए रोडवेज मुख्यालय के साथ उच्चस्तरीय बैठक की गई। बैठक के परिणामस्वरूप, सोमवार को दोनों राज्यों में बसों के चालान नहीं काटे गए। बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे। विवाद का विस्तार विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब रोहतक से दिल्ली जाने वाली एक बस में हरियाणा की महिला कांस्टेबल ने टिकट लेने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद, परिचालक और कांस्टेबल के बीच तीखी बहस हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होने के बाद राजस्थान रोडवेज की कर्मचारी यूनियन ने भी इस मुद्दे को उठाया और दोनों सरकारों के बीच मामला बढ़ गया। चालान की स्थिति इस विवाद के चलते राजस्थान में हरियाणा रोडवेज की 76 बसों के चालान काटे गए, जबकि 8 बसें जब्त की गईं। इसके जवाब में हरियाणा में 100 से अधिक राजस्थान रोडवेज बसों के चालान काटे गए। यह विवाद इतना बढ़ गया कि मामला सरकार के स्तर तक पहुंच गया, जहां राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने हरियाणा के डीजीपी को पत्र लिखकर महिला कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बसों का आवागमन सामान्य हरियाणा और राजस्थान के बीच करीब 300 बसें नियमित रूप से चलती हैं। हरियाणा की करीब 300 बसें राजस्थान के विभिन्न जिलों में संचालित होती हैं, जबकि राजस्थान रोडवेज की बसें हरियाणा होते हुए दिल्ली जाती हैं। अब, दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद स्थिति सामान्य हो गई है और तय समय पर बसों का आवागमन जारी रहेगा। रोडवेज डिपो रोहतक के जीएम भारत भूषण गोगिया ने कहा कि इस मामले को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों ने मिलकर समाधान निकाल लिया है और भविष्य में ऐसी किसी भी समस्या से बचने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
रेवाड़ी। हरियाणा की महिला पुलिसकर्मी और राजस्थान रोडवेज के कंडक्टर के बीच किराए को लेकर हुई बहस ने दो राज्यों के बीच विवाद को जन्म दे दिया है। इस घटना के बाद से रेवाड़ी के रोडवेज बस चालकों में भय का माहौल बन गया है, जिससे यात्री भी प्रभावित हो रहे हैं। घटना तब शुरू हुई जब हरियाणा पुलिस की एक महिला सिपाही ने बस में यात्रा करते समय कंडक्टर द्वारा मांगी गई टिकट देने से इनकार कर दिया। कंडक्टर ने बस रोककर सिपाही से टिकट लेने का आग्रह किया, जिसके बाद दोनों के बीच बहस हुई। इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हरियाणा पुलिस ने कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप राजस्थान रोडवेज की 50 से अधिक बसों के चालान काट दिए गए। चालान का बढ़ता डर अब रेवाड़ी से राजस्थान के विभिन्न जिलों में रोजाना चलने वाली 15 रोडवेज बसों के चालकों में चालान का डर बढ़ गया है। चालकों का कहना है कि भले ही उनके पास सभी आवश्यक कागजात हों, लेकिन राजस्थान और हरियाणा पुलिस के बीच चालान काटने की प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें हमेशा टेंशन में रहना पड़ता है। चालकों का कहना है कि यात्रा के दौरान पुलिस बीच रास्ते में बसों को रोककर चेकिंग करती है, जिससे यात्रियों का समय बर्बाद होता है और उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। दो राज्यों के बीच विवाद राजस्थान पुलिस ने हरियाणा रोडवेज की बसों के 90 चालान काटे हैं, जबकि हरियाणा पुलिस ने राजस्थान रोडवेज की 50 से अधिक बसों के चालान काटे हैं। चालान की वजह ओवरस्पीडिंग, सीट बेल्ट न लगाना और ड्राइवर का वर्दी न पहनना जैसी कमियां बताई जा रही हैं। इस स्थिति ने दोनों राज्यों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। अधिकारियों की भूमिका हरियाणा रोडवेज यूनियन के प्रधान राजपाल यादव ने कहा कि जब तक यह मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक चालान कटने का डर बना रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सरकार के स्तर पर बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा। वहीं, रोडवेज रेवाड़ी के महाप्रबंधक देवदत्त ने बताया कि यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है और आगे की बातचीत के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। दोनों राज्यों के बीच बढ़ते इस विवाद ने बस चालकों और यात्रियों को चिंतित कर दिया है, और फिलहाल स्थिति को सामान्य करने के लिए अधिकारियों द्वारा सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं।
गमछा डांस राजस्थान में नृत्य और संगीत की समृद्ध परंपरा सदियों से है, लेकिन “गमछा डांस” ने इन दिनों अलग पहचान बनाई है। यह नया नृत्य महज 10 महीने पुराना है, लेकिन इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है, खासकर राजनीतिक मंचों पर। इस नृत्य का जनक सभी को पता है, और उसकी लोकप्रियता ने युवाओं के सामने रोजगार का एक अनोखा अवसर खोल दिया है। कैसे शुरू हुआ गमछा डांस का सिलसिला? गमछा डांस को पहली बार एक राजनीतिक मंच पर देखा गया, जिसने लोगों को आकर्षित किया और जल्दी ही यह लोकप्रिय हो गया। राजनीति में नृत्य का इस तरह का प्रयोग पहले कभी नहीं देखा गया था, और गमछा डांस ने अपनी जगह बना ली। इस नृत्य की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले समय में राजनीतिक मंचों के साथ-साथ सार्वजनिक आयोजनों में भी इसकी अच्छी मांग होगी। युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा अवसर राजस्थान में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह नया नृत्य शैली एक बड़ा अवसर बनकर उभरा है। इस नृत्य में लचक, अनुशासन, और अभ्यास की जरूरत होती है, जिसे सीखकर युवा इसे अपने करियर के रूप में अपना सकते हैं। जैसे-जैसे इस नृत्य की डिमांड बढ़ेगी, वैसे-वैसे नए नर्तकों की भी जरूरत होगी। यदि शुरुआती समय में कुछ लोग इस कला में पारंगत हो जाते हैं, तो वे अपने क्षेत्र में नए कलाकारों को प्रशिक्षित भी कर सकते हैं। सरकार के लिए भी अवसर सरकार के पास भी इस नृत्य को रोजगार के साधन के रूप में बढ़ावा देने का अवसर है। सरकार जिला स्तर पर डांस स्कूल खोलकर युवाओं को इस नृत्य का प्रशिक्षण दे सकती है, जिससे वे इसे रोजगार में बदल सकें। सरकार को चाहिए कि भीलवाड़ा की कपड़ा फैक्ट्रियों से गमछा बनवाने का ऑर्डर देकर इसे नृत्य के इच्छुक युवाओं को मुफ्त में दे, ताकि वे प्रशिक्षण शुरू कर सकें। नए प्रयोगों की स्वीकृति की संभावना राजनीति में नया प्रयोग हमेशा शुरुआती आलोचनाओं का सामना करता है, लेकिन यदि यह प्रयोग सही दिशा में जाता है तो इसे स्वीकृति मिलने में समय नहीं लगता। गमछा डांस का उदाहरण इसी तथ्य को दर्शाता है। इस नृत्य ने राजनीति में नई दिशा दिखाते हुए एक नये क्षेत्र का उद्घाटन किया है। भविष्य में यह एक लोकप्रिय नृत्य शैली बन सकता है, जो न केवल संस्कृति का हिस्सा बनेगा बल्कि युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा। इस प्रकार, गमछा डांस राजस्थान के युवाओं के लिए न केवल मनोरंजन का साधन बना है, बल्कि एक संभावित करियर ऑप्शन के रूप में उभर रहा है, जिसे सरकार और समाज द्वारा सहयोग और प्रोत्साहन मिलने से रोजगार में बदलने का अवसर मिलेगा।
राजस्थान उपचुनाव क्यों हो रही है रविंद्र सिंह भाटी की चर्चा राजस्थान में आगामी 13 नवंबर को सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, और इसके साथ ही प्रदेश में चुनाव प्रचार और सियासी गहमागहमी अपने चरम पर है। इसी माहौल में, भले ही चुनाव में प्रत्यक्ष रूप से न उतरने के बावजूद, रविंद्र सिंह भाटी का नाम चर्चा में है। उनका एक बयान इन उपचुनावों के संदर्भ में वायरल हो रहा है, जिसने चुनावी सियासत में हलचल मचा दी है। रविंद्र सिंह भाटी के बयान का असर हालांकि भाटी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनका बयान सियासी गलियारों में गूंज रहा है। उन्होंने कहा है कि अगर उनसे सहयोग मांगा गया तो वह भी प्रचार में शामिल हो सकते हैं। इस बयान का असर अब देवली-उनियारा सीट पर देखा जा सकता है, जहां कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नरेश मीणा ने नामांकन भरा है। भाटी ने संकेत दिए हैं कि यदि नरेश मीणा उनसे समर्थन मांगते हैं, तो वह उनका प्रचार करेंगे, क्योंकि वे छात्र राजनीति से उभरे एक युवा नेता हैं। भाटी ने स्पष्ट किया कि ऐसे युवा नेताओं का विधानसभा में पहुंचना राज्य के विकास और राजनीतिक सुधारों के लिए अहम हो सकता है। चौरासी सीट पर भारत आदिवासी पार्टी का समर्थन चौरासी विधानसभा सीट पर भी भाटी ने भारत आदिवासी पार्टी का समर्थन देने का ऐलान किया है। इस कदम को भाटी ने आदिवासी समुदाय के विकास के लिए जरूरी बताया है और कहा है कि उनका समर्थन उन लोगों के साथ है जो क्षेत्रीय विकास और सामाजिक समानता के लिए काम कर रहे हैं। हनुमान बेनीवाल का समर्थन और “5 पांडव” पोस्टर इसी बीच, नरेश मीणा के समर्थन में एक “5 पांडव” नामक पोस्टर भी सामने आया, जिसमें नरेश मीणा के साथ राजकुमार रोत, हनुमान बेनीवाल, रविंद्र सिंह भाटी और चंद्रशेखर आजाद नजर आ रहे हैं। इस पोस्टर ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है, और विपक्षी दलों में हलचल मचा दी है। हनुमान बेनीवाल का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे नरेश मीणा के समर्थन की घोषणा कर रहे हैं। बेनीवाल ने कहा है कि वे नरेश मीणा के समर्थन में प्रचार करेंगे और उन्हें इस चुनाव में जिताने के लिए जनता से वोट की अपील करेंगे। राजस्थान के इन उपचुनावों में, सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस चुनावी महौल में जहां बागियों के तेवर नजर आ रहे हैं, वहीं नए समीकरण बनते-बिगड़ते दिख रहे हैं। देखना यह होगा कि भाटी और बेनीवाल के समर्थन से इन निर्दलीय उम्मीदवारों को कितनी मजबूती मिलती है और इसका चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ता है।
उज्जैन में नकली घी का पर्दाफाश उज्जैन में दीपावली के त्योहारी सीजन से पहले खाद्य विभाग ने मिलावटखोरी के गंभीर मामले का खुलासा किया है। फव्वारा चौक स्थित महावीर इंटरप्राइजेस पर खाद्य विभाग की टीम ने छापा मारते हुए 150 लीटर अमानक स्तर का घी जब्त किया, जो रुद्रांश ब्रांड के नाम से बाजार में बिक रहा था। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि यह नकली घी राजस्थान के अलवर में तैयार किया गया था और इंदौर के रास्ते उज्जैन पहुंचाया जा रहा था। खाद्य अधिकारी बीएस देवलिया ने बताया कि असली घी बनाने में लगभग 500 रुपये प्रति किलो का खर्च आता है। लाभ जोड़कर असली घी का मूल्य 600 रुपये से कम नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद रुद्रांश ब्रांड का यह नकली घी बाजार में 340 रुपये प्रति किलो में बेचा जा रहा था। अधिकारियों ने इस घी को सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक बताया और इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए। महावीर इंटरप्राइजेस पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को हैरानी हुई कि इस नकली घी के डिब्बों पर “सेहत का ख्याल” जैसा झूठा स्लोगन लिखा था, जबकि इसमें मिल्क फैट के अलावा अन्य हानिकारक तत्वों की मिलावट की आशंका है। इस घी के सैंपल्स को अब प्रयोगशाला में भेजा गया है, ताकि उसकी शुद्धता की पुष्टि की जा सके। फूड डिपार्टमेंट के अधिकारी बसंत शर्मा ने भी माना कि इसमें मिल्क फैट के अलावा अन्य फैट भी मिला हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। रुद्रांश ब्रांड घी, जिसे अलवर में निर्मित बताया गया है, ने केंद्र सरकार से FSSAI लाइसेंस भी ले रखा था। एक साल से यह नकली घी उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में महावीर इंटरप्राइजेस के संचालक राजेंद्र जैन द्वारा बेचा जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि अब इंदौर जिला प्रशासन को भी इस मामले की सूचना दे दी गई है ताकि और भी दोषियों पर कार्रवाई हो सके। खाद्य विभाग की इस कार्रवाई से त्योहार के मौसम में लोगों की सेहत से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे कम कीमत पर बिकने वाले खाद्य उत्पादों के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की जानकारी तुरंत दें।
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