Author: UmaKant Joshi

Ajmer News उदयपुर के कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड का मुख्य आरोपी रियाज अत्तारी की तबीयत बिगड़ने पर उसे मंगलवार को अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती किया गया। उसे विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत यूरोलॉजी विभाग में प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद उसे वापस हाई सिक्योरिटी जेल में भेज दिया गया। अस्पताल में भर्ती होने का कारण जानकारी के अनुसार, रियाज अत्तारी को बाथरूम में तकलीफ होने के बाद उच्च सुरक्षा जेल से बाहर लाया गया। उसकी तबीयत पहले भी खराब हो चुकी थी, जब उसे उसी अस्पताल में दिखाया गया था। इस बार, रियाज के साथ अन्य कुख्यात अपराधियों को भी इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था, जिसमें हार्डकोर अपराधी सिकंदर और दिलीप शामिल थे। सुरक्षा व्यवस्थाएं अस्पताल में रियाज और अन्य आरोपियों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने अस्पताल परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया था। हथियारबंद जवानों की तैनाती के साथ-साथ सिविल लाइन और कोतवाली थाना पुलिस भी मौजूद थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। रियाज को पहले कार्डियोलॉजी विभाग में दिखाया गया, जहां से उसे यूरोलॉजी विभाग भेजा गया। प्राथमिक उपचार अस्पताल में रियाज को जांच के बाद डॉक्टर द्वारा प्राथमिक इलाज दिया गया। इलाज के बाद सभी हार्डकोर अपराधियों को फिर से हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। पुलिस ने सभी सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए आरोपियों को सुरक्षित रूप से जेल में वापस भेजा। कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड उदयपुर के कन्हैयालाल टेलर की हत्या की यह घटना राजस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है। अत्तारी और अन्य आरोपी इस मामले में मुख्य आरोपी हैं, और उनकी गिरफ्तारी के बाद से कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा की जा रही है। निष्कर्ष रियाज अत्तारी की तबीयत बिगड़ने की घटना ने एक बार फिर कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड के संदर्भ में सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पुलिस और प्रशासन की तत्परता के चलते बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा उपायों को और भी मजबूत किया जाना चाहिए।

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राजस्थान विधानसभा के खींवसर उपचुनाव ने राजनीतिक हलचलों को तेज कर दिया है, जहां मुख्य लड़ाई मैदान के बाहर ही लड़ी जा रही है। भाजपा ने कांग्रेस कैंप में सेंधमारी कर खुद को मजबूत करने की कोशिश की है, लेकिन यहां असली मुकाबला हनुमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा के बीच चल रहा है। खींवसर सीट का राजनीतिक महत्व खींवसर विधानसभा सीट पश्चिमी राजस्थान में महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह सीट उन नेताओं के लिए रणभूमि बनी हुई है, जो खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन उनके बीच जुबानी जंग तेज है। यहां आरएलपी से कनिका बेनीवाल, बीजेपी से रेवत राम डांगा और कांग्रेस से डॉ. रतन चौधरी चुनावी मैदान में हैं, लेकिन असली लड़ाई हनुमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा के बीच चल रही है। हनुमान बेनीवाल का परिवारिक इतिहास हनुमान बेनीवाल के सांसद बनने के बाद खींवसर सीट उपचुनाव के लिए खाली हुई। उन्होंने अपनी पत्नी कनिका को इस चुनावी दौड़ में उतारा है। हनुमान की राजनीतिक विरासत उनके पिता रामदेव चौधरी से मिली है, जो नाथूराम मिर्धा के करीबी माने जाते थे। अगर हनुमान इस चुनाव में हारते हैं, तो आरएलपी का प्रतिनिधित्व राजस्थान विधानसभा से समाप्त हो सकता है। ज्योति मिर्धा की रणनीति वहीं, ज्योति मिर्धा इस चुनाव में रेवत राम डांगा के समर्थन में पूरी ताकत लगा रही हैं। उनके बीच की अदावत ने इस चुनाव को और भी रोचक बना दिया है। दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है, जो इस क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित कर रही है। खींवसर की चुनावी इतिहास खींवसर सीट 2008 में अस्तित्व में आई और इसके बाद से चार विधानसभा चुनाव और एक उपचुनाव हो चुका है, जिसमें हनुमान बेनीवाल ने चारों विधानसभा चुनाव जीते हैं। 2013 में उन्होंने निर्दलीय के रूप में जीत हासिल की, जबकि 2018 में आरएलपी के टिकट पर चुनाव जीते। राजनीतिक विरासत की लड़ाई इस सीट पर हनुमान और ज्योति दोनों को राजनीतिक विरासत मिली है, जिससे उनका प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प हो जाती है। दोनों के बीच पहले भी आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं, खासकर 2013 के चुनावों के दौरान जब हनुमान ने ज्योति पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनका विरोध किया था। निष्कर्ष खींवसर उपचुनाव में हनुमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा के बीच की राजनीतिक जंग न केवल उनके भविष्य को निर्धारित करेगी, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान की राजनीति में भी एक नया मोड़ ला सकती है। इस चुनावी रणभूमि में उनके समर्थक और रणनीतियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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राजस्थान विधानसभा के खींवसर उपचुनाव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यह सीट केवल चुनावी रणनीतियों का केंद्र नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई का भी मैदान बन गई है। इस बार चुनावी तापमान बढ़ता जा रहा है, जहां भाजपा ने कांग्रेस कैंप में सेंध लगाकर स्थिति को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है, लेकिन असली मुकाबला तो मुख्यधारा से बाहर के नेताओं के बीच चल रहा है। खींवसर सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि खींवसर विधानसभा सीट पश्चिमी राजस्थान में स्थित है और यह उन नेताओं के लिए महत्वपूर्ण बन चुकी है, जो इस बार चुनावी दौड़ में नहीं हैं, लेकिन उनके प्रभाव का मुकाबला ज़ोरों पर है। यहां आएलपी की ओर से कनिका बेनीवाल, भाजपा से रेवत राम डांगा, और कांग्रेस से डॉ. रतन चौधरी मैदान में हैं। लेकिन असली टकराव आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल और भाजपा नेता ज्योति मिर्धा के बीच हो रहा है। हनुमान बेनीवाल की विरासत और उसकी चुनौती हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारने की रणनीति उनके लिए अस्तित्व की लड़ाई बन गई है। यदि वे यह चुनाव हारते हैं, तो आरएलपी का प्रतिनिधित्व राजस्थान विधानसभा से समाप्त हो सकता है। हनुमान के पिता, रामदेव चौधरी, कभी नाथूराम मिर्धा के करीबी रहे हैं, जिससे यह सीट उनके लिए राजनीतिक विरासत का प्रतीक है। ज्योति मिर्धा का प्रभाव ज्योति मिर्धा ने रेवत राम डांगा के समर्थन में पूरी ताकत लगा दी है। उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी मजबूत है, जो नागौर क्षेत्र में गहरी जड़ें रखती है। दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, जिसमें हर कोई अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सियासत में अदावत हनुमान और ज्योति की अदावत का इतिहास भी है। 2013 में जब हनुमान निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे, तब ज्योति ने उनके खिलाफ मोर्चा खोला था। हनुमान ने आरोप लगाया था कि ज्योति ने उन्हें कमजोर करने की कोशिश की थी। इस समय से दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे थे। खींवसर का चुनावी इतिहास खींवसर सीट का गठन 2008 में हुआ था, और तब से हनुमान बेनीवाल ने यहां लगातार जीत हासिल की है। उन्होंने 2008 में भाजपा के टिकट पर, 2013 में निर्दलीय, और फिर 2018 में अपनी पार्टी आरएलपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। हाल ही में, हनुमान ने 2023 में भी आरएलपी से जीत हासिल की थी, लेकिन अब उनकी पत्नी चुनावी मैदान में हैं। निष्कर्ष खींवसर उपचुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की जंग बन चुका है। यह देखने में दिलचस्प होगा कि हनुमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा के बीच की यह अदावत किस दिशा में जाती है और क्या यह सीट किसी नए राजनीतिक समीकरण का आधार बनेगी। राजनीति के इस हॉट स्पॉट पर नजरें टिकी रहेंगी।

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केकड़ी जिले के भिनाय उपखंड में बिजली ट्रांसफार्मर से तेल और कीमती धातु चुराने वाले एक गिरोह ने लोगों में आतंक मचा रखा है। पिछले दो महीनों में, इस गिरोह ने दर्जनों ट्रांसफार्मरों को निशाना बनाकर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है, जिससे बिजली विभाग और स्थानीय किसानों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चोरों का गिरोह और उनकी रणनीति अज्ञात चोरों का यह गिरोह बिजली के ट्रांसफार्मर से न केवल तेल बल्कि उसमें लगे कीमती धातु भी चुरा रहा है। इस गिरोह के सदस्य तकनीकी ज्ञान रखते हैं और चलती लाइन में इस चोरी को अंजाम देते हैं। ये चोर इतनी चतुराई से काम करते हैं कि ट्रांसफार्मर से तेल निकालने के लिए वे पहले डीपी के जम्पर काटते हैं और फिर बिना किसी हड़कंप के अपनी हरकतों को अंजाम देते हैं। फसल बुवाई में समस्या केकड़ी के किसानों के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो गई है, क्योंकि इस समय किसान अपनी फसलों के लिए सिंचाई कर रहे हैं। डीपी से लगातार हो रही चोरी के कारण किसानों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी फसलों को गंभीर खतरा है। जैसे-जैसे चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, किसानों की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। पुलिस और बिजली निगम की स्थिति भिनाय क्षेत्र में इस तरह की चोरी की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन स्थानीय पुलिस अभी तक एक भी मामले का खुलासा नहीं कर पाई है। इस मामले में दर्जनों मुकदमें स्थानीय थाने में दर्ज हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे चोरों के हौंसले और भी बुलंद हो गए हैं। बिजली निगम के अधिकारी और कर्मचारी इस समस्या से बेहद परेशान हैं, क्योंकि बिना मुकदमे के निगम मुख्यालय से नई ट्रांसफार्मर, तेल या अन्य सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती। इस स्थिति के चलते निगम को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। भविष्य की चुनौतियां यदि यह स्थिति यूं ही बनी रही, तो भिनाय क्षेत्र में बिजली आपूर्ति और किसानों की सिंचाई व्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है। निगम और पुलिस विभाग को मिलकर इस गिरोह के खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके और चोरी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। इस समस्या का समाधान करने के लिए, बिजली निगम को आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी और पुलिस को चोरी की घटनाओं की त्वरित जांच करनी चाहिए।

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खींवसर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रेवंतराम डांगा की चुनावी सभा उस वक्त विवादों में घिर गई, जब उन्होंने सभा में विकास कार्यों का जिक्र किया। सभा के दौरान जैसे ही रेवंतराम डांगा ने विकास के कार्यों को लेकर अपनी बात रखनी शुरू की, स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए खींवसर के विकास का श्रेय हनुमान बेनीवाल को दिया। लोगों ने भाजपा के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद सभा में मौजूद बेनीवाल और डांगा के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। रेवंतराम डांगा और बेनीवाल के समर्थकों में भिड़ंत सोमवार रात भाजपा प्रत्याशी रेवंतराम डांगा खींवसर के रोल ग्राम पंचायत के चोपड़ों गुजरों की ढाणी में चुनावी सभा के लिए पहुंचे थे। जैसे ही उन्होंने अपना उद्बोधन शुरू किया, वहां मौजूद कुछ लोगों ने बेनीवाल के समर्थन में नारे लगाए और भाजपा प्रत्याशी को घेरते हुए पूछा, “आपने खींवसर के लिए अब तक क्या किया?” लोगों का कहना था कि खींवसर में जितना भी विकास हुआ है, वह हनुमान बेनीवाल की बदौलत हुआ है। विकास कार्यों पर श्रेय को लेकर गरमाया माहौल रेवंतराम डांगा ने लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “यह सब विकास कार्य मैंने ही करवाए हैं, बेनीवाल का इसमें कोई योगदान नहीं है।” इसके बाद सभा में स्थिति बिगड़ती चली गई, और दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए। एक ओर बेनीवाल समर्थक उनके विकास कार्यों की तारीफ कर रहे थे, तो दूसरी ओर भाजपा समर्थक डांगा के पक्ष में नारे लगा रहे थे। सभा में बढ़ता तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा तनाव बढ़ने के बाद पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए स्थिति को शांत किया। इसके बावजूद स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी रही कि भाजपा प्रत्याशी खींवसर के विकास का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। सभा के दौरान लोगों का गुस्सा इस बात पर भी था कि भाजपा प्रत्याशी ने पिछले चुनावों में किए गए वादों को पूरा नहीं किया और अब उपचुनाव में फिर से विकास की बात कर रहे हैं। खींवसर की ‘हॉट सीट’ पर कड़ी टक्कर खींवसर उपचुनाव में भाजपा के रेवंतराम डांगा और आरएलपी के हनुमान बेनीवाल के बीच मुकाबला पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। हनुमान बेनीवाल की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ मानी जाती है, और यही वजह है कि भाजपा का मुकाबला यहां मुश्किल हो रहा है। इस बार दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच विकास कार्यों का श्रेय लेने की जंग भी चुनावी माहौल को गर्माए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम ने खींवसर में भाजपा की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं हनुमान बेनीवाल के समर्थकों ने अपने नेता के प्रति अपनी वफादारी और उनके विकास कार्यों पर अटूट विश्वास जताया।

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Kekri News राजस्थान के केकड़ी जिले के सावर थाना क्षेत्र में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें 18 वर्षीय युवक मुकेश माली की जान चली गई। मोटालाव मोड़ के पास एक तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस हादसे की सूचना राहगीरों ने पुलिस और परिवार को दी, जिससे परिवार में मातम छा गया। खेत में सिंचाई के लिए निकला था मुकेश ग्राम घटियाली निवासी मुकेश माली, पुत्र कालूराम माली, अपने खेत पर फसल की सिंचाई के लिए मानपुरा जा रहे थे। रास्ते में, जैसे ही वे मोटालाव मोड़ पर पहुंचे, पंडेर की तरफ से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भयानक थी कि बाइक काफी दूर तक उछल गई, और मुकेश भी बाइक के साथ घिसटते चले गए। हादसे में मुकेश ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। कार चालक फरार, पुलिस कर रही जांच हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। राहगीरों ने तुरंत घटना की सूचना सावर थाना पुलिस और मुकेश के परिजनों को दी। परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल मुकेश को सावर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। परिवार में छाया मातम, जांच में जुटी पुलिस इस दर्दनाक हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मुकेश के चाचा पप्पू लाल माली की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है। सावर थाना पुलिस वाहन की पहचान और आरोपी को पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई है।

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Sambhal News : मेरठ-बदायूं हाईवे पर रविवार रात एक दर्दनाक हादसे में राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गांव सतिया निवासी 28 वर्षीय चंद्रप्रकाश की मौत हो गई। चंद्रप्रकाश बरेली से सब्जी लेकर अपने पिकअप वाहन से राजस्थान लौट रहे थे। रास्ते में बैरपुर महराजी चौकी के पास हाईवे पर उनकी पिकअप का टायर पंक्चर हो गया। वे जैसे ही सड़क किनारे टायर बदलने के लिए रुके, एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें कुचल दिया। हादसा इतना भयानक था कि वाहन चंद्रप्रकाश को लगभग 20 मीटर तक घसीटता ले गया। मौत की खबर सुनकर परिवार में मचा कोहराम घायल अवस्था में पुलिस ने तुरंत चंद्रप्रकाश को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर जैसे ही चंद्रप्रकाश के परिवार तक पहुंची, उनके परिजन गहरे शोक में डूब गए। सोमवार शाम उनके माता-पिता और रिश्तेदार सीएचसी पहुंचे, और पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। तीन बहनों में इकलौता भाई था चंद्रप्रकाश, शादी थी तय चंद्रप्रकाश तीन बहनों में अकेले भाई थे। उनके चचेरे भाई ललित कुमार ने बताया कि चंद्रप्रकाश की शादी तीन महीने बाद होनी थी, और परिवार इस खुशी की तैयारी कर रहा था। उनकी तीनों बहनों की शादी पहले ही हो चुकी है, और वे माता-पिता विमला देवी और पिता वेदप्रकाश के साथ घर की जिम्मेदारियों को संभाल रहे थे। चंद्रप्रकाश की असामयिक मौत ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी पुलिस पुलिस ने इस घटना को लेकर अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और वाहन की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से वाहन का पता लगाने का प्रयास कर रही है ताकि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।

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Dausa Bypoll राजस्थान में हो रहे दौसा उपचुनाव की राजनीतिक गर्मी बढ़ती जा रही है, जहां मैच फिक्सिंग की चर्चा ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। इसी बीच बीजेपी प्रत्याशी जगमोहन मीणा का एक दिलचस्प बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जगमोहन ने दावा किया है कि कांग्रेस के कई नेताओं का झुकाव उनकी ओर है, जिससे सियासी माहौल में नया मोड़ आ गया है। मैच फिक्सिंग की चर्चा और जगमोहन का बयान दौसा उपचुनाव में लंबे समय से चर्चाएं चल रही थीं कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच कथित तौर पर मैच फिक्सिंग हो चुकी है। हाल ही में, खुद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी एक जनसभा के दौरान इस चर्चा का जिक्र किया था, लेकिन इसे अफवाह बताया था। अब जगमोहन मीणा ने अपने बयान से इस चर्चा को और हवा दे दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता व्यक्तिगत तौर पर उनके समर्थन में हैं। सचिन पायलट की मौजूदगी और कांग्रेस के समीकरण दौसा में आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट की सभा भी होनी है। पायलट के प्रभावशाली नेतृत्व के चलते कांग्रेस यहां गुर्जर वोट को मजबूती से लामबंद करने की कोशिश कर रही है। जगमोहन ने सचिन पायलट की सभा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “वह अपने उम्मीदवार का समर्थन करने आएंगे, लेकिन कांग्रेस के नेताओं का दिल मेरे साथ है।” इसके साथ ही उन्होंने मुरारीलाल मीणा को लेकर भी कहा कि उनके प्रति भी एक स्नेह और जुड़ाव है जो राजनीति के परे है। जातीय समीकरण और राजनीतिक माहौल दौसा सीट पर जातीय समीकरणों का अहम रोल है। यह मीणा बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण जगमोहन मीणा

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Ramgarh Bypoll के प्रचार में गर्मी लाते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कड़ा कटाक्ष किया। जितेंद्र सिंह ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सिर्फ चुनाव के समय ही जनता के सामने आते हैं और चुनाव खत्म होते ही गायब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का युवा उम्मीदवार आर्यन जुबेर खान इस उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल करेंगे, और जनता इस चुनाव के माध्यम से अपने दिवंगत नेता जुबेर खान को श्रद्धांजलि देगी। भाजपा पर कटाक्ष, कांग्रेस की विचारधारा को बताया जनता की आवाज रामगढ़ और गोविंदगढ़ में आयोजित एक चुनावी सभा में जितेंद्र सिंह ने जनता को संबोधित करते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि वह केवल लुभावनी बातों के जरिए जनता को भ्रमित करती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की राजनीति धर्म और जाति में विभाजन की है, जो अब नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन तेजी से गिर रहा है और इसका असर राजस्थान के उपचुनाव में साफ देखा जा सकता है। आर्यन जुबेर खान को जन समर्थन और जुबेर खान की विरासत जितेंद्र सिंह ने कहा कि आर्यन जुबेर खान को दिवंगत नेता जुबेर खान की जनसेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है और जनता आर्यन में उनके पिता की छवि देख रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि 13 नवंबर को होने वाले चुनाव में आर्यन को भारी मतों से विजयी बनाकर जुबेर खान की विरासत को आगे बढ़ाएं। टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार को बताया ‘सर्कस सरकार’ इस मौके पर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौजूद थे। उन्होंने भाजपा सरकार को ‘सर्कस सरकार’ करार देते हुए कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री केवल हेलीकॉप्टर में सफर करते हैं और उन्हें जनता के दुख-दर्द की कोई चिंता नहीं है। जूली ने कहा कि राजस्थान में एक कमजोर और अस्थिर सरकार है जो प्रदेश के विकास को पीछे धकेल रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन, बेरोजगारी भत्ता और छात्रवृत्ति जैसे बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज कर भाजपा जनता का उपहास कर रही है। ईआरसीपी मुद्दे पर भाजपा को घेरा टीकाराम जूली ने इस दौरान ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बीजेपी केवल इस प्रोजेक्ट को लेकर ढोंग कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब इस प्रोजेक्ट का एमओयू (समझौता ज्ञापन) हुआ ही नहीं है, तो सरकार कैसे इसे जनता के सामने उपलब्ध नहीं कर रही है। यह सब सिर्फ वोटों के लिए किए जा रहे झूठे वादे हैं। कांग्रेस नेताओं का विशाल जनसमर्थन इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस के सचिव चिरंजीव राव, थानागाजी विधायक कांति मीणा, पूर्व मंत्री शकुंतला रावत, और युवा कांग्रेस अध्यक्ष कृष्ण यादव प्रमुख रहे। सभी ने एकजुटता दिखाते हुए रामगढ़ उपचुनाव में आर्यन जुबेर खान के समर्थन में जनता से वोट की अपील की। रामगढ़ का यह उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा के बीच बड़ी टक्कर का प्रतीक बन गया है, जहां कांग्रेस अपने प्रत्याशी के लिए भारी समर्थन जुटा रही है। अब देखना है कि इस चुनावी जंग में जनता किसे विजयी बनाती है।

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चीन का बड़ा कदम- चीन ने बुधवार को अपने अंतरिक्ष स्टेशन पर छह महीने के मिशन के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को सफलतापूर्वक भेजा, जिसमें देश की पहली महिला अंतरिक्ष इंजीनियर भी शामिल हैं। ‘शेनझोऊ-19’ नामक इस अंतरिक्ष यान को चीन के उत्तरपश्चिम में स्थित जियुक्वान अंतरिक्ष लॉन्च केंद्र से लॉन्च किया गया। ऐतिहासिक प्रक्षेपण ‘शेनझोऊ-19’ को तड़के सुबह ‘लॉन्ग मार्च-2एफ’ रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया। प्रक्षेपण के 10 मिनट बाद यह यान रॉकेट से अलग होकर अपने निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया। चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी (सीएमएसए) के अनुसार, यह मिशन पूरी तरह से कामयाब रहा और चालक दल के सदस्य सुरक्षित और अच्छी स्थिति में हैं। अंतरिक्ष में चीन की मजबूती अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से बाहर किए जाने के बाद चीन ने अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण किया। यह फिलहाल विश्व का एकमात्र सक्रिय अंतरिक्ष स्टेशन है जो किसी एक देश के अधीन है। चीन ने हाल ही में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री भेजने और अंतरिक्ष अनुसंधान की योजनाओं की घोषणा की है, जिससे वह वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने के करीब पहुंच रहा है। अंतरिक्ष अभियानों में विस्तार ‘शेनझोऊ-19’ के चालक दल में मिशन कमांडर काई शुझे, अंतरिक्ष यात्री सॉन्ग लिंगडोंग और वांग होज शामिल हैं। वांग होज चीन की पहली महिला अंतरिक्ष इंजीनियर हैं और अंतरिक्ष में जाने वाली तीसरी चीनी महिला भी हैं। इन अंतरिक्ष यात्रियों का उद्देश्य अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रयोगों का संचालन और नए उपकरणों की स्थापना करना है। उनका मिशन अंतरिक्ष विज्ञान, जैविकी, अंतरिक्ष चिकित्सा, और नई अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान को लेकर है। चीन का अंतरराष्ट्रीय सहयोग सीएमएसए के प्रवक्ता लिन शिकियांग ने बताया कि चीन ने विभिन्न देशों के साथ मिलकर अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और प्रशिक्षण पर बातचीत शुरू की है। इसके अतिरिक्त, चीन ने अपने अंतरिक्ष स्टेशन में भागीदार बनने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को आमंत्रित भी किया है। चीन के करीबी सहयोगी पाकिस्तान का एक अंतरिक्ष यात्री भी भविष्य में इस अंतरिक्ष स्टेशन पर जा सकता है। चीन की अंतरिक्ष उपलब्धियां चीन ने पहले भी कई ऐतिहासिक अंतरिक्ष अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जैसे कि चंद्रमा के सुदूर हिस्से से नमूने लाना और मंगल की सतह पर रोवर उतारना। यह नवीनतम मिशन ‘शेनझोऊ-19’ चीन की अंतरिक्ष शक्ति को और अधिक सुदृढ़ करेगा और उसे वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में ले जाएगा। चीन के इस साहसिक कदम ने न केवल उसकी तकनीकी उन्नति को दिखाया है, बल्कि अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में उसका आत्मनिर्भरता का प्रयास भी उजागर किया है।

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