Author: UmaKant Joshi
राजस्थान के नगरीय विकास और स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने गुरुवार को अजमेर के सर्किट हाउस में जनसुनवाई आयोजित की। इस मौके पर उन्होंने जनता की समस्याओं को सुना और अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। मंत्री खर्रा ने कहा कि केंद्र सरकार से हाल ही में 7000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है, जिससे विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आएगी। जनता की समस्याओं पर फोकससर्किट हाउस में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सफाईकर्मियों, कच्ची बस्तियों की समस्याओं और शहर के विकास से जुड़ी कई शिकायतें सामने आईं। इन समस्याओं को लेकर मंत्री ने कहा कि सभी मुद्दों पर अधिकारियों के साथ चर्चा कर समाधान किया जाएगा। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है और सभी जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। भर्ती प्रक्रिया में सुधारमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि प्रदेश में चल रही भर्ती प्रक्रिया में कुछ टाइपिंग मिस्टेक्स सामने आई थीं, जिन्हें जल्द सुधार कर नई सूची जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि भर्ती तिथि को भी बढ़ा दिया गया है ताकि सभी पात्र उम्मीदवार आवेदन कर सकें और प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जा सके। फंड के सही उपयोग पर जोरमंत्री खर्रा ने भाजपा सरकार के दौरान फंड के सही उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का कुछ हिस्सा गैर-जरूरी कामों में खर्च हुआ था, जिससे फंड रुक गए थे। लेकिन वर्तमान सरकार ने इस समस्या का समाधान कर लिया है और अब फंड का उपयोग केवल विकास कार्यों के लिए किया जाएगा। आगे की योजनाएंमंत्री खर्रा ने बताया कि उपचुनाव के बाद प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री के साथ चर्चा कर विकास कार्यों की नई योजनाओं पर विचार किया जाएगा। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में आए परिवादियों ने मंत्री के इस पहल की सराहना की, जिससे अजमेर के विकास कार्यों में नई गति आने की उम्मीद है। इस प्रकार, अजमेर में आयोजित इस जनसुनवाई के माध्यम से मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जनता को विकास कार्यों में आने वाली किसी भी रुकावट से मुक्त रहने का आश्वासन दिया है।
Rajasthan Bypoll 2024 के बीच चुनावी माहौल तेजी से गर्मा रहा है। प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सीट दौसा पर सियासी घमासान चरम पर पहुंच चुका है। चुनावी मैदान में कांग्रेस और भाजपा के दो प्रमुख नेता, सचिन पायलट और डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, अपने-अपने तरीके से वोटरों को लुभाने में जुटे हुए हैं। दोनों के बीच इस संघर्ष को प्रदेश की राजनीति के सबसे दिलचस्प मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। गहलोत का बयान बदल सकता है चुनाव की दिशा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दौसा उपचुनाव को लेकर एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने मैच फिक्सिंग के आरोप लगाए थे, और इसने पूरे चुनावी माहौल को बदल दिया। गहलोत का यह बयान प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर गया और दौसा का चुनाव अचानक गरमाता हुआ नजर आया। गहलोत के बयान के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने सक्रियता दिखाते हुए चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। पायलट ने जोता चुनावी फसल, किरोड़ी मीणा ने किया पलटवार सचिन पायलट ने दौसा में दीनदयाल बैरवा के कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर जब ट्रैक्टर पर सवार होकर चुनावी प्रचार किया, तो यह दृश्य देखकर विपक्षी खेमे में हलचल मच गई। पायलट का यह कदम चुनावी रणनीति के तहत था, ताकि वह ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ बढ़ा सकें। वहीं, भाजपा के नेता डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भी चुनावी मैदान में अपनी ताकत दिखाई और मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने समर्थकों के साथ प्रचार करते हुए पायलट को चुनौती दी। दोनों नेताओं के बीच यह सीधी लड़ाई अब राज्य की राजनीति में एक अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है। दौसा में पायलट और किरोड़ी मीणा के बीच अस्मिता की जंग अब दौसा उपचुनाव सीधे तौर पर सचिन पायलट और डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के बीच दिखाई दे रहा है। पायलट, जो कांग्रेस के मजबूत नेता हैं, दौसा को खोकर कांग्रेस आलाकमान के सामने कमजोर नहीं दिखना चाहते हैं। वहीं, डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को भरोसा है कि भाजपा इस सीट पर जीत हासिल करेगी, और उन्होंने अपने भाई के लिए केंद्रीय आलाकमान से टिकट दिलवाने की पूरी कोशिश की है। दोनों नेताओं के बीच यह संघर्ष केवल चुनावी मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह दोनों की राजनीतिक अस्मिता की लड़ाई बन गई है। राजनीतिक संघर्ष में सियासी प्रतिष्ठा की दांव पर दौसा की इस सीट पर चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जहां दोनों दिग्गज अपने-अपने दलों के लिए प्रतिष्ठा की जंग लड़ रहे हैं। पायलट जहां गहलोत के बयान के बाद कांग्रेस को जीत दिलाने की भरसक कोशिश करेंगे, वहीं किरोड़ी मीणा भाजपा के लिए इस सीट को जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दौसा की यह चुनावी जंग कौन जीतेगा – पायलट की कांग्रेस या मीणा का भाजपा खेमा।
Rajasthan News- राजस्थान में पुलिस विभाग में जवानों और अधिकारियों के ट्रांसफर पर अब पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य सरकार की ओर से पहले से ही तबादलों पर रोक है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस सहित अन्य महकमों में हजारों की संख्या में ट्रांसफर किए गए थे। अब डीजीपी यूआर साहू ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी रेंज आईजी और जिला एसपी को स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि अगले आदेश तक पुलिस में किसी भी तरह का तबादला नहीं किया जाएगा। डीजीपी का आदेश: ट्रांसफर नहीं होंगे डीजीपी यूआर साहू ने सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक राज्य सरकार तबादलों पर से प्रतिबंध नहीं हटाती, तब तक किसी भी पुलिसकर्मी का ट्रांसफर नहीं किया जाए। अगर किसी स्थिति में ट्रांसफर बहुत ही आवश्यक हो, तो उसके कारणों के साथ पुलिस मुख्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। तबादलों पर रोक के बावजूद ट्रांसफर का सिलसिला जारी हालांकि राजस्थान सरकार ने तबादलों पर पहले से ही प्रतिबंध लगा रखा है, फिर भी कई जिलों और संभागों में पुलिस विभाग के स्तर पर ट्रांसफर हो रहे थे। डीजीपी के अनुसार, इस पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और सभी रेंज आईजी और जिला एसपी अब अपने स्तर पर बिना अनुमति के किसी पुलिसकर्मी का ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। बिना अनुमति ट्रांसफर करने पर होगी कार्रवाई डीजीपी के आदेशों में कहा गया है कि किसी भी ट्रांसफर के लिए पुलिस मुख्यालय से अनुमति लेना आवश्यक होगा। आदेश के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी यूआर साहू ने साफ किया है कि ट्रांसफर का निर्णय केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही सक्षम अधिकारियों से अनुमति के बाद ही लिया जाएगा। तबादलों पर रोक के पीछे का कारण राजस्थान सरकार का मानना है कि कई मामलों में तबादलों का दुरुपयोग हो सकता है, जिससे महकमें में अनुशासन और स्थायित्व पर असर पड़ता है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य पुलिस महकमें में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखना है। राजस्थान सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के पुलिस विभाग में एक नया संयम और अनुशासन स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। यह कदम पुलिस महकमें में स्थिरता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
राजस्थान उपचुनाव 2024 में उपचुनाव 2024 का चुनावी रंग अब पूरी तरह से जम चुका है। दौसा की सीट पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है, जहां कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट और भाजपा के नेता डॉ. किरोड़ी लाल मीणा आमने-सामने हैं। दोनों ही नेता मतदाताओं को लुभाने में हर हथकंडा आजमा रहे हैं, जिससे क्षेत्र का चुनावी तापमान चरम पर पहुंच गया है। गहलोत के बयान ने चुनाव में भरी नई जान राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का एक बयान चुनाव की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। उन्होंने दौसा के उपचुनाव को “मैच फिक्सिंग” के आरोप में घेरकर एक नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी, जिसके बाद ठंडा पड़ा चुनावी माहौल अचानक गर्म हो गया। गहलोत के इस बयान के बाद कांग्रेस सांसद मुरारी मीणा और सचिन पायलट सक्रिय हो गए और उन्होंने तुरंत ही चुनाव प्रचार में उतरकर माहौल में जोश भर दिया। ट्रैक्टर पर सवार होकर पायलट ने बढ़ाया चुनावी जोश कांग्रेस के नेता सचिन पायलट ने दौसा के सैथल में कांग्रेस प्रत्याशी दीनदयाल बैरवा के कार्यालय का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को देखकर ऐसा लगा मानो पूरा दौसा वहां जमा हो गया हो। पायलट ने ट्रैक्टर पर सवार होकर जनसंपर्क किया, जिससे उन्होंने ग्रामीण मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित किया। उनकी यह रणनीति देखकर विपक्षी खेमे में हलचल मच गई। पायलट के इस रैली स्टाइल ने यह साफ कर दिया कि वह अपनी राजनीतिक ताकत का पूरा प्रदर्शन कर रहे हैं। किरोड़ी मीणा का मोटरसाइकिल शो दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता और चुनावी दांवपेंचों के माने हुए खिलाड़ी, डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भी पायलट को टक्कर देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने समर्थकों के साथ चुनावी मैदान में प्रवेश किया, जिससे उनकी रैली में जोश भर गया और भाजपा के पक्ष में समर्थन जुटाने का प्रयास किया। दौसा में सीधी टक्कर: पायलट बनाम किरोड़ी मीणा दौसा का चुनाव अब पूरी तरह से सचिन पायलट और किरोड़ी लाल मीणा के बीच की सीधी लड़ाई बन गया है। एक ओर पायलट अपनी ताकत दिखाकर कांग्रेस आलाकमान के सामने मजबूत स्थिति में रहना चाहते हैं, तो दूसरी ओर किरोड़ी अपने भाई के लिए केंद्रीय नेतृत्व से टिकट लेकर यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि दौसा सीट भाजपा के खाते में जाएगी। अशोक गहलोत के बयान के बाद सचिन पायलट अपने गढ़ दौसा को जीतकर कांग्रेस में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं ताकि गहलोत को कोई मौका न मिले। इस चुनावी दंगल में पायलट और किरोड़ी मीणा के बीच चल रही जोरदार टक्कर ने दौसा के चुनाव को रोचक बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे अपना नेता चुनती है और कौन बाजी मारता है।
Love And War: बॉलीवुड के दो हॉट टॉप एक्टर्स रणबीर कपूर और विक्की कौशल इन दिनों अपनी आगामी फिल्म लव एंड वॉर को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में दोनों सितारों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, जिसमें वे राजस्थान में एक साथ पोज देते नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर में उनके डैशिंग और स्टाइलिश लुक को देखकर फैंस इस बात का अनुमान लगा रहे हैं कि क्या वे इस तरह के लुक में फिल्म लव एंड वॉर में दिखाई देंगे। रणबीर और विक्की की वायरल तस्वीर एक फैन पेज द्वारा साझा की गई इस तस्वीर में रणबीर कपूर और विक्की कौशल, दोनों ही आरामदायक स्टाइल में टी-शर्ट, कैप और धूप का चश्मा पहने नजर आ रहे हैं। वे एक फैन के साथ पोज दे रहे हैं, और यह तस्वीर राजस्थान के बीकानेर की बताई जा रही है, जहां दोनों अभिनेता हाल ही में शूटिंग के लिए पहुंचे थे। तस्वीर के साथ पोस्ट किए गए कैप्शन में लिखा है, “विक्की कौशल लव एंड वॉर की तैयारी के लिए बीकानेर, राजस्थान की अपनी हालिया यात्रा के दौरान।” यह तस्वीर फैंस के बीच तेजी से वायरल हो गई है, और लोगों को फिल्म के बारे में और अधिक जानने की उत्सुकता हो रही है। क्या रणबीर और विक्की फिल्म में करेंगे अधिकारी का रोल? इससे पहले भी रणबीर और विक्की की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें वे वायुसेना अड्डे पर एक वायुसेना अधिकारी के साथ पोज देते हुए दिखाई दिए थे। इस तस्वीर को देखकर यह कयास लगाए जा रहे थे कि क्या वे अपनी आगामी फिल्म लव एंड वॉर में मिलकर अधिकारियों की भूमिका निभाएंगे। हालांकि, इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लव एंड वॉर का धमाकेदार जुगल-बंदी लव एंड वॉर फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली हैं, जिनकी फिल्मों में हमेशा कुछ खास होता है। फिल्म में रणबीर कपूर और विक्की कौशल के साथ आलिया भट्ट भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। यह फिल्म 2026 में ईद के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है। रणबीर और विक्की पहले भी फिल्म संजू (2018) में एक साथ काम कर चुके हैं, जहां रणबीर ने संजय दत्त की मुख्य भूमिका निभाई थी और विक्की ने उनके दोस्त कमली का किरदार निभाया था। फिल्म की शूटिंग की शुरुआत मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संजय लीला भंसाली ने 7 नवंबर को रणबीर कपूर के साथ फिल्म लव एंड वॉर की शूटिंग शुरू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में फैंस को अब इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार है, जो एक शानदार और ऐतिहासिक कहानी के साथ आ रही है। क्या रणबीर और विक्की का यह डैशिंग लुक फिल्म में होगा?अब यह सवाल हर फैन के दिमाग में है, और लव एंड वॉर के रिलीज होने तक यह उत्सुकता बनी रहेगी।
Karauli News। राजस्थान के करौली जिले में अवैध बजरी खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस द्वारा अवैध बजरी परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सपोटरा थाना पुलिस ने पांच ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए हैं। एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान में पुलिस ने सपोटरा के जोडली पुलिया के पास बनास नदी से अवैध रूप से बजरी भरकर ले जा रहे ट्रैक्टर ट्रॉलियों को पकड़ा। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त किया और तीन ट्रैक्टर ट्रॉली चालकों को गिरफ्तार किया। पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई से अवैध खननकर्ताओं में हड़कंप मच गया है। अरेस्ट किए गए आरोपियों की पहचान: गिरफ्तार आरोपियों में बंटी बैरवा (पुत्र हरिलाल बैरवा), शाहिद खान (पुत्र आजाद खान) और रवि बैरवा (पुत्र विश्राम बैरवा) शामिल हैं। इन तीनों आरोपियों को अवैध खनन के मामले में गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी फरार हो गए हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। आगे की कार्रवाई और अभियान: सपोटरा थाना अधिकारी कन्हैयालाल ने बताया कि पुलिस की यह कार्रवाई अवैध खनन पर कड़ी नज़र रखने के लिए जारी रहेगी। पुलिस टीम अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके। एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय ने कहा कि अवैध खनन और बजरी परिवहन पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी ताकि स्थानीय पर्यावरण और नदी को नुकसान पहुंचाने वाले इन गतिविधियों को रोका जा सके। इस विशेष अभियान में पुलिस विभाग की सफलता से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार और प्रशासन अवैध खनन की रोकथाम के लिए गंभीर है और इस पर सख्त कार्रवाई करेगा।
Rajasthan SI Paper Leak-राजस्थान पुलिस सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में अब तक छोटे स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी से उठे सवालों के बाद एसओजी ने चार्जशीट में कई बड़े नामों का खुलासा किया है। इस मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के तत्कालीन चेयरमैन संजय श्रोत्रिय सहित अन्य उच्च अधिकारियों की भूमिका भी संदेहास्पद बताई गई है। एसओजी ने कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में यह स्पष्ट किया है कि इस पेपर लीक मामले में केवल छोटे लोग ही नहीं, बल्कि बड़े जिम्मेदार अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। एसओजी की चार्जशीट में बड़े खुलासे एसओजी ने 29 अक्टूबर को इस मामले में 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की, जिसमें कई अहम तथ्य सामने आए। इसमें बताया गया है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग के तत्कालीन चेयरमैन संजय श्रोत्रिय और आयोग की सदस्य मंजू शर्मा, संगीता आर्या, जसवंत राठी की भूमिका भी संदिग्ध है। इन सभी अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने रामू राम राईका के परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए पेपर लीक में मदद की। रामू राम राईका के परिवार को फायदा पहुंचाने की साजिश चार्जशीट के अनुसार, रामू राम राईका ने अपने बेटे देवेश और बेटी शोभा को थानेदार बनाने के लिए एक महीने पहले ही पेपर प्राप्त कर लिया था। यही नहीं, राईका ने RPSC के चेयरमैन संजय श्रोत्रिय से उनके घर पर मुलाकात की थी, जहां श्रोत्रिय ने यह कहा था कि “देखते हैं”। इस मुलाकात से यह साफ होता है कि राईका और श्रोत्रिय के बीच पहले से कोई समझौता था। पेपर देने का जिम्मा बाबूलाल कटारा पर था एसओजी ने यह भी खुलासा किया कि रामू राम राईका को पेपर बाबूलाल कटारा ने दिया था, जिनको तत्कालीन चेयरमैन भूपेंद्र सिंह ने SI परीक्षा के लिखित परीक्षा के प्रश्न पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। कटारा ने दो सेटों में पेपर तैयार किए थे – एक पहले दिन के लिए और दूसरा दूसरे दिन के लिए। यह पेपर एक महीने पहले ही राईका के पास पहुंच चुका था, ताकि उनके बच्चों को पेपर में मदद मिल सके। पार्टी और अधिकारियों के बीच सांठगांठ का खुलासा चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि राईका के बच्चों को परीक्षा में लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों और कुछ नेताओं के बीच सांठगांठ थी। इसके चलते पेपर लीक का मामला एक बड़ी साजिश का हिस्सा बनकर सामने आया। इस मामले में लगातार नए नामों का खुलासा हो रहा है, जिससे यह मामला और भी संगीन होता जा रहा है। क्या है भविष्य में कार्रवाई? इस मामले में एसओजी की जांच अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी और कई महत्वपूर्ण खुलासों से भरी हुई है। आरोपियों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार और RPSC के अधिकारियों को भी कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। अब यह देखना होगा कि इस मामले में और कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और क्या न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाते हैं। राजस्थान के SI भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले ने न केवल परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार उच्च पदों पर बैठे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
Rajasthan Bypolls-राजस्थान की 7 विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनावों में जातिगत समीकरण सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि हर सीट पर जातिगत गणित अलग है, जिससे चुनावी माहौल और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। कांग्रेस, बीजेपी, और क्षेत्रीय दल इस बार परिवारवाद, सहानुभूति कार्ड और जातीय समीकरणों के आधार पर चुनावी दांव खेल रहे हैं। जानें हर सीट पर जातीय समीकरण और दलों की रणनीति। रामगढ़: मुस्लिम वोट बैंक पर टिकी कांग्रेस की उम्मीद अलवर जिले की रामगढ़ सीट सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए जानी जाती है। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 30% से ज्यादा है, जो कांग्रेस के लिए एक बड़ा सहारा है। कांग्रेस ने आर्यन जुबैर को मैदान में उतारा है, जो दिवंगत विधायक जुबैर खान के पुत्र हैं। बीजेपी ने सुखवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जिनकी छवि यहां सॉफ्ट मानी जाती है। इससे कांग्रेस को मुस्लिम वोटों के एकजुट होने की उम्मीद है, जबकि बीजेपी भी परंपरागत वोटरों को साधने की कोशिश में है। दौसा: सामान्य वर्ग करेगा जीत का फैसला दौसा की सीट पर जातिगत समीकरण बेहद महत्वपूर्ण हैं। यहां बीजेपी ने अनुसूचित जनजाति से जगमोहन मीणा को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने अनुसूचित जाति के डीडी बैरवा को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर 50% से ज्यादा एससी-एसटी वोट हैं, जबकि बाकी सामान्य, ओबीसी और मुस्लिम वोटर हैं। चूंकि सामान्य वर्ग और ओबीसी समुदाय का कोई उम्मीदवार नहीं है, इसलिए इस बार ये वर्ग किसे समर्थन देते हैं, यह देखना अहम होगा। बीजेपी को उम्मीद है कि परंपरागत सामान्य और ओबीसी वोट उनके साथ रहेंगे। देवली-उनियारा: मीणा वोटों में बंटवारे का डर टोंक जिले की इस सीट पर कांग्रेस के कस्तूरचंद मीणा को मीणा और मुस्लिम वोट बैंक के सहारे चुनावी मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस को यहां सचिन पायलट के प्रभाव के कारण गुर्जर वोटों की भी उम्मीद है। लेकिन कांग्रेस के बागी नेता नरेश मीणा के मैदान में उतरने से मीणा वोटों के बंटने की संभावना है। भाजपा ने राजेन्द्र गुर्जर को टिकट देकर कांग्रेस की गुर्जर वोटों पर पकड़ को कमजोर करने की कोशिश की है। कांग्रेस की बड़ी उम्मीद मुस्लिम वोटों पर टिकी है, जबकि बीजेपी सामान्य और ओबीसी वोटों पर दांव लगा रही है। झुंझुनू: राजेंद्र गुढ़ा बने एक्स फैक्टर शेखावटी क्षेत्र की इस सीट पर जाट और मुस्लिम वोटों की संख्या अधिक है। कांग्रेस ने यहां अमित ओला को टिकट दिया है, जो ओला परिवार से आते हैं। बीजेपी ने जाट समुदाय से राजेन्द्र भांभू को टिकट दिया है। जाट वोटों में बंटवारे की स्थिति के बीच, कांग्रेस के एससी और मुस्लिम वोटों में राजेंद्र गुढ़ा सेंध लगा सकते हैं, जिससे बीजेपी को फायदा हो सकता है। खींवसर: जाट वोटों का त्रिकोणीय संघर्ष नागौर जिले की खींवसर सीट पर जाट, मुस्लिम और अनुसूचित जाति के वोटर्स का दबदबा है। यहां बीजेपी, कांग्रेस और हनुमान बेनीवाल की आरएलपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। बीजेपी ने रेवतराम डांगा को उम्मीदवार बनाया है, वहीं हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल आरएलपी से मैदान में हैं। कांग्रेस ने सवाईसिंह की पत्नी रतन चौधरी को टिकट दिया है। तीनों ही उम्मीदवार जाट समुदाय से हैं, जिससे जाट वोटों के तीन भाग में बंटने की संभावना है। इस सीट पर एससी और मुस्लिम वोट जीत का आधार बन सकते हैं। चौरासी (आरक्षित): एसटी वोटर्स का दबदबा बांसवाड़ा जिले की चौरासी सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और यहां एसटी वोटर्स का प्रभुत्व है। लगभग 85% आबादी एसटी समुदाय की है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के बावजूद भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) ने भी इस सीट पर अपना मजबूत आधार बनाया है, जिससे जातिगत समीकरण में बदलाव देखा जा सकता है। सलूंबर: आदिवासी और अन्य वोटों का प्रभाव उदयपुर जिले की सलूंबर सीट अब एक अलग जिला बन चुकी है। यहां आदिवासी वोटों के अलावा जैन, ब्राह्मण, राजपूत और ओबीसी मतदाता भी प्रभावशाली हैं। भाजपा ने दिवंगत विधायक अमृतलाल मीणा की पत्नी शांतादेवी को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने रेशम मीणा को और बीएपी ने रमेशचंद मीणा को मैदान में उतारा है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों को आदिवासी वोटों के साथ सामान्य वर्ग के समर्थन की भी उम्मीद है। क्या बदलेगी परंपरा? राजस्थान में जातिगत समीकरणों का हमेशा से महत्वपूर्ण असर रहा है, लेकिन इस बार सभी दलों ने रणनीति में बदलाव करते हुए जातिगत परंपराओं को चुनौती दी है। उपचुनाव के इन परिणामों से ही यह तय होगा कि राजस्थान की राजनीति में जातिगत समीकरणों की अहमियत बनी रहेगी या बदलती रणनीतियों से नई परंपरा की शुरुआत होगी।
Siddharthnagar News। एक बार फिर से तराई में राजस्थान जैसी गर्मी का प्रकोप महसूस हो रहा है। पिछले चार दिनों से तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। रविवार को अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री तक पहुँच गया, जिससे तपिश और लू के थपेड़ों ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। लोग केवल जरूरी कामों के लिए ही घर से बाहर निकल रहे हैं, क्योंकि गर्म हवा और तीखी धूप से बचना मुश्किल हो गया है। घर के अंदर भी पंखे और कूलर राहत देने में नाकाम साबित हो रहे हैं। गर्मी का कहर जारी, मौसम विभाग ने दी चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और लू का प्रकोप जारी रहेगा। पिछले सप्ताह हुई बारिश के बाद कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब तापमान तेजी से बढ़ रहा है। एक हफ्ते में तीन बार हुई बारिश के बावजूद शुक्रवार को तापमान 40.2 डिग्री और शनिवार को 42.2 डिग्री तक पहुँच गया। रविवार को 43.5 डिग्री के साथ स्थिति और भी गंभीर हो गई। सुबह से ही लू का असर महसूस होने लगा और दोपहर होते-होते खुले में बैठना असहनीय हो गया। शहर में सन्नाटा, अस्पतालों में भीड़ शहर के प्रमुख मार्ग जैसे उसका रोड, बर्डपुर और स्टेशन रोड पर सन्नाटा पसरा रहा। हर दिन गुलजार रहने वाली ये सड़कें भीषण गर्मी के कारण वीरान दिखीं। अस्पतालों में भी गर्मी और लू से प्रभावित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे हालात में सावधानी बरतने की बेहद आवश्यकता है। डॉक्टरों की सलाह: जरूरत हो तभी निकलें बाहर माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के डॉ. सीबी चौधरी का कहना है कि इस समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। यदि बहुत जरूरी हो तभी बाहर निकलें और पूरी तरह से ढक कर जाएं। गमछा या छतरी का इस्तेमाल करें, ताकि गर्मी से बचा जा सके। समय-समय पर पानी पीते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। यदि लू के लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। एहतियात बरतें, लू से बचें मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में गर्मी का प्रकोप बढ़ सकता है, ऐसे में सावधानी और सतर्कता बेहद जरूरी है।
कैथल जिले के कलायत विधानसभा क्षेत्र के सिसमौर गांव की 25 वर्षीय बेटी रूबल ने राजस्थान राज्य न्यायिक परीक्षा में सफलता प्राप्त कर जज बनकर पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली रूबल ने राज्य में 76वीं रैंक के साथ इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास किया। रूबल के इस अभूतपूर्व उपलब्धि को लेकर गांव और परिवार में खुशी की लहर है, वहीं उनके सम्मान में राधा कृष्ण पब्लिक स्कूल, कैथल में एक स्वागत समारोह आयोजित किया गया। रूबल की शैक्षिक यात्रा रूबल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राधा कृष्ण पब्लिक स्कूल, कैथल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने सोनीपत के खानपुर गांव स्थित भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई (BLLB) की। रूबल ने बताया कि विश्वविद्यालय में अध्ययन करते हुए उन्होंने न्यायिक सेवा में जाने का सपना देखा और अपनी मेहनत और लगन से उसे साकार किया। अपने परिवार और ग्रामीण क्षेत्र का नाम न्यायिक क्षेत्र में रोशन करने का दृढ़ निश्चय उनकी सफलता की प्रेरणा बना। परिवार का हौसला बना प्रेरणा रूबल के पिता बलजीत सिंह का इसी साल 22 अगस्त को निधन हो गया था। उनके परिवार ने इस कठिन समय में उनका साथ देते हुए उन्हें प्रेरित किया। उनकी मां प्रीति, भाई रणदीप और बहन रूबी ने उनके हौसले को बनाए रखा। स्कूल के निदेशक लाभ सिंह लैलर ने रूबल की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया और बताया कि उनका परिवार हमेशा रूबल की पढ़ाई और करियर में उनका सहारा बना रहा। समारोह में किया गया भव्य सम्मान राधा कृष्ण पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में रूबल का विशेष सम्मान किया गया। स्कूल के निदेशक लाभ सिंह लैलर और प्रधानाचार्या मंजू रानी ने उन्हें पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया। ग्रामीणों और स्कूल के शिक्षकों ने उनके इस मुकाम तक पहुंचने के संघर्ष की सराहना की। रूबल की सफलता का मंत्र: अनुशासन और सोशल मीडिया से दूरी रूबल ने बताया कि उनकी इस सफलता का बड़ा कारण स्कूल में सिखाए गए अनुशासन और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारी के दौरान वह सोशल मीडिया से दूर रहीं और केवल सकारात्मक और उपयोगी सामग्री पर ही ध्यान दिया। रूबल का मानना है कि सोशल मीडिया से अच्छी चीजें सीखकर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना सफलता का प्रमुख सूत्र है। ग्रामीण क्षेत्र में एक नई उम्मीद रूबल की इस सफलता ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र का मान बढ़ाया है। ग्रामीणों का कहना है कि रूबल ने न्यायिक क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण अंचल के बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देती है।
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