Author: UmaKant Joshi
Ajmer में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें 11वीं कक्षा के छात्र ने 200 से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बना लिया और तीन महीने में करीब 45 लाख रुपये की ठगी कर डाली। इस घटना के बाद अजमेर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन पूछताछ की जा रही है। आरोपी की शातिर ठगी की स्कीम पुलिस के अनुसार, 19 साल के काशिफ मिर्जा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर मुनाफे का लालच देकर लोगों को ठगा। वह लोगों को इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर आकर्षित करता और उन्हें यह भरोसा दिलाता कि वे कम पैसों में बहुत बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। काशिफ अपने अच्छे अंग्रेजी ज्ञान का उपयोग कर भोले-भाले लोगों को अपनी जाल में फंसा लेता और उनसे पैसे प्राप्त कर लेता। उसके द्वारा दिए गए लालच में आकर लोग अपनी मेहनत की कमाई उसे ट्रांसफर कर देते थे। काशिफ के लग्जरी लाइफस्टाइल का खुलासा पूछताछ में यह भी सामने आया कि 11वीं कक्षा का छात्र काशिफ मिर्जा एक लग्जरी कार, महंगे फोन और ब्रांडेड लैपटॉप का मालिक था, जिसे पुलिस ने बरामद किया है। इसके साथ ही उसने जो ठगी की थी, उससे उसने काफी लग्जरी जीवन जीने की कोशिश की थी। Ajmer पुलिस की गिरफ्त में आरोपी अजमेर साइबर थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और उसे न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपी ने और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है। पुलिस को इस मामले में और मामलों के खुलने की पूरी संभावना है। ठगी का तरीका आरोपी ने महिलाओं से कुल 45 लाख रुपये की ठगी की थी। वह छोटे निवेश के बदले बड़ा मुनाफा देने का लालच देता था, जैसे कि 9999 रुपये में 15999 रुपये और 13 सप्ताह में 1,39,999 रुपये का मुनाफा देने का दावा करता था। अब आरोपी पुलिस की हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस को पूरा यकीन है कि इस ठगी के और भी मामले सामने आएंगे। यह मामला साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, और लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, खासकर सोशल मीडिया के जरिए होने वाली ठगी से।
Children’s Day का महत्व और इतिहास हर साल 14 नवंबर को भारत में ‘बाल दिवस’ मनाया जाता है, जो भारतीय बच्चों के अधिकारों, उनके विकास और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए एक अहम दिन है। यह दिन विशेष रूप से भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की याद में मनाया जाता है, जिन्हें बच्चों के प्रति उनकी गहरी भावना और समर्पण के लिए ‘चाचा नेहरू’ के नाम से जाना जाता है। पंडित नेहरू का मानना था कि बच्चों का सही तरीके से पोषण और शिक्षा ही देश के उज्जवल भविष्य की कुंजी है। उन्होंने हमेशा बच्चों के लिए बेहतर अवसरों की वकालत की और यह माना कि “आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे.” उनका मानना था कि बच्चों के सही विकास से ही एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। Children’s Day की शुरुआत पंडित नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को हुआ था, और उनकी मृत्यु के बाद, 27 मई 1964 को यह निर्णय लिया गया कि उनके योगदान को याद करते हुए, उनकी जयंती 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाई जाएगी। बाल दिवस की शुरुआत 1954 में हुई थी, लेकिन इसके बाद पंडित नेहरू की मृत्यु के बाद, इसे और अधिक व्यापक रूप से मनाने का निर्णय लिया गया। पहला औपचारिक बाल दिवस 1964 में मनाया गया था। Children’s Day क्यों मनाते हैं? बाल दिवस का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों और उनके भले के लिए जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन को मनाने का मतलब सिर्फ बच्चों की मासूमियत और आनंद का जश्न मनाना नहीं है, बल्कि यह यह भी याद दिलाना है कि हमें बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। आज भी बहुत से बच्चे ऐसे हैं जिन्हें स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसी बुनियादी चीजों का सही से लाभ नहीं मिल पाता। बाल दिवस के माध्यम से, हम उनके अधिकारों की रक्षा और उन्हें बेहतर अवसर देने की दिशा में काम करने का संकल्प लेते हैं। बाल दिवस का महत्व – क्यों है यह इतना खास? बाल दिवस न केवल बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता का दिन है, बल्कि यह उनके सपनों और आकांक्षाओं को सम्मानित करने का भी दिन है। एक माँ के लिए उसका बच्चा सबसे प्यारा होता है, और बाल दिवस इस भावनात्मक जुड़ाव को भी दर्शाता है। हर माँ चाहती है कि उसका बच्चा खुश, स्वस्थ और सफल हो, और बाल दिवस इस प्रयास की पहचान है। यह दिन बच्चों के उज्जवल भविष्य को संजोने और उनके लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज बनाने की दिशा में एक कदम है। बाल दिवस कैसे मनाया जाता है? भारत में बाल दिवस को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। स्कूलों में इस दिन विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जहां बच्चों को मनोरंजन, शिक्षात्मक खेल, और नृत्य-संगीत का आनंद मिलता है। कई स्कूलों में बच्चों के लिए विशेष लंच या मिठाईयां भी दी जाती हैं। यह दिन बच्चों के चेहरे पर खुशी लाने के साथ-साथ उनके अधिकारों और उनकी शिक्षा की दिशा में सरकार और समाज से एक सशक्त संदेश भी भेजता है। क्यों मनाना चाहिए बाल दिवस? बाल दिवस मनाना इस बात का प्रतीक है कि एक बच्चा केवल एक शिक्षा प्राप्त करने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह एक समाज और राष्ट्र का निर्माण करने वाली कड़ी है। बच्चों के लिए उचित स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, और सुरक्षा उपलब्ध कराना हमारा कर्तव्य है, और बाल दिवस इस दिशा में हम सभी को जागरूक करने का एक तरीका है। इसे मनाकर हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे समाज में बच्चे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और उनका शारीरिक और मानसिक विकास सही दिशा में हो सके। आखिरकार… बाल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की नींव बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, और समग्र कल्याण पर आधारित होती है। अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे कल एक बेहतरीन भविष्य का निर्माण करें, तो हमें उनके लिए एक सुरक्षित और समृद्ध आज की जरूरत है। 2024 में बाल दिवस – इस साल बाल दिवस के अवसर पर हम सभी को बच्चों के भविष्य को संजोने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संकल्प लेना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बच्चा स्वस्थ हो, शिक्षा प्राप्त करे, और अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचे। बाल दिवस का यह दिन हम सभी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि बच्चों का सही दिशा में पालन-पोषण, उनका मानसिक और शारीरिक विकास ही हमारे समाज का उज्जवल भविष्य तय करेगा।
Rajasthan Bypoll जयपुर: राजस्थान के सात विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। कल यानी बुधवार को इन सीटों पर मतदान होने जा रहा है। हालांकि, इन चुनावों से विधानसभा में सरकार के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन चुनाव के परिणाम कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करेंगे। बीजेपी-कांग्रेस का क्लीन स्वीप का दावाबीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां इन सीटों पर क्लीन स्वीप का दावा कर रही हैं। बीजेपी ने चुनाव प्रचार के लिए अपने सभी बड़े नेताओं, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत से मैदान में उतार दिया है। वहीं, कांग्रेस के प्रचार में अपेक्षित जोश नहीं दिखा। चुनाव प्रचार के बाद, सभी की नजरें 23 नवंबर को घोषित होने वाले नतीजों पर टिकी हैं। नतीजे भले ही विधानसभा का संतुलन न बदलें, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल, और बीएपी नेता राजकुमार रोत जैसे दिग्गजों की साख इस चुनाव से जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रतिष्ठाराजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह पहला विधानसभा उपचुनाव है। लोकसभा चुनावों में पार्टी को झटका लगने के बाद से यह उपचुनाव उनके नेतृत्व के लिए अहम माना जा रहा है। पिछले एक साल में राज्य सरकार ने कई योजनाओं को लागू करने का दावा किया है, जिनमें “राइजिंग राजस्थान” जैसी निवेश सम्मेलनों के आयोजन शामिल हैं। इन उपचुनावों में जनता का मत सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के रूप में देखा जाएगा। डोटासरा की अकेली मेहनतकांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इस उपचुनाव में कांग्रेस का मुख्य चेहरा बने हुए हैं। पूरे चुनाव प्रचार में अकेले डोटासरा ही सक्रिय दिखाई दिए। भाजपा के बड़े नेताओं ने चुनाव क्षेत्रों में प्रवास तक किया, जबकि कांग्रेस के अन्य नेता प्रचार से दूर रहे। यदि नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आते हैं, तो यह डोटासरा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी और उनके कद में इजाफा होगा। खींवसर: हनुमान बेनीवाल का शक्ति परीक्षणखींवसर सीट पर आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल ने अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को प्रत्याशी के तौर पर उतारा है। इस सीट पर बीजेपी, कांग्रेस और आरएलपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है, लेकिन चुनाव का पूरा फोकस हनुमान बेनीवाल पर ही है। इस उपचुनाव को उनकी जीत-हार का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि वे अकेले दम पर अपने प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए खड़े हैं। यहां बीजेपी और कांग्रेस के सामने चुनौती है कि वे बेनीवाल के प्रभाव को कैसे मात देंगे। राजकुमार रोत: वागड़ में प्रतिष्ठा की लड़ाईभारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के नेता राजकुमार रोत ने डूंगरपुर-बांसवाड़ा के चौरासी और उदयपुर की सलूंबर सीटों पर अपनी पार्टी को उपचुनाव में उतारा है। रोत ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी के महेंद्रजीत मालवीय को हराकर आदिवासी समुदाय के बीच एक नई पहचान बनाई थी। बीएपी का प्रदर्शन इन सीटों पर काफी महत्वपूर्ण होगा और रोत की साख भी दांव पर लगी है। क्यों है उपचुनाव अहम?राजस्थान में उपचुनाव के बाद स्थानीय निकाय चुनाव भी होने हैं, ऐसे में उपचुनाव के नतीजे राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं। इन उपचुनावों के जरिए पार्टी की ताकत का अंदाजा लगाने का मौका मिलेगा। चुनावी नतीजे यह भी बताएंगे कि जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट है या नहीं। इस प्रतिष्ठा की जंग में कौन विजयी होता है, इसका जवाब तो 23 नवंबर को ही मिलेगा, लेकिन फिलहाल सभी दलों की निगाहें इस चुनावी दंगल पर टिकी हुई हैं।
Udaipur-सुप्रीम कोर्ट ने जून 2022 में हुए कन्हैयालाल हत्याकांड के एक आरोपी मोहम्मद जावेद को जमानत दिए जाने के खिलाफ नोटिस जारी किया है। कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने इस साल सितंबर में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को दी गई जमानत के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। घटना का पूरा विवरण 2022 में उदयपुर के दर्जी कन्हैयालाल की हत्या ने देशभर में सनसनी फैला दी थी। आरोप है कि रियाज अटारी और गौस मोहम्मद नाम के दो मुख्य आरोपी ग्राहक बनकर कन्हैयालाल की दुकान पर पहुंचे और धारदार हथियारों से उनकी हत्या कर दी। घटना के बाद उन्होंने हत्या का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिसमें सांप्रदायिक नारे लगाए गए थे और प्रधानमंत्री समेत अन्य लोगों के खिलाफ धमकी दी गई थी। इस घटना का उद्देश्य साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाना था, और इसे लेकर देशभर में आक्रोश देखा गया। आरोपी जावेद की भूमिका मामले की जांच एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने की, जिसमें जावेद समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया। आरोप है कि जावेद ने हमलावरों को कन्हैयालाल की लोकेशन और उपस्थिति की जानकारी दी थी। जावेद पर आरोप है कि उसने मुख्य आरोपियों को हत्या को अंजाम देने में सहायता प्रदान की थी। हाईकोर्ट में जमानत पर फैसला और सुप्रीम कोर्ट का नोटिस सितंबर 2023 में राजस्थान हाईकोर्ट ने जावेद को जमानत दे दी, यह कहते हुए कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। हाईकोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष यह नहीं दिखा सका कि जावेद ने साजिश रची थी। इसी आधार पर उसे जमानत दी गई, क्योंकि जावेद जुलाई 2022 से जेल में बंद है और एनआईए उसकी लोकेशन कोर्ट में पेश नहीं कर पाई थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका की मुख्य बातें कन्हैयालाल के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने जावेद के अपराध की गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया। याचिका में कहा गया कि जावेद ने मुख्य आरोपियों को लोकेशन बताकर हत्या में सहयोग किया और उसके साथ साजिश रची। अधिवक्ता नेमी सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि जावेद इस साजिश में सक्रिय सदस्य था और उसके खिलाफ एनआईए के आरोप पत्र में पर्याप्त साक्ष्य हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए और आरोपी जावेद से इस मामले में जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
Ajmer news: राजस्थान के अजमेर जिले स्थित पुष्कर मेला इस बार खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी शानदार मंच बन रहा है। मेले के तीसरे दिन भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों के बीच कबड्डी मैच आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय खिलाड़ियों ने विदेशी टीम को करारी शिकस्त दी। यह मुकाबला मेला मैदान में हुआ, जिसमें भारतीय टीम ने 43-29 से जीत हासिल की। भारतीय टीम में कुल 10 खिलाड़ी थे, जबकि विदेशी टीम में 8 खिलाड़ी शामिल थे। मैच के दौरान दोनों टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी ताकत और रणनीति से विदेशी खिलाड़ियों को मात दी। खिलाड़ियों का उत्साहभारतीय टीम के सदस्य विक्रम शर्मा ने बताया कि यह मैच खेल की भावना के तहत खेला गया और टीम ने एकजुट होकर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासन का धन्यवाद किया कि उन्होंने कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल को पुनर्जीवित किया और इसे एक बड़ा मंच दिया। भारतीय खिलाड़ियों का कहना था कि उन्हें हर बार मैच में भाग लेकर बहुत खुशी होती है और यह जीत उन्हें और उत्साहित करती है। वहीं, विदेशी खिलाड़ियों ने भी इस खेल को बेहद रोमांचक बताया और कहा कि उन्हें इस तरह के मैच खेलने का अनुभव बेहद अच्छा लगा। दोनों टीमों के बीच उत्साह और जोश से भरी प्रतियोगिता ने दर्शकों का दिल जीता। पुष्कर मेला और धार्मिक गतिविधियाँयह कबड्डी मैच पुष्कर मेले के दौरान हुआ, जो इस वर्ष एक और कारण से खास है। मेले में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक हिस्सा ले रहे हैं और भारतीय संस्कृति, खेल, और कला का अनुभव ले रहे हैं। साथ ही, मेला क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियाँ भी जोरों पर हैं, क्योंकि कल कार्तिक एकादशी से धार्मिक मेले की शुरुआत हो जाएगी। इस दौरान श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में स्नान करने और ब्रह्मा जी के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं, ताकि किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। यह मेला ना सिर्फ सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि खेलों और अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता के कारण भी खास हो रहा है।
Rajasthan High Court: राजस्थान उच्च न्यायालय ने सिरोही जिले के आबूरोड उपखंड स्थित मीन तलेटी में रिसोर्ट निर्माण को लेकर दायर की गई जनहित याचिका को खारिज कर दिया है और याचिकाकर्ता कांतिलाल उपाध्याय को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर जनहित याचिका का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए भविष्य में इस प्रकार की याचिकाएं दायर न करने के लिए भी चेतावनी दी। यह मामला 2022 में सामने आया था, जब कांतिलाल उपाध्याय ने मीन तलेटी में एक रिसोर्ट के निर्माण को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति रेखा बोराणा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर शामिल थे, ने इस याचिका को ‘जनहित याचिका का दुरुपयोग’ करार देते हुए इसे खारिज कर दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने याचिका में किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं किया। यह याचिका प्रतिशोध लेने और तथ्यों को छिपाने के उद्देश्यों से दायर की गई थी। अदालत ने कांतिलाल उपाध्याय को यह चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी याचिकाएं दायर करने से पहले वह पूरी जिम्मेदारी से तथ्यों का खुलासा करें और न्यायालय से कोई जानकारी छिपाने का प्रयास न करें। न्यायालय की सख्त टिप्पणी न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई यह याचिका, जो कि न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास प्रतीत होती है, ‘अनुकरणीय जुर्माना’ के साथ खारिज की जानी चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने संयम रखते हुए इस मामले में केवल जुर्माने का आदेश दिया और कांतिलाल उपाध्याय को भविष्य में इस प्रकार की जनहित याचिकाओं की पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी दी। न्यायालय ने कांतिलाल उपाध्याय को 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसे राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कोष में जमा किया जाएगा। यह भी आदेश दिया गया कि यदि याचिकाकर्ता अगले 30 दिनों में जुर्माना राशि जमा नहीं करता है, तो उसे भविष्य में जनहित याचिकाएं दायर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। याचिकाकर्ता का इतिहास यह पहला मामला नहीं है जब कांतिलाल उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर की हो। इसके पहले, उन्होंने 17 जनहित याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें से कई मामलों में न्यायालय ने उनकी याचिकाओं को खारिज किया है। न्यायालय का यह स्पष्ट संदेश था कि जनहित याचिका का दुरुपयोग करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि राजस्थान उच्च न्यायालय जनहित याचिकाओं का सही उद्देश्य से उपयोग न करने वालों पर कड़ी नजर रखेगा और ऐसी याचिकाओं को दायर करने वालों को सख्त सजा दी जाएगी।
Jhunjhunu Bypoll- झुंझुनूं उपचुनाव के मौके पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी की प्रेस वार्ता में मीडिया द्वारा किए गए सवालों से बचने की कोशिश की गई। पत्रकारों के सवालों का गोलमोल जवाब देते हुए सीपी जोशी ने कई मामलों में सीधा जवाब देने से इनकार किया, जिससे उनके जवाबों को लेकर काफ़ी चर्चा हुई। इस दौरान उनके साथ पूर्व सांसद संतोष अहलावत, जिला अध्यक्ष बनवारीलाल सैनी, सीकर जिला अध्यक्ष कमल सिखवाल, और बीजेपी जिला प्रवक्ता कमलकांत शर्मा भी मौजूद रहे। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष से किए गए सवालों का गोलमोल जवाब प्रेस वार्ता में जब मीडिया ने सीपी जोशी से सरकार के 11 महीने पूरे होने के बाद झुंझुनूं में कांग्रेस सरकार के अधिकारी-कर्मचारियों को लेकर बीजेपी नेताओं की सरपरस्ती के आरोपों पर सवाल किया, तो उन्होंने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। इसके बजाय, उन्होंने बीजेपी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया और सवाल का टालमटोल जवाब दिया। सड़कों से जुड़े सवालों के साथ-साथ प्रदेश में खेल यूनिवर्सिटी कहां खोली जाएगी, यमुना नहर के एमओयू को सार्वजनिक करने की मांग, और झुंझुनूं से आरएमएस कार्यालय का सीकर स्थानांतरण जैसे सवालों पर भी उन्होंने गोलमोल जवाब दिए, जिससे पत्रकारों में असंतोष देखा गया। मंत्री सुमित गोदारा और राजेंद्र सिंह गुढ़ा से जुड़े सवाल पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अलावा, कुछ दिन पहले प्रदेश कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा से भी इसी तरह के सवाल किए गए थे, जिनका उन्होंने भी स्पष्ट उत्तर नहीं दिया था। इसके अलावा, जब मीडिया ने सवाल किया कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा बीजेपी की “बी टीम” का हिस्सा हैं, तो इस पर भी सीपी जोशी ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। इसके अलावा, पत्रकारों ने पूछा कि झुंझुनूं जिले में हुए अग्निवीर को शहीद कहा जाएगा या नहीं, और शहीद अग्निवीर के परिवार को मदद कब तक मिलेगी? इस पर सीपी जोशी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, जिससे यह सवाल भी खुला छोड़ दिया गया। बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया और मीडिया की नाराजगी बीजेपी नेताओं की इस तरह की गोलमोल प्रतिक्रिया और सीधा जवाब न देने की आदत पर मीडिया में नाराजगी देखी गई। पत्रकारों का कहना है कि जब सरकार के 11 महीने पूरे हो चुके हैं, तो ऐसे सवालों का स्पष्ट और ठोस जवाब मिलना चाहिए था। जनता के बीच इन मुद्दों को लेकर चिंता है, और नेताओं से उम्मीद होती है कि वे अपनी जिम्मेदारी से बचने के बजाय मुद्दों का समाधान पेश करें। यह प्रेस वार्ता इस बार के झुंझुनूं उपचुनाव में बीजेपी की रणनीतियों और नेताओं की छवि पर सवाल खड़ा कर रही है। उपचुनाव के परिणाम से पहले नेताओं की यह प्रतिक्रिया पार्टी के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती है।
Rajasthan: धारा 370 पर भजनलाल शर्मा के बयान से मचा बवाल, ऊंट को राष्ट्रीय पशु बताने पर फिर हुए ट्रोल
Rajasthan के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एक बार फिर अपने बयानों के कारण चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में देवली-उनियारा विधानसभा में आयोजित सभा में धारा 370 पर उनके बयान से एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भाषण के दौरान गलती से उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके पिता भी धारा 370 को “हटा” नहीं सकते। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके बयान का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, और यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनके भाषण कौन तैयार करता है। धारा 370 पर भजनलाल का बयान बना चर्चा का विषय सभा में मुख्यमंत्री ने जनता से पूछा, “धारा 370 हटनी चाहिए क्या?” इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने धारा 370 हटाकर देश का “कलंक” मिटाया। हालांकि, गलती से उन्होंने यह कह दिया कि राहुल गांधी और उनके पिता भी धारा 370 को “हटा” नहीं सकते। इस स्लिप टंग के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। ऊंट को राष्ट्रीय पशु बताने पर भी हुए ट्रोल यह पहली बार नहीं है जब भजनलाल अपने बयानों के कारण ट्रोल हुए हैं। इससे पहले, बजट सत्र के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने ऊंट को भारत का राष्ट्रीय पशु बता दिया था। इस बयान पर भी सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई थी। मोदी की सभा में बार-बार भाषण की गलतियां प्रधानमंत्री मोदी की रैली में भी भजनलाल शर्मा ने कई बार स्लिप टंग का शिकार होकर गलतियां की हैं। लोकसभा चुनाव की एक रैली में उन्होंने भाजपा को 2014 और “2025” में 25-25 सीटें जीतने का दावा किया, जबकि उन्हें 2019 कहना था। इसी तरह, एक अन्य सभा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने गलती से वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम ले लिया। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स का नाम लेने में भी गलती एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राजस्थान की “एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स” पर बात करते हुए वे इसका नाम बार-बार गलत उच्चारित करते रहे। इस वजह से उन्हें “गैंग फोर्स” या “गैंगस्टर फोर्स” जैसे शब्द कहते देखा गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में भी असमंजस की स्थिति बन गई। कांग्रेस ने उठाए सवाल भजनलाल शर्मा की बार-बार जुबान फिसलने पर कांग्रेस ने उन पर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर उनके भाषण कौन तैयार करता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री को अपने बयानों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए ताकि बार-बार की जाने वाली गलतियों से बचा जा सके। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बयानबाजी में बार-बार हुई चूकें सोशल मीडिया पर तो चर्चा का विषय बन ही रही हैं, साथ ही ये मुद्दे विपक्ष के लिए भी सरकार पर निशाना साधने का एक बड़ा कारण बनते जा रहे हैं।
Rajasthan News- राजस्थान में 12 नवंबर को होने वाले “अबूझ मुहूर्त” को लेकर सरकार और पुलिस विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गए हैं। इस दिन प्रदेश में बड़ी संख्या में बाल विवाह होने की संभावना होती है, जिसे रोकने के लिए राजस्थान पुलिस ने एक बड़ा अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। इस अभियान का नाम “ऑपरेशन लाडली” रखा गया है, जिसका उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए जनजागरण और प्रभावी कार्रवाई करना है। ऑपरेशन लाडली: एक विस्तृत अभियान पुलिस महानिरीक्षक (नागरिक अधिकार) जयनारायण ने 11 से 16 नवंबर तक राज्यभर में इस अभियान को चलाने का आदेश दिया है। अभियान का मुख्य उद्देश्य यह है कि पुलिस और संबंधित एजेंसियां बच्चों और समाज के सभी वर्गों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता पैदा करें। यह अभियान राज्यभर में उपखंड स्तर से लेकर गांव-गांव तक जाएगा और पुलिस विभाग विभिन्न तरीकों से लोगों को समझाने का प्रयास करेगा। जयनारायण ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है और इसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस कुप्रथा को रोकने के लिए पुलिस विभाग हर स्तर पर काम कर रहा है। अभियान के दौरान पुलिस बाल विवाह के खिलाफ प्रचार-प्रसार के लिए कई कार्यशालाओं, रैलियों, नुक्कड़ नाटकों, होर्डिंग्स और अन्य गतिविधियों का आयोजन करेगी। जनजागरण के लिए प्रचार-प्रसार ऑपरेशन लाडली के तहत राजस्थान पुलिस ने बाल विवाह के खिलाफ जनजागरण के लिए कई प्रचार विधियों को अपनाया है। इनमें प्रमुख स्थानों पर दीवार लेखन, जागरूकता रैलियां, शासकीय और धार्मिक कार्यक्रमों में बाल विवाह के खिलाफ शपथ, स्लोगन, वृत्तचित्र, नुक्कड़ नाटक और होर्डिंग्स का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, दैनिक समाचार पत्रों और मीडिया के अन्य माध्यमों के जरिए भी इस अभियान को व्यापक रूप से प्रचारित किया जाएगा। बाल विवाह रोकने के लिए पुलिस की तैयारी राजस्थान पुलिस का कहना है कि इस अभियान के दौरान पुलिस विभाग हर संभव प्रयास करेगा ताकि बाल विवाह की कोई भी घटना न हो। पुलिस उपखंड, ग्राम स्तर और सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर जागरूकता पैदा करेगी और लोगों को इस अपराध के गंभीर परिणामों से अवगत कराएगी। यह अभियान राज्यभर में न केवल पुलिस विभाग, बल्कि समाज के हर वर्ग को शामिल करके बाल विवाह जैसी कुप्रथा की प्रभावी रोकथाम की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है। निष्कर्षऑपरेशन लाडली राजस्थान पुलिस की ओर से एक सराहनीय प्रयास है, जिसका उद्देश्य बाल विवाह जैसी प्रथा को समाप्त करना है। सरकार और पुलिस विभाग की यह पहल समाज में जागरूकता फैलाने और बाल विवाह के खिलाफ ठोस कदम उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Ajmer news- अजमेर शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों, खासतौर से दरगाह क्षेत्र, में अवैध इमारतों के निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नियमों को ताक पर रखकर, बिना नगर निगम से नक्शा पास कराए, संकरी गलियों में बहुमंजिला होटल और गेस्ट हाउस बनाए जा रहे हैं। ऐसे अवैध निर्माणों से जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है क्योंकि मात्र 6 फीट चौड़ी गलियों में फायर ब्रिगेड जैसी आवश्यक सेवाएं पहुंच पाना असंभव हो जाता है। नगर निगम की कार्रवाई के बावजूद निर्माणकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं, जो नियमों का उल्लंघन कर धड़ल्ले से निर्माण कार्य कर रहे हैं। अवैध निर्माण पर प्रशासन की सुस्तीनगर निगम की ओर से अवैध निर्माण रोकने के प्रयासों के बावजूद दरगाह क्षेत्र और हिंदू मोची मोहल्ले जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में, जी प्लस टू की सीमा का उल्लंघन कर चार-पांच मंजिला इमारतें बनाई जा रही हैं। निगम द्वारा कुछ इमारतों को सील भी किया गया है, लेकिन बावजूद इसके नए निर्माण जारी हैं। निगम ने पहले भी कई निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी किए थे, लेकिन प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहे। अगर हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?संकरी गलियों में बन रही ये अवैध बहुमंजिला इमारतें अगर किसी दुर्घटना का कारण बनती हैं, तो स्थिति भयावह हो सकती है। आग लगने जैसी आपदा की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां गलियों की चौड़ाई नाकाफी होने की वजह से घटनास्थल तक पहुंच ही नहीं सकेंगी। ऐसी स्थिति में बड़ी जनहानि का खतरा बना रहेगा, और सवाल यह उठता है कि आखिर इस पर कौन जिम्मेदार होगा? स्थानीय पार्षद और अधिकारी की भूमिका पर सवालस्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी और वार्ड पार्षद इस समस्या के प्रति उदासीन हैं, और कुछ ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों और पार्षदों की मिलीभगत से ही अवैध निर्माणकर्ताओं को मनमानी करने का मौका मिल रहा है। क्षेत्र के वार्ड 53 के पार्षद के.के. त्रिपाठी से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने प्रतिक्रिया देने से बचते हुए फोन नहीं उठाया। स्थानीय लोग नगर निगम और पार्षद की निष्क्रियता के प्रति नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई न होने से वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। नगर निगम की निष्क्रियता पर सवालअजमेर जैसे ऐतिहासिक शहर में जनसुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम की बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन अवैध निर्माण के खिलाफ ठोस कदम न उठाने से प्रशासन की उदासीनता साफ झलकती है। सवाल यह उठता है कि जब इन अवैध इमारतों की वजह से जनहानि की संभावना है, तो निगम इस पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? क्या प्रशासन अवैध निर्माण को रोकने में सक्षम है, या फिर यह समस्या यूं ही बढ़ती रहेगी? जरूरत है सख्त कार्रवाई कीदरगाह जैसे व्यस्त क्षेत्रों में जनता की सुरक्षा के लिए संकरी गलियों में बन रही अवैध इमारतों पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है। नगर निगम को चाहिए कि वह जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर, अवैध निर्माण पर सख्त कदम उठाए।
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