Author: UmaKant Joshi
राजस्थान में हाल ही में सात सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इसके बाद राज्य सरकार चार बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फैसलों पर विचार कर सकती है। ये निर्णय सरकार की आगामी नीतियों और प्रदेश की राजनीतिक दिशा को काफी प्रभावित करेंगे। 1. एसआई भर्ती परीक्षा का फैसला एसआई भर्ती परीक्षा को रद्द करने या बनाए रखने का निर्णय राज्य सरकार के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। विधि मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस मामले पर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। 2. नए जिलों पर फैसला पिछली सरकार द्वारा बनाए गए 17 नए जिलों के भविष्य को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में समिति का काम लगभग पूरा हो चुका है। 3. पिछली सरकार के फैसलों की समीक्षा पिछली सरकार के अंतिम समय में लिए गए फैसलों की समीक्षा के लिए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की अध्यक्षता में गठित समिति ने कई भूमि आवंटनों सहित अन्य मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। 4. वन स्टेट वन इलेक्शन का निर्णय निकाय चुनावों और पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के साथ, सरकार को “वन स्टेट वन इलेक्शन” नीति पर निर्णय लेना होगा। प्रमुख आयोजनों का प्रभाव राज्य सरकार की पहली वर्षगांठ और “राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट” जैसे बड़े आयोजन इन फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ निर्णय इन आयोजनों से पहले और कुछ बाद में लिए जा सकते हैं। इन सभी मुद्दों पर लिए जाने वाले निर्णय राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा असर डालेंगे। 4o
IPL Auction: पंजाब के पास सबसे ज्यादा पर्स, राजस्थान की झोली सबसे ज्यादा खाली, जानें टीमों की स्थिति
IPL Auction: आईपीएल 2025 के लिए मेगा नीलामी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। सभी 10 टीमों ने अपनी रिटेन लिस्ट बीसीसीआई को सौंप दी है और अब नीलामी में भाग लेने के लिए फ्रेंचाइजियां अपनी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। 24-25 नवंबर को सऊदी अरब के जेद्दाह में होने वाली मेगा नीलामी में श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत, केएल राहुल, अर्शदीप सिंह, जोस बटलर और मिचेल स्टार्क जैसे बड़े नामों की बोली लगेगी। पंजाब किंग्स का पर्स सबसे ज्यादा पंजाब किंग्स के पास सबसे ज्यादा 110.5 करोड़ रुपये का पर्स बचा है। उन्होंने केवल दो खिलाड़ियों, शशांक सिंह और प्रभसिमरन सिंह को रिटेन किया, जिनके लिए उन्होंने कुल 9.5 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा, उनके पास 4 राइट टू मैच कार्ड (आरटीएम) भी हैं, जो उन्हें नीलामी में और भी विकल्प देते हैं। राजस्थान रॉयल्स की झोली खाली राजस्थान रॉयल्स ने रिटेंशन के लिए सबसे ज्यादा राशि खर्च की है। उन्होंने 6 खिलाड़ियों को रिटेन किया, जिनमें संजू सैमसन और यशस्वी जायसवाल शामिल हैं, जिसके लिए उन्होंने 79 करोड़ रुपये खर्च किए। अब उनके पास केवल 41 करोड़ रुपये बचें हैं और एक भी आरटीएम कार्ड नहीं है। इससे यह स्पष्ट है कि राजस्थान को नीलामी में बहुत सावधानी से खर्च करना होगा। अन्य टीमों की स्थिति नीलामी में संभावनाएं इस बार की नीलामी में कई नामी खिलाड़ी उपलब्ध होंगे, जिनमें मिचेल स्टार्क और पैट कमिंस जैसे ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज शामिल हैं, जो पिछले समय में सबसे महंगे बिकने वाले खिलाड़ी बने थे। नीलामी में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी टीम कितनी बड़ी बोली लगाती है। निष्कर्ष:आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी में टीमों की रणनीतियां और पर्स की स्थिति महत्वपूर्ण साबित होने वाली है। पंजाब किंग्स जहां अपनी बड़ी रकम के साथ नीलामी में उतरेगी, वहीं राजस्थान रॉयल्स को ध्यान से खर्च करना होगा क्योंकि उनके पास सीमित राशि बची है।
Jaipur Foundation Day- जयपुर, जिसे “गुलाबी नगर” के नाम से जाना जाता है, 18 नवंबर 2024 को अपनी स्थापना के 297 वर्ष पूरे कर चुका है। अपनी खूबसूरत वास्तुकला, सुव्यवस्थित योजना, और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के लिए विश्व प्रसिद्ध इस शहर का निर्माण 1727 में आमेर के कछवाहा राजपूत शासक सवाई जय सिंह द्वितीय ने करवाया था। यह शहर वास्तु और तंत्र शास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर डिजाइन किया गया था और इसे आधुनिक भारत के पहले नियोजित शहरों में से एक माना जाता है। जयपुर की स्थापना और प्रारंभिक योजना जयपुर को बंगाल के ब्राह्मण विद्वान और वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य द्वारा डिज़ाइन किया गया था। इसे नौ ब्लॉकों में विभाजित किया गया था, जिनमें से दो ब्लॉक राजकीय भवनों और महलों के लिए थे, जबकि सात ब्लॉक आम जनता के आवास के लिए बनाए गए थे। शहर को चारों ओर से विशाल दीवारों और सात मजबूत द्वारों से घेरा गया था ताकि इसे बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित रखा जा सके। स्थापना के समय, जल महल के पास एक अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया था, जिसे शहर के शुभारंभ के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस यज्ञ के दौरान बड़े-बड़े पत्थरों के दीपक बनाए गए थे। गुलाबी रंग का इतिहास 1878 में, प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा के दौरान, पूरे शहर को गुलाबी रंग से रंगा गया था। तब से, जयपुर को “गुलाबी नगर” के नाम से जाना जाता है। यह रंग न केवल इसकी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है, बल्कि यहां के लोगों के मेहमाननवाजी और उत्साह का प्रतीक भी बन गया है। जयपुर के ऐतिहासिक स्थल जयपुर अपने महलों, किलों और ऐतिहासिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, जो इसकी सांस्कृतिक और स्थापत्य संपदा को दर्शाते हैं। संस्कृति और वास्तुकला जयपुर की वास्तुकला इंडो-सरसेनिक और मुगल शैली का मिश्रण है। यहां के महल, बावड़ियां, और चौड़ी सड़कों ने इसे अपनी स्थापना के समय से ही एक व्यवस्थित और भव्य शहर बना दिया। जयपुर का 297वां स्थापना दिवस जयपुर के 297वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक महीने तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें सांस्कृतिक प्रदर्शन, ऐतिहासिक स्थलों की सजावट और युवाओं के लिए चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। यह आयोजन न केवल शहर की धरोहर को प्रदर्शित करेगा, बल्कि युवाओं को इसकी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का एक प्रयास भी है। निष्कर्ष जयपुर अपनी स्थापना के 297 वर्षों बाद भी अपने सांस्कृतिक उत्साह और स्थापत्य वैभव को संजोए हुए है। इसकी ऐतिहासिक संरचनाएं और नियोजित शहरीकरण इसे भारत के सबसे अनोखे शहरों में से एक बनाते हैं। जयपुर केवल एक शहर नहीं है; यह भारतीय संस्कृति, कला, और इतिहास की जीवंत प्रदर्शनी है।
SDM slapping case- राजस्थान के जयपुर जिले के चाकसू में रविवार को सर्वसमाज की बैठक हुई, जिसमें समरावता गांव प्रकरण पर चर्चा की गई। बैठक में फैसला लिया गया कि सोमवार को नरेश मीणा की रिहाई और समरावता गांव में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। पृष्ठभूमि घटना की शुरुआत राजस्थान में हाल ही में हुए उपचुनाव के दौरान हुई। समरावता गांव में मतदान का बहिष्कार किया गया था। उस समय एसडीएम अमित चौधरी ने कुछ ग्रामीणों को वोट डालने के लिए कहा, जिसके विरोध में नरेश मीणा ने कथित तौर पर उन्हें थप्पड़ मार दिया। इस घटना ने गंभीर रूप ले लिया और मतदान वाली रात पुलिस व ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हिंसा के दौरान 100 से अधिक वाहनों में आग लगा दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं और बच्चों के साथ भी मारपीट की, जिसमें एक छोटे बच्चे को चोटें आईं। वर्तमान स्थिति सर्वसमाज की बैठक में क्या हुआ? चाकसू में आयोजित बैठक में सभी समाजों ने एकजुटता दिखाई। बैठक में यह निर्णय लिया गया: विजय बैंसला की उपस्थिति इस बैठक में देवली-उनियारा से 2023 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके विजय बैंसला ने भी भाग लिया। उन्होंने समरावता गांव जाकर हिंसा प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रभाव और आगामी कदम इस प्रकरण ने राजस्थान में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर बहस छेड़ दी है। नरेश मीणा समर्थक, सर्वसमाज की बैठक के बाद, सोमवार को कूच की तैयारी कर रहे हैं। इस मामले में पुलिस और प्रशासन पर निष्पक्ष जांच का दबाव बढ़ता जा रहा है। निष्कर्ष समरावता प्रकरण केवल एक घटना नहीं है; यह ग्रामीण लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े करता है। सर्वसमाज की एकता और जनभावनाओं को देखते हुए, इस मामले का समाधान जल्द और न्यायपूर्ण तरीके से होना अत्यावश्यक है।
Jaipur News- राजस्थान की राजधानी जयपुर का 298वां स्थापना दिवस 18 नवंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर शहर की ऐतिहासिक गैटोर छतरियों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन के लिए गैटोर कला संस्थान ने एक विशेष पोस्टर का विमोचन किया है, जिसे जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा ने किया। गैटोर कला संस्थान का सांस्कृतिक समारोह जयपुर की स्थापना के 298 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में गैटोर कला संस्थान ने इस बार भी ऐतिहासिक गैटोर की छतरियों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इस दौरान जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह के स्मारक को सजाया जाएगा और वहां पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। गैटोर कला संस्थान के मंत्री ओ.पी. चांडक और संगठन मंत्री आशीष भट्ट ने बताया कि इस बार कार्यक्रम में युवाओं को शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से स्कूल और कॉलेज के छात्रों को भी आमंत्रित किया गया है। ये छात्र जयपुर के प्रसिद्ध और दर्शनीय स्थानों की चित्रकला बनाएंगे, जिन्हें कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित किया जाएगा। सबसे अच्छी पेंटिंग को पुरस्कृत भी किया जाएगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इसके साथ ही, प्रसिद्ध जयपुर थियेटर आर्टिस्ट अनिल मारवाड़ी ढूंढाड़ी भाषा में “सुणो भायाजी : जैपर का किस्सा” प्रस्तुत करेंगे, जो जयपुर की ऐतिहासिक विरासत और संस्कृति पर आधारित होगा। पर्यावरण के प्रति संकल्प कार्यक्रम के अंत में, संस्था के सदस्य और सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तित्व जयपुर को स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा बनाए रखने के लिए सामूहिक संकल्प लेंगे। यह आयोजन जयपुरवासियों के लिए न केवल ऐतिहासिक महत्व का है, बल्कि यह उन्हें अपने शहर की धरोहर को संरक्षित रखने की प्रेरणा भी देगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जयपुर की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देना और शहर के नागरिकों को इसे संजोकर रखने के लिए प्रेरित करना है।
Ujjain News- उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित भस्म आरती में बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार किया गया। इस विशेष दिन पर बाबा महाकाल को तीसरे नेत्र से सजाया गया, जिसके बाद उन्होंने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। सुबह 4 बजे बाबा महाकाल के जागरण के साथ ही इस भव्य आयोजन की शुरुआत हुई, और महाकाल के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। तीसरे नेत्र से हुआ श्रृंगार कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर बाबा महाकाल को विशेष रूप से श्रृंगारित किया गया। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, इस दिन बाबा महाकाल को तीसरा नेत्र लगाया गया और उन्हें फूलों की माला से सजाया गया। इस अलौकिक स्वरूप में बाबा महाकाल ने श्रद्धालुओं को अपने दर्शन दिए। इसके बाद, महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भक्तों ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से भस्मारती का दर्शन किया और इसकी भव्यता का आनंद लिया। भक्तों ने “जय श्री महाकाल” का उद्घोष किया, जो इस शुभ अवसर की दिव्यता को और भी बढ़ा रहा था। भस्म आरती और पूजा के विशेष आयोजन इस दिन की भस्म आरती के दौरान विशेष पूजा भी की गई। भगवान विष्णु का पूजन और आरती भी वैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित की गई। मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु राजा बलि के यहां विश्राम करते हैं, और इस समय पृथ्वी लोक की सत्ता महादेव शिव के पास होती है। वैकुंठ चतुर्दशी के दिन भगवान शिव इस सत्ता को श्री विष्णु को सौंपते हैं और कैलाश पर्वत पर तपस्या के लिए लौट जाते हैं। इस विशेष दिन पर बाबा महाकाल के भस्मारती के साथ-साथ भक्तों ने इस आध्यात्मिक वातावरण में दिव्य अनुभूति की। यह आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक धार्मिक पर्व था, बल्कि यह महाकाल के प्रति अटूट श्रद्धा और आस्था का भी प्रतीक बना।
Ajmer News- अजमेर जिले के पुष्कर मेले में गुरुवार को आयोजित मशहूर गायक कैलाश खेर का सांस्कृतिक कार्यक्रम अव्यवस्थाओं के चलते हंगामे में बदल गया। कार्यक्रम में एंट्री के लिए मची धक्का-मुक्की ने व्यवस्था को बिगाड़ दिया, जिससे दर्शकों में काफी नाराजगी देखी गई। पुष्कर मेले में हर साल की तरह इस बार भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कैलाश खेर का कार्यक्रम इस मेले का मुख्य आकर्षण था, लेकिन प्रशासन की लापरवाही ने आयोजन को अव्यवस्था में बदल दिया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस और लोगों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि धक्का-मुक्की और मारपीट तक की नौबत आ गई। वीआईपी ट्रीटमेंट से बिगड़ी व्यवस्था स्थानीय लोगों और दर्शकों का आरोप है कि जिला प्रशासन और पुलिस ने अपने परिवार के लोगों और खास मेहमानों को वीआईपी पास दिए, जिनकी वजह से भीड़ नियंत्रण में दिक्कतें आईं। वीआईपी पास धारकों के लिए विशेष प्रवेश की व्यवस्था बनाई गई थी, जबकि आम लोगों को कार्यक्रम में प्रवेश के लिए लंबी लाइन में खड़ा किया गया। इस दौरान धक्का-मुक्की होने लगी और कई दर्शकों ने इसे पुलिस की “गुंडागर्दी” करार दिया। पुलिस और लोगों के बीच धक्का-मुक्की अफरा-तफरी के माहौल में पुलिसकर्मी और दर्शकों के बीच तीखी बहस हुई। मौके पर मौजूद अलवर गेट थाना अधिकारी श्यामसिंह चारण ने भी भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास में कुछ दर्शकों के साथ हाथापाई की, जिसके बाद माहौल और बिगड़ गया। लोगों का कहना है कि पुलिस द्वारा अपने चहेतों को प्राथमिकता देने से व्यवस्था बिगड़ी, और आम दर्शकों को कार्यक्रम में प्रवेश के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी। जिला प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप जानकारी के अनुसार, पुष्कर मेले में कैलाश खेर के इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन अजमेर जिला प्रशासन और पर्यटन व पशुपालन विभाग द्वारा किया गया था। लेकिन प्रशासन की ओर से वीआईपी पास बांटने और सुरक्षा में लापरवाही के कारण कार्यक्रम असफल रहा। हंगामे के बाद कई दर्शकों ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों में कोई अव्यवस्था न हो।
SDM Slap Case Update- राजस्थान के देवली-उनियारा में SDM अमित कुमार चौधरी को थप्पड़ मारने के मामले में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस ने आरोपी नरेश मीणा के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत 10 गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। उपचुनाव के दौरान मतदान के दौरान नरेश मीणा ने SDM को थप्पड़ मारा था, जिसके बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया। गुरुवार को नरेश मीणा को गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया, जहां उन्होंने SDM अमित चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। पुलिस ने नरेश मीणा के खिलाफ हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्ति नष्ट करने और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इस घटना के बाद एसडीएम अमित चौधरी के समर्थन में आरएएस एसो. (राजस्थान प्रशासनिक सेवा संघ) ने पेन डाउन हड़ताल शुरू कर दी है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की योजना बनाई है, ताकि इस मुद्दे पर आगे का फैसला लिया जा सके। एसोसिएशन की प्रमुख मांग नरेश मीणा की गिरफ्तारी थी, जो मुख्यमंत्री के आदेश पर पूरी हो चुकी है। इसके अलावा, प्रशासनिक अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एम्प्लाइज सिक्योरिटी एक्ट बनाने की भी मांग की है। अजमेर रेंज के आईजी ओमप्रकाश ने बताया कि नरेश मीणा पर दो दर्जन से अधिक मुकदमे हैं, जिनमें उनकी गिरफ्तारी लंबित है। इस मामले में पुलिस ने 60 अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। आज, पुलिस नरेश मीणा को कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाएगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, पुलिस ने समरावता और अलीगढ़ कस्बे में एसटीएफ जवानों की तैनाती की है, ताकि किसी भी प्रकार के बवाल से बचा जा सके। नरेश मीणा को गिरफ्तारी के बाद टोंक और फिर पीपलू थाने में रखा गया था, ताकि शांति बनाए रखी जा सके। आज का दिन पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि मीणा के समर्थक हंगामा करने की कोशिश कर सकते हैं।
Guru Nanak Jayanti 2024, जिसे ‘गुरुपर्व’ या ‘प्रकाश पर्व’ भी कहा जाता है, सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक, गुरु नानक देव जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में हर साल मनाया जाता है। इस साल 15 नवंबर 2024 को गुरु नानक जी की 555वीं जयंती मनाई जा रही है। यह सिख समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती है और पूरी श्रद्धा एवं भव्यता के साथ मनाई जाती है। कार्तिक माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व आध्यात्मिकता, सेवा और सद्भावना का प्रतीक है। गुरु नानक देव जी: समाज सुधारक और मानवता के सच्चे मार्गदर्शक गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में तलवंडी (जो आज ननकाना साहिब, पाकिस्तान में है) में हुआ था। उनके उपदेश मानवता, समानता और धर्मनिरपेक्षता की नींव रखते हैं। उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, जात-पात और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और “एक ओंकार” का संदेश दिया, जो सभी जीवों में एक ही परमात्मा के अस्तित्व को मान्यता देता है। गुरु नानक देव जी ने अपने अनुयायियों को तीन मुख्य उपदेश दिए: उनके संदेश आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को एकजुट रखने का मार्ग दिखाते हैं। प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारों में भव्य आयोजन गुरु नानक जयंती पर गुरुद्वारों में विशेष सजावट की जाती है और ‘अखंड पाठ’ (गुरु ग्रंथ साहिब का निरंतर पाठ) आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही कीर्तन, गुरबाणी के पाठ, प्रवचन और लंगर (भोजन सेवा) के माध्यम से सिख समुदाय और अन्य लोग गुरु नानक देव जी के आदर्शों को आत्मसात करते हैं। यह दिन भाईचारे, शांति और सेवा भाव को बढ़ावा देने के लिए समर्पित होता है। गुरु नानक जयंती पर भेजें शुभकामना संदेश इस पावन पर्व पर आप इन संदेशों के माध्यम से अपने प्रियजनों को शुभकामनाएं भेज सकते हैं और गुरु नानक देव जी की कृपा की कामना कर सकते हैं: इस पर्व का महत्व गुरु नानक जयंती का संदेश पूरे समाज को शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाता है। गुरु नानक जी ने जीवन भर प्रेम, सेवा, परोपकार और एकता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं हमें दूसरों के साथ समानता और भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देती हैं। इस दिन को मनाने का उद्देश्य उनके विचारों को समझना और अपने जीवन में अपनाना है। आइए, इस गुरु नानक जयंती पर हम सभी गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का पालन करते हुए समाज में भाईचारा और मानवता का दीप जलाएं।
राजनीतिक परिवार और बागी छविNaresh Meena Profile- राजस्थान के टोंक जिले की देवली-उनियारा विधानसभा सीट के निर्दलीय प्रत्याशी और कांग्रेस के बागी नेता नरेश मीणा ने हाल ही में एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारकर सुर्खियां बटोरीं। राजनीतिक माहौल में लंबे समय से सक्रिय नरेश का पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा है। उनके पिता कल्याण सिंह मीणा ने 30 वर्षों तक अपने गांव का सरपंच पद संभाला, और वर्तमान में उनकी मां सरपंच हैं। उनकी पत्नी सुनीता जिला परिषद की सदस्य हैं, जबकि छोटे भाई की पत्नी पंचायत समिति में हैं। छात्र जीवन में नरेश राजस्थान विश्वविद्यालय के महासचिव रह चुके हैं। राजनीतिक सफर और बगावत का इतिहासनरेश मीणा कांग्रेस नेता सचिन पायलट के समर्थक माने जाते हैं और उन्हीं के नक्शे-कदम पर चलते हुए बड़े नेता बनने की ख्वाहिश रखते हैं। लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद भी जब उन्हें टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। 2023 में उन्होंने बारां जिले की छबड़ा छीपाबड़ौद सीट से टिकट मांगा था, पर टिकट न मिलने के कारण वे निर्दलीय मैदान में उतरे, हालांकि, उन्हें 44 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। विवादास्पद घटनाएं और गिरफ्तारी13 नवंबर को मतदान के दौरान देवली-उनियारा क्षेत्र में किसी मुद्दे पर उनकी एसडीएम अमित चौधरी से बहस हो गई, जिसके बाद उन्होंने थप्पड़ मार दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना दिया, उनके समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया और कई वाहनों में आग लगा दी। इस मामले में पुलिस ने नरेश मीणा को गिरफ्तार किया है, उनके खिलाफ 23 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, जिनमें से सात मामलों में उनकी गिरफ्तारी होनी बाकी है। पार्टी से निष्कासन और पुनर्वापसीकांग्रेस से कई बार बगावत करने के बावजूद, नरेश ने पार्टी में वापसी की कोशिशें जारी रखीं। पार्टी अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना के प्रस्ताव पर उनकी वापसी हुई, लेकिन टिकट फिर भी नहीं मिला। जब राजस्थान उपचुनाव 2024 में देवली-उनियारा से टिकट मांगा, तो कांग्रेस ने फिर अनदेखी की। परिणामस्वरूप, नरेश ने एक बार फिर निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। क्या है जनता की राय?नरेश मीणा के कृत्य ने क्षेत्र में उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच एक रेखा खींच दी है। उनके समर्थक उनकी गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं और इसे उनके प्रति अन्याय बता रहे हैं। दूसरी ओर, आम जनता और ग्रामीणों में हिंसा और आगजनी से भय का माहौल है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में असंतोष है, वहीं, प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सतर्क है। निष्कर्षनरेश मीणा का यह विवादास्पद चेहरा उनकी राजनीतिक यात्रा का नया मोड़ साबित हो सकता है। कांग्रेस में वापसी की कोशिशों के बावजूद टिकट न मिलना, बार-बार बगावत और बेतरतीब कदम उनके भविष्य पर सवालिया निशान लगाते हैं। वहीं, देवली-उनियारा क्षेत्र में बढ़ती अशांति और हिंसा से स्थिति गंभीर बनी हुई है।
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